फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) चाइल्ड वेलफेयर कमेटी बाल मज़दूरी रोकने की आड़ में शहर के किराना दुकानदार, रेहड़ी पटरी दुकानदारों को अनैतिक और अवैधानिक रूप से प्रताडि़त कर रही है। कमेटी के पदाधिकारी खुद को कानून से ऊपर समझते हुए किसी भी दुकान पर जा धमकते हैं और अपना परिचय दिए बिना ही वहां काम करने वाले लड़कों को जबरन उठा ले जाते हैं, भले ही उनकी उम्र 14 साल से ज्यादा कयों न हो। दुकानदार को धमकी देते हुए बाल भवन बुलाया जाता है मानो बाल भवन न होकर थाना हो। समझा जा सकता है कि वहां लड़के को छोडऩे के लिए सौदेबाजी की जाती होगी।
सेक्टर दो स्थित फेयर वैल्यू जनरल स्टोर पर बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे एक जीप से चार पांच लोग पहुंचे। दुकान के बाहर बैठे करीब 18 वर्षीय विक्की नामक लड़के को ऐसे दबोच लिया जैसे उसने कोई बड़ा अपराध किया हो। दुकान मालिक रवि गर्ग ने इन लोगों से उनका परिचय और लड़के को पकडऩे का कारण पूछा तो उसे भी धमकाया कि तू कौन है जिसे हम अपना आई कार्ड दिखाएं। लड़के से बाल श्रम करवा रहा है। इस पर लड़के ने अपना आधार कार्ड दिखाते हुए बताया कि छह दिन बाद ही वह 18 साल का हो जाएगा। लड़के पर दबाव बनाने लगे कि वह कहे कि उसे यहां एक साल से जबरन काम करवाया जा रहा है। लड़के ने इनकार किया और रवि गर्ग ने बताया कि एक सप्ताह पहले ही उसे नौकरी पर रखा है। उन्होंने एक न सुनी और विक्की को अपहरण कर जबरन वाहन में बैठा कर अपने साथ दौलत राम धर्मशाल के बगल मेें स्थित बाल भवन ले आए। जाते जाते दुकानदार को धमकाया कि बहुत बहुत तुर्रम खान बन रहा हैै, लड़के को छुड़वाने बाल भवन आ जाना सब समझ में आ जाएगा।
बाल भवन में लड़के ने उन्हें बताया कि वह परिवार चलाने के लिए पार्ट टाइम जॉब करता है और मालिक उसे इसके एवज में 14 हजार रुपये महीने देता है लेकिन अधिकारियों ने उसे धमकाते हुए सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए और उस पर दबाव डाला कि बयान दे कि मालिक सात हजार रुपये ही देता है। घटना की जानकारी मज़दूर मोर्चा को हुई तो संवाददाता मामले की जानकारी लेने बाल भवन पहुंचा। सवाल करते ही कमेटी के पदाधिकारियों के सुर बदल गए। बोले कि हम तो केवल पूछताछ के लिए लाए थे उसे छोड़ दिया गया है। उनसे पूछा गया कि जहां से लेकर आए थे क्या वहीं छोड़ कर आए हैं तो बताया गया कि नहीं लड़के से जाने को कह दिया गया है। उनका बयान तब ही झूठा साबित हो गया जब लड़के से फोन पर बात की गई। उसने बताया कि उसे कमरे के अंदर छह घंटे से बैठा कर रखा गया है तेज भूख लग रही है लेकिन अभी तक कुछ भी खाने पीने को नहीं दिया गया। इस बाबत पूछने पर कमेटी के सदस्य धीरे धीरे खिसक लिए। सूचना पाकर बाल भवन पहुंचे पिता ने बेटे को साथ लिया और चला गया। रवि गर्ग ने बताया कि बाल भवन की गाड़ी चलाने वाला युवक कुछ अर्सा पहले ंउसकी दुकान पर आया था और खुद को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से होना बता कर उस पर आटा आदि सामान मुफ्त देने का दबाव बना रहा था। उन्होंने मना कर दिया तो सबक सिखाने की बात कहकर चला गया था। बृहस्पतिवार को इसी खुन्नस में दुकान पर छापा मारा गया।
सवाल ये है कि क्या बाल संरक्षण के नाम पर कमेटी के पदाधिकारियों को कुछ भी करने की खुली छूट मिल गई है। उस लड़के की तरह न जाने कितने लड़कों को रोजाना इसी तरह अपहरण करने की स्टाइल में उठा कर लाया जाता होगा। घंटों कस्टडी में उन्हें भूखे प्यासे रख कर उन्हें मानिसक रूप से प्रताडि़त करना, उन पर दबाव डाल कर मनचाहे बयान लिखवाना, सादे कागजों पर अंगूठा-हस्ताक्षर लेना क्या मानवाधिकार और बाल अधिकारों के उल्लंघन में नहीं आता? दरअसल, बाल संरक्षण की आड़ में कमेटी वाले बच्चों को इसलिए उठा कर लाते हैं कि दुकानदार को डराकर वसूली की जा सके।
सरकार ने काननू बनाया कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों को जोखिमपूर्ण कार्यों में नहीं लगाया जाए लेकिन इसकी आड़ में प्रताडऩा और रिश्वतखोरी का खेल खेला जा रहा है। स्कूलों को खत्म कर सरकार ने गरीबों के लिए शिक्षा व्यवस्था तो पहले चौपट कर रखी है, रोजगार भी नहीं हैं। ऐसे में गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम कर घर की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करें तो बाल संरक्षण के नाम पर उन्हें बंद कर दिया जा रहा है। यदि सरकार को बाल संरक्षण ही करना है तो ऐसे बच्चों के लिए बोर्डिंग स्कूल आदि बना कर उनकी पढ़ाई और लालन पालन का प्रबंध करे ताकि उन्हें रोजगार के लिए भटकना न पड़े। सरकार ये तो कर नहीं रही, और अगर वो खुद कर रहे हैं तो उन्हें बंद कर रहे हैं। विक्की तो इसी एक दिसंबर को 18 साल का होने वाला है। वह बाल संरक्षण कानून के दायरे में भी नहीं आता लेकिन चाइल्ड वेलफेयर कमेटी वालों के लिए कानून का पालन करने से ज्यादा वसूली की तरकीबें तलाशनी होती हैंं।