फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पहले अवैध निर्माण करवाने और फिर कार्रवाई न करने के नाम पर लूट कमाई करने में नगर निगम के छोटे अधिकारी ही शामिल नहीं है, लगता है कि अतिरिक्त निगमायुक्त (एसीएमसी) आईएएस स्वप्निल रविंद्र पाटिल भी इसी राह पर चल पड़े हैं। एक्सईएन पद्मभूषण नासवा द्वारा सैनिक कॉलोनी बता कर पड़ोस की कृषि भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई चार मंजिला इमारत की जांच में तमाम गड़बडिय़ां पाई गईं। संयुक्त आयुक्त जितेंद्र गर्ग ने अवैध इमारत को तोडऩे और साइट प्लान अनुमोदन की फर्जी घोषणा करने वाली आर्किटेक्ट रजनी लखानी को ब्लैक लिस्ट करने की सिफारिश का पत्र सक्षम अधिकारी एसीएमसी एस रविंद्र पाटिल को लिखा।
कार्रवाई करने के बजाय उन्होंने उल्टे जवाब तलब कर लिया कि उस इलाके में कितनी इमारतें हैं जिनका बिल्डिंग प्लान पास है? जहां कहीं भी निर्माण कार्य चल रहे हैं क्या वहां सरकार द्वारा निर्धारित सभी मानकों का पालन किया जा रहा है? अभी कितने अवैध निर्माणों को नोटिस जारी किए गए हैं? आज तक किस ऑर्किटेक्ट को ब्लैकलिस्ट किया गया है और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? भावार्थ स्पष्ट है जब आज तक ऐसे अवैध धंधेबाजों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो इन बेचारों पर गाज क्यों गिराई जाए।
एसीएमसी ने इतने प्रश्न खड़े कर दिए कि न तो इनका कोई जवाब दिया जाएगा और न ही पद्मभूषण की अवैध इमारत व आर्किटेक्ट रजनी लखानी पर कोई आंच आएगी। यानि एसीएमसी ने परोक्ष रूप से संदेश दिया कि निगम में जो भ्रष्टाचार और लूट कमाई चल रही है उसे निर्बाध रूप से चलते रहने दिया जाए। अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करने से अधिकारियों की मोटी ऊपरी कमाई बंद नहीं होनी चाहिए।
दरअसल, एसीएमसी ने ये आदेश नगर निगम में डी ग्रुप कर्मचारी प्रेम कुमार की सलाह पर जारी किए हैं। फर्जी डिग्री वाला एक्सईएन पद्म नासवा और प्रेम कुमार दोनों ही लूट कमाई में माहिर हैं इसलिए दोनों में लंबे समय से घनिष्ठता है। प्रेम को सफाई कर्मी से क्लर्क बनवाने में पद्मभूषण ने महती भूमिका निभाई थी। अब पद्म भूषण की इमारत फंसी है, तो प्रेम कुमार अपने भ्रष्टाचारी जौहर दिखाते हुए उसे बचाने में जुटा है।
हां, प्रगाढ़ता होने के बावजूद ये सब मुफ़्त में नहीं किया जा रहा है। एसीएमसी को समझाने और मामले को फंसाने वाले ऑर्डर जारी करवाने के लिए उन्हें खुश करने के नाम पर प्रेम ने पद्मभूषण से भी अच्छी खासी बख्शीश झटकी है। ज़ाहिर है कि इसमें से एक बड़ा हिस्सा आदेश जारी करने वाले को भी मिला होगा। सुधी पाठकों को मालूम हो कि ये वही प्रेम कुमार है जो चपरासी होने के बावजूद निगमायुक्त का पीए बन कर ठेकेदारों, एई-जेई से लेकर चीफ इंजीनियर तक सबसे उगाही करता था। उसकी इजाजत के बिना निगमायुक्त किसी भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करते थे।
यहां तक कि चीफ इंजीनियर स्तर तक के सभी अधिकारी निगमायुक्त की जगह प्रेम कुमार से ही मिल कर फाइलें पास करवाते थे। मज़दूर मोर्चा में खबर छपने के बाद निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास ने उसे अपने कार्यालय से हटा दिया था। कभी निगमायुक्त को अपनी उंगलियों पर नचाने वाला प्रेम वहां से फारिग हुआ तो नए साहब यानी एसीएमसी की नकेल थाम ली।
