फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) 2015 में सीएम खट्टर द्वारा एनआईटी, एक, दो, तीन और पांच में सीवर लाइन डलवाने की घोषणा की गई थी। दस साल बीत गए आज तक नई सीवर लाइन बिछाना तो दूर पहले से बनी की सफाई भी नहीं करवाई जा रही है। दस साल तक सत्ता की मलाई चाटने, भूमाफिया, अवैध कब्जेदारों पर वरद्हस्त रखने वाली शिक्षामंत्री सीमा त्रिखा को चुनाव नज़दीक आते ही सीवर लाइन प्रोजेक्ट के सवालों से जूझना पड़ा रहा है।
निगमायुक्त से ज्यादा भाजपा कार्यकर्ता की तरह काम कर रहीं मोना ए श्रीनिवास मंत्री सीमा त्रिखा को इस सवाल से बचाने में जुट गई हैं। जो सीवर लाइन आज तक पड़ी नहीं, जिसके लिए कभी बजट आवंटित नहीं किया गया, उसके ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का पाखंड किया जा रहा है। पाखंड इसलिए कि जांच अधिकारी द्वारा मांगे जाने के बावजूद निगमायुक्त ने पुलिस को कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं।
2014 में भाजपा के सत्ता में आने के उत्साह में विधायक सीमा त्रिखा की सिफारिश पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एनआईटी इलाके में नई सीवर लाइन डालने की घोषणा की थी। तब स्मार्ट सिटी का बाजा भी बजना शुरू हुआ था, ऐसे में नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों में गिने जाने वाले तत्कालीन चीफ इंजीनियर भास्कर ने मोटी कमाई के मौके को तुरंत ही लपक लिया था। बिना विस्तृत अध्ययन किए सीवर लाइन बिछाने के लिए सौ करोड़ से अधिक का एस्टीमेट बना कर सीएम को थमा दिया गया था।
नए नए सीएम खट्टर को लगा कि प्रोजेक्ट की रकम बहुत ज्यादा है तो उन्होंने इसे रुकवा कर सीवर लाइनों की सफाई कराने पर जोर देना शुरू कर दिया। यानी सीवर लाइन डाले जाने की योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी। लेकिन जिस जनता ने जिताया था सीमा त्रिखा को उसे तो संतुष्ट करना था तो 2019 चुनाव से पहले एक बार फिर सीवर लाइन डाले जाने का मुद्दा उछाला गया। जनता को बताया गया कि प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाई जा रही है, इस तरह जनता को झांसा देकर सीमा त्रिखा एक बार फिर चुनाव जीत गईं।
चुनाव जीतने के बाद एनआईटी में अवैध निर्माण व कब्जे करवाने में फिर से जुट गईं। उनके इशारे पर बीते दस साल में एनआईटी में सैकड़ों पांच-पांच मंजिला इमारतें अवैध रूप से बना डाली गईं। उनके चहेतों ने नालों, ग्रीन बेल्टों पर कब्जे कर डाले। नई सीवर लाइन तो पड़ी नहीं, आबादी दोगुने से भी अधिक बढऩे के कारण पुरानी सीवर लाइन भी ओवरलोड होने के कारण जवाब दे गई। नालों पर अवैध कब्जे होने से जल निकासी व्यवस्था भी चौपट हो गई। न केवल सीवेज व्यवस्था ध्वस्त हुई, आबादी बढऩे से बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी चरमरा गई है। लो वोल्टेज, आए दिन फॉल्ट जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। एनआईटी की यह दुर्दशा सीमा त्रिखा के दस साल के कार्यकाल में उनके चहेतों द्वारा एनआईटी इलाके का अवैध रूप से दोहन करने के कारण ही हुई है।
निगम सूत्रों के अनुसार सीवर लाइन डाली तो जानी नहीं थीं लेकिन इस पर काम करने का पाखंड करते रहना था, इसलिए 2022 में डीपीआर बन कर तैयार होने और स्वीकृति मिलने का ढिंढोरा पीटा गया। दरअसल, जिस प्रोजेक्ट को सीएम खट्टर ठंडे बस्ते में डाल चुके थे विधायक सीमा त्रिखा उसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बना कर जनता के बीच पेश कर रही थीं। 2022 में डीपीआर को स्वीकृति मिलते ही सबको लगा कि जल्द ही बजट भी जारी कर दिया जाएगा जो कि बढ़ कर 158 करोड़ रुपये हो चुका था। सीमा ने श्रेय लेने के लिए बिना बजट पास हुए ही निगम पर टेंडर निकलवा दिया। प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई मंत्री गूजर के बेेटे, भ्रष्ट एक्सईएन ओमदत्त को। सूत न कपास जुलाहों में ल_म ल_ा वाली कहावत की तर्ज पर ओमदत्त ने मंत्री गूजर के चहेते ठेकेदारों को टेंडर दिलाने का खेल शुरू किया। बताया जाता है कि दो ठेकेदारों ने टेंडर में गलत दस्तावेज लगाए। बजट पास नहीं हुआ तो इसकी आड़ में प्रोजेक्ट फिर रोक दिया गया।
अब विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है, दस साल में कुछ नहीं करने के कारण बडख़ल विधानसभा क्षेत्र की जनता सीमा त्रिखा से नाराज है। ऐसे में सीमा एक बार फिर सीवर लाइन का मुद्दा गरमाने में लग गई हैं। उनके इशारे पर उनकी फरमाबरदार कार्यकर्ता के रूप में निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास ने एसजीएम नगर थाने को पत्र लिख कर टेंडर में गड़बड़ी करने वाली फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। सवाल ये है कि जो प्रोजेक्ट परवान ही नहीं चढ़ा उसके ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा कर क्या हासिल होगा? राजनीतिक जानकारों के अनुसार सीमा जनता के बीच जाकर बताएंगी कि उन्होंने तो सीवर लाइन डालने के भरपूर प्रयास किए लेकिन ठेकेदारों की बेईमानी के कारण प्रोजेक्ट लटक गया, शिकायत की गई है तीसरी बार विधायक बनते ही इस प्रोजेक्ट को पूरा करवाया जाएगा। इधर एनआईटी तीन पुलिस चौकी इंचार्ज प्रदीप कुमार ने बताया कि निगमायुक्त से शिकायती पत्र में लगाए गए आरोपों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने की मांग की गई है, जो समाचार लिखे जाने तक उपलब्ध नहीं कराई गई थी, उपलब्ध तो तब कराएं जब कुछ हों। जानकारों के अनुसार उपलब्ध भी नहीं कराई जाएगी, क्योंकि शिकायतकर्ता और आरोपी सब भ्रष्टाचार की थैली के ही चट्टे बट्टे हैं।