ख्वाब मेट्रो का दिखाते हैं, शटल ट्रेन तक चला नहीं सकते

ख्वाब मेट्रो का दिखाते हैं, शटल ट्रेन तक चला नहीं सकते
September 01 11:44 2024

पलवल (मज़दूर मोर्चा) पलवल से दिल्ली व गाजियाबाद रूट पर चलने वाली शटल ट्रेनों से पचासों हजार यात्री प्रति दिन काम पर आते-जाते हैं। रेलवे ने यकायक घोषणा की है कि 29 अगस्त से 18 सितम्बर तक ये शटल सेवाएं बंद रहेंगी। कारण यह बताया जा रहा है कि पलवल से पृथला स्टेशन के बीच सिग्नल प्रणाली पर कोई काम करना है।

रेलवे द्वारा इस तरह से शटल सेवाएं बंद कर देना कोई नई बात नहीं है। प्रति वर्ष दिसम्बर से मार्च तक धुंध के नाम पर इन ट्रेनों को बंद कर दिया जाता है। धुंध पड़े या न पड़े ट्रेनें तो बंद हो ही जाती हैं। इसके अलावा प्रति वर्ष एक या दो बार कुछ हफ्तों के लिये इंटरलॉकिंग अथवा सिग्नल प्रणाली या ट्रैक मरम्मत आदि के नाम पर इन ट्रेनों को बंद किया जाना आम बात है। मजे की बात तो यह है कि ये सारी मुसीबतें केवल शटल ट्रेनों पर ही पड़ती हैं, लम्बी दूरी की ट्रेनों पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। पहले तो ट्रैक कम होने का बहाना लिया जाता था परन्तु अब चौथा ट्रैक चालू हो जाने के बावजूद भी शटल ट्रेनों के संचालन में कोई सुधार नहीं हुआ। हां, मोदी सरकार ने इनका किराया जरूर दो से तीन गुणा तक बढ़ा दिया है।

विदित है कि दैनिक यात्री इसके लिये रेलवे को अग्रिम भुगतान करके मासिक व त्रैमासिक पास भी बनवाते हैं। इन ट्रेनों में भीड़ ऐसी होती है जैसे कि डिब्बों में मनुष्य न होकर भूसा भरा हो। ज़ाहिर है क्षमता से कई गुणा अधिक यात्रियों को ठूंस कर चलने वाली ये ट्रेनें भारी मुनाफा कमाती हैं। यह बात अलग है कि रेलवे के कुप्रबन्धन एवं भ्रष्टाचार के चलते यह सारा मुना$फा घाटे में बदल जाता है। उसे इस बात की कोई चिन्ता नहीं कि जिन लोगों से उसने अग्रिम पैसा लेकर यात्रा कराने का जिम्मा ले रखा है, उनका क्या बनेगा, वे कैसे अपने काम पर आना-जाना करेंगे? जाहिर है ऐसे में ये दैनिक यात्री मोटा किराया खर्च करने के साथ-साथ का$फी समय बर्बाद करके अपने-अपने कामों पर जाने की व्यवस्था करते हैं।

विभिन्न गुटों में बंटे दैनिक यात्री संघों को इस बात पर भी विचार करना चाहिये कि जब मुंबई की लोकल ट्रेनों में किराया बढ़ाने या अन्य कोई खुराफात करने की योजना रेलवे प्रबन्धन बनाता है तो वे कैसे उसका मुंहतोड़ जवाब देकर प्रबन्धन को सीधे रास्ते पर ले आते हैं। यह एक गंभीर विचारणीय मुद्दा है।

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Mazdoor Morcha
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