बल्लबगढ़ (मज़दूर मोर्चा) पृथला विधासभा क्षेत्र में पडऩे वाला अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज कहने को तो बीते तीन साल से चल रहा है। लेकिन आज भी वहां इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। ओपीडी में मात्र 100-150 मरीज़ छोटी-मोटी बीमारी के लिये आ जाते हैं। यहां भर्ती होने की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है। कारण यह बताया जा रहा है कि अग्निश्मन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं है। यह एनओसी अग्निश्मन विभाग द्वारा तभी दिया जाता है जब इमारत में आग बुझाने के पर्याप्त साधन हों। सवाल यह उठता है कि तीन साल में भी भाजपाई डबल इंजन सरकार इसकी व्यवस्था क्यों नहीं कर पाई?
अस्पताल के न चल पाने का दूसरा बड़ा कारण बिजली का विशेष फीडर का न होना है। विदित है कि जब ये कॉलेज निजी प्रबन्धन द्वारा शुरू किया गया था तब उन्होंने पूरा खर्चा करके विशेष फीडर लगवाया था जिसे बिजली विभाग ने अपने काम में ले लिया और अब कहा जा रहा है कि दोबारा फीडर लगवाने के लिए फिर से पैसा जमा कराया जाए। मजे की बात तो यह है कि मेडिकल कॉलेज भी सरकार का है और बिजली विभाग भी, इसके बावजूद मसला तीन साल से अटका खड़ा है इसी को तो कहते हैं कि काम न करने के सौ बहाने।
उक्त मूल समस्याओं के अतिरिक्त इस संस्थान में न तो पर्याप्त फैकल्टी है और न ही आवश्यक उपकरण आदि। जांच के नाम पर एक पुरानी घिसी-पीटी एक्सरे मशीन जरूर यहां पर मौजूद है। जिसकी जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता। कहने की जरूरत नहीं कि आज के दिन केवल रेडियालॉजी में ही एक्स-रे के अलावा एमआरआई, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड आदि अनेकों मशीनें छोटे-छोटे निजी अस्पतालों में उपलब्ध हैं।
सर्वविदित है कि किसी भी मेडिकल कॉलेज में छात्रों को शिक्षा देने के लिये एक अस्पताल और उसमें पर्याप्त मरीजों का होना आवश्यक है। इसके बिना किताबी पढ़ाई से बनने वाले डॉक्टर किसी काम के नहीं हो सकते। इसी आधार पर नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने इस मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने से इनकार कर दिया था। लेकिन भाजपाइयों की डबल इंजन सरकार ने अपनी धींगामुश्मी के बल पर इस कॉलेज को केवल कमाई के लिए चला रखा है। प्रत्येक छात्र से आठ लाख वार्षिक फीस वसूली जाती है। इस हिसाब से अब तक हरियाणा सरकार छात्रों से 40 करोड़ तो कमा चुकी है तथा आठ करोड़ नए आने वाले बैच से मिल जाएंगे। संघी पूंजीपतियों की इस सरकार से और उपेक्षा ही क्या की जा सकती है?
चंडीगढ़ में बैठी सरकार तो जो कर रही है सो कर रही है लेकिन सवाल तो इस क्षेत्र से चुने गए नयनपाल नामक उस जनप्रतिनिधी पर बनता है कि उन्होंने इस मसले को लेकर आज तक क्या किया? बीते पांच साल में क्या इस मामले को उन्होंने सरकार के सामने उठाया, कभी विधानसभा में इसे लेकर अपनी आवाज़ उठाई? कभी नहीं। उन्हें केवल अपने निहित स्वार्थों को पूरा करने के अलावा और कोई काम नहीं था। पुलिस द्वारा शराब पकड़े जाने पर तो वे सरकार को धमकी दे सकते थे, परन्तु इतने बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल को सुचारू ढंग से चलाने के लिये कभी चूं भी नहीं कर सके।
उनके ही क्षेत्र फतेहपुर बिल्लौच में करीब आठ वर्ष पूर्व प्राइमरी हेल्थ सेंटर (पीएचसी) बनाने के लिए एम्स दिल्ली ने आठ एकड़ ज़मीन पर कब्जा लेकर चार दीवारी तो बना दी थी लेकिन इससे आगे कोई काम नहीं हुआ। सत्तारूढ़ दल से लाभान्वित होने वाले विधायक नयनपाल ने अपने पूरे कार्यकाल में इस ओर कभी ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी। लेकिन इत्ते$फाक से एम्स के नये डायरेक्टर एम. श्रीनिवास को जब इस ज़मीन का पता चला तो वे $फरवरी 2024 में मौका-मुआयना करने पहुंचे और पीएचसी का काम शुरू कराया।
यदि विधायक नयनपाल की थोड़ी-बहुत रुचि जन कल्याण की होती तो वे इस मसले को उठाकर यही काम बहुत पहले भी करा सकते थे। इसके अतिरिक्त नये उभरते औद्योगिक पृथला क्षेत्र में ईएसआई मेडिकल कॉलेज का ग्रामीण हेल्थ सेंटर भी खुलवाया जा सकता था लेकिन विधायक महोदय की इस तरह के कामों में कोई रुचि नहीं थी। लेकिन इसके बावजूद वे पूरी बेशर्मी के साथ क्षेत्र की जनता से वोट मांगते घूम रहे हैं।