मज़दूर मोर्चा ब्यूरो लूट और धोखाधड़ी में नए-नए कीर्तिमान बनाने वाले गुजराती मोदी द्वारा आविष्कृत ‘आयुष्मान’ कार्ड का भी पूरा-पूरा लाभ उठा रहे हैं। मेहसाणा से प्राप्त सूचना के अनुसार ठगों के एक गिरोह ने बोरीसणा गांव के ऐसे 19 लोगों को पकड़ा जिनके पास ‘आयुष्मान’ कार्ड मौजूद थे। इन सब लोगों को बहका-फुसला कर हृदय रोगी बना कर 10 नवम्बर को अहमदाबाद स्थित ख्याति मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में लाया गया। इनकी फर्जी स्वीकृति लेकर एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी आदि-आदि कर दी गई। इनमें से सात की हालत बिगड़ी तो इन्हें आईसीयू में डाला गया। इनमें से दो की मृत्यु भी हो गई। शेष पांच अभी उपचाराधीन चल रहे हैं।
इस मामले को लेकर जब परिजनों ने हंगामा किया तब जाकर अस्पताल की पोल खुली। प्रशासन द्वारा जांच-पड़ताल करने पर पाया गया कि परिजनों द्वारा दी गई स्वीकृति भी फर्जी थी और उन्हें किसी प्रकार का कोई रोग नहीं था। रोग पहचानने के लिए कोई टेस्ट व जांच आदि कराये जाने का भी कोई साक्ष्य नहीं था। एक मरीज के परिजनों से अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद 25 हज़ार रुपये ऐंठ लिए।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस अस्पताल में बीते 6 माह में 350 से अधिक एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी आदि की गई है। लोगों का मानना है कि इनमें से अधिकतर मामले फर्जीवाड़े के हैं।
जहां अन्य अस्पतालों को ‘आयुष्मान’ का बिल भुगतान प्राप्त करने में हफ्ते और महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं वहीं इस ख्याति अस्पताल की पेमेंट तुर्त-फुर्त आ जाती है। इससे सिद्ध होता है कि गिरोह की पहुंच सत्ता के उच्चतम गलियारों तक है। सुधी पाठक समझ गए होंगे कि मोदी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की अपेक्षा बीमा आधारित ‘आयुष्मान’ योजना को क्यों बढ़ावा देती है? इसके विपरीत जनता को सम्पूर्ण चिकित्सा सेवा देने वाली राज्य सरकारें इस पाखंडी योजना की अपेक्षा सीधे तौर पर सेवाएं प्रदान करती हैं।