बताया जा रहा है कि पंद्रह दिन पहले ही उसको निरीक्षक पदोन्नत किया गया है। निगम में चर्चा है कि सफाई कर्मी भर्ती हुए प्रेम को नियम कानून ताक पर रख कर पहले तो क्लर्क बना दिया गया, अब फिर नियमों को धता बताते हुए निरीक्षक पद पर तैनाती दी गई है, जबकि राजस्व शाखा ही नहीं नगर निगम बहुत से कर्मचारी आज तक पदोन्नत होने का इंतजार ही कर रहे हैं। चर्चा ये भी है कि निरीक्षक बनने के बावजूद प्रेम कुमार एसीएमसी कार्यालय और उसके आसपास ही मंडराता रहता है। यहां भी वह ठेकेदारों, अवैध निर्माण करवाने वालों का बिचौलिया तो है ही, एई-जेई, एक्सईएन आदि के उल्टे सीधे काम करा रहा है। प्रेम का काम कोई भी मनगढंत कहानी बना कर बड़े साहबों की कार्रवाई के नाम पर डरा कर अधिकारियो से पैसे ऐंठने का है जिससे उसका भी घर चलता रहे।
क्या कहती है जांच रिपोर्ट सुधी पाठकों को बताते चलें कि नगर निगम में फर्जी डिग्री पर एक्सईएन पद तक पहुंचने वाले पद्मभूषण नासवा की पारिवारिक सदस्य स्वाती नासवा के नाम से सेक्टर 49 सैनिक कॉलोनी के बी ब्लॉक में 581 पी नंबर प्लॉट पर चार मंजिला इमारत का अवैध निर्माण करवाया गया है। कॉलोनी के जागरूक नागरिकों ने शिकायत की थी कि अवैध रूप से चार मंजिला इमारत बनाई जा रही है, फ्लोर एरिया रेश्यो मानक का पालन नहीं किया जा रहा है, नक्शा केवल ढाई मंजिला भवन का स्वीकृत है जबकि इमारत चार मंजिल बनाई जा चुकी है। इस पर संयुक्त आयुक्त जितेंद्र कुमार गर्ग ने मामले की जांच कराई थी। इमारत एक्सईएन पद्मभूषण की होने के कारण सीलिंग का नोटिस देकर खानापूर्ति की गई थी।
संदर्भवश बताते चलें कि अवैध निर्माण के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई मात्र एक घोखे से ज्यादा कुछ भी नहीं है, क्योंकि एक समय के बाद न सील रहती है और न सील करने वाला। मज़दूर मोर्चा ने नौ जुलाई के अंक मेें ‘एक्सईएन नासवा का अवैध निर्माण बचाने में जुटे निगम अधिकारीÓ शीर्षक से खबर प्रकाशित की। इसके बाद निगम अधिकारियों ने पल्ला झाडऩे की नीयत से डीटीपी एन्फोर्समेंट कार्यालय को पत्र लिख कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। डीटीपी ने रिपोर्ट बना कर भेजी कि प्लॉट पी 581 सैनिक कॉलोनी का ही हिस्सा नहीं है।
यह कृषि भूमि पर अवैध रूप से बनाया गया है जिसे सरकार ने रेगुलराइज भी नहीं किया है। स्वाति नासवा की आर्किटेक्ट रजनी लखानी ने स्वप्रमाणन की फर्जी कॉपी लगा कर मई 2021 में गलत ढंग से बिल्डिंग प्लान पास कराया था। शर्त यह थी कि मई 2023 तक निर्माण कार्य पूर्ण हो जाना चाहिए लेकिन इस शर्त की भी धज्जियां उड़ाई गईं, निर्माण कार्य 2024 में शुरू कराया गया। जांच में ये सब तथ्य आने पर संयुक्त आयुक्त जीतेंद्र गर्ग ने आर्किटेक्ट रजनी लखानी को ब्लैक लिस्ट किए जाने और हरियाणा बिल्डिंग कोड की धाराओं के तहत अवैध निर्माण को तोड़े जाने का अनुमोदन करते हुए जुलाई 2024 में एसीएमसी को रिपोर्ट भेजी थी। इस पर एसीएमसी ने कार्रवाई करने के बजाय 26 जुलाई को चार सवाल खड़े करते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली, यानी उनकी नीयत अवैध भवन तोडऩे और दोषी आर्किटेक्ट पर कार्रवाई करने के बजाय इस तरह के कार्य और भ्रष्ट आर्किटेक्टों को प्रोत्साहित करने वाली नजर आ रही है।