पलवल मेट्रो की हवाई घोषणा कर गये मोदी भी

पलवल मेट्रो की हवाई घोषणा कर गये मोदी भी
October 07 06:17 2024

कृष्णपाल-खट्टर की तर्ज पर
फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पिछले करीब छह साल से कृष्णपाल-खट्टर की जोड़ी जो पलवल मेट्रो की हवा हवाई की घोषणा कर रही थी उसे आज मोदी ने दोहरा कर सिद्ध कर दिया कि ये दोनों उनके असली चेले हैं, जो संघी सरकार चलती ट्रेनों को बंद कर सकती हैं वे भला मेट्रो किसके लिए चलाएंगे और मैट्रो की महंगी सवारी कौन सा गरीब कर पाएगा। जनता मोदी के चुनावी जुमलों को अच्छी तरह समझ चुकी है इसलिए पलवल मेट्रो योजना की सच्चाई भी उसे अच्छी तरह पता है, कि डीएमआरसी द्वारा खारिज की यह परियोजना कभी परवान नहीं चढऩे वाली है।

चुनावी रैली में मोदी जिस तरह कांग्रेस को कोसते नजर आए उससे स्पष्ट हो गया कि दस साल तक केंद्र और राज्य की सत्ता में रहीं भाजपा सरकारों ने ऐसा कुछ नहीं किया जिसे जनता के सामने अपनी उपलब्धियों के रूप में गिनाया जा सके। दस साल में उनकी सरकारों ने कुछ किया होता तो गिनाते, जनता को स्वच्छता का छलावा देकर ईकोग्रीन कंपनी से लुटवाया गया। जनकल्याण की कोई योजना चलाने के बजाय परिवार पहचान पत्र की अनिवार्यता लाद कर हज़ारों गऱीब परिवारों को मिलने वाली सरकारी सहायता भी छीन ली। किसानों से खास बैर रखने वाली मोदी-खट्टर-सैनी सरकारों में यूरिया-डीएपी, कीटनाशक सब कुछ महंगा कर दिया गया, फसल बीमा योजना के तहत किसानों से करोड़ों का प्रीमियम वसूला गया लेकिन जब उनकी फसलें तबाह हुईं तो कुछ सौ रुपये मुआवजा राशि देकर उन्हें ठगा महसूस कराया गया। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लगभग खत्म कर दिए, और अपनी नाकामी छिपाने के लिए उसे गाय-गोबर, मुसलमान, राम मंदिर की चाशनी चटा कर अधंभक्ति के नशे में गुमराह कर दिया गया। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के नाम पर स्किल यूनिवर्सिटी का पाखंड किया गया। यहां से बढ़ई, प्लंबर आदि की ट्रेनिंग लेकर निकले युवाओं को मोदी-खट्टर-सैनी की सरकारों ने रोजगार के लिए इजराइल भेज दिया लेकिन वहां उनमे से अधिकतर को एक महीने बाद ही इस कारण नौकरी से निकाल दिया गया कि उन्हें काम ही नहीं आता था, अब वो मज़दूरी करने को मजबूर हैं।

अपना झूठ छिपाने के लिए दूसरे पर दोष मढऩे की संघी कला का इस्तेमाल करते हुए मोदी ने कांग्रेस और राहुल को ओबीसी-दलित विरोधी कहा। जनता आरएसएस-भाजपा की दलित, ओबीसी विरोधी मानसिकता और नीतियों को अच्छी तरह पहचानती है इसलिए मोदी की इस बात पर भीड़ ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जनता मध्य प्रदेश के सीधी में दलित के चेहरे पर पेशाब कर उसे पीटने वाला भाजपा नेता प्रवेश शुक्ला को और मोदी के सांसद अनंत हेगड़े का वह बयान नहीं भूली है कि लोकसभा में चार सौ सीटों से दो तिहाई बहुमत होने पर संविधान को हटाया जाएगा। उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती की सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या करने वालों पर योगी सरकार की मेहरबानी भी जनता नहीं भूली है। यह भी किसी से नहीं छिपा है कि चुनाव में खुद के ओबीसी होने का ढंका पीटने वाले मोदी ने अपनी सरकार में इस वर्ग का कोई भला नहीं किया।जुमलों के बादशाह मोदी किसी भी राज्य में चुनावी रैलियों मेें केवल झूठ ही बोलते हैं, बिहार चुनाव में उनके द्वारा राज्य को सवा लाख करोड़ का पैकेज देने का जुमला आज भी उनके झूठे चरित्र को बयान करने में इस्तेमाल किया जाता है। बल्लभगढ़-पलवल मैट्रो भी उसी तरह का जुमला है। भाजपाई कभी बल्लभगढ़ से पलवल मेट्रो चलवाते हैं तो कभी फरीदाबाद से गुडग़ांव की मेट्रो की घोषणा करते हैं। यह घोषणाएं करते हुए खट्टर-गूजर को छह साल से ज्यादा समय गुजर चुके हैं लेकिन आज तक कहीं एक खंभा भी नहीं खड़ा किया गया।

मुुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस वे हो, बुुदेलखंड एक्सप्रेस वे अटल ब्रिज या कोई अन्य प्रोजेक्ट सब भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान गढ़ते नजर आ रहे हैं। मेट्रो तो छोडि़ए पलवल की जनता की सुविधा के लिए चलाई जाने वाली लोकल ट्रेनें भी मोदी ने कोविड लॉकडाउन के दौरान बंद करा दी थीं। आधी से भी कम लोकल ट्रेनें चलाई गईं और उन्हें स्पेशल ट्रेन का नाम देकर किराया तीन गुणा बढ़ा दिया गया।

कोविड समाप्त हो गया लेकिन आज तक सभी लोकल ट्रेनें बहाल नहीं की गईं, हां लोकसभा चुनाव में भाजपा की हालत पतली देखते हुए मजबूरी में सामान्य किराया लागू किया गया। पलवल की जनता के खैरख्वाह बनते हुए मेट्रो के ख्वाब दिखाने वाले मोदी केवल बंद की गईं सभी लोकल ट्रेनें ही बहाल करा दें यही बहुत होगा। प्रधानमंत्री मोदी को खुश करने के लिए रैली में भीड़ जुटाने के लिए चौक चौराहों पर खड़े होने वाले दिहाड़ी मज़दूरों को पांच सौ रुपये और लंच पैक देकर बसों में लाद कर पहुंचाया गया। फरीदाबाद, पलवल, गुडग़ांव और नूंह जिलों के सभी विधानसभा क्षेत्रों के भाजपा प्रत्याशी इसी तरह भीड़ को जोड़ बटोर कर लाए थे। किराए की यह भीड़ भी प्रधानमंत्री जैसे कद्दावर पद के लिहाज से काफी कम ही थी, जो मोदी को यह अहसास कराने के लिए काफी थी कि इस बार जनता उनके प्रत्याशियों को बाहर का रास्ता दिखाने वाली है। जनता भी समझ चुकी है कि जुमला प्रधानमंत्री और उनके झूठे-कठपुतली मंत्री नेता केवल चुनाव जीतने के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं करते हैं और चुनाव के बाद जन विरोधी कार्य कर लूट कमाई ही करते हैं।

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Mazdoor Morcha
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