फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) रोहतक के पंडित बीडी शर्मा मेडिकल कॉलेज में पीजी एनॉटॉमी के छात्र व शिक्षक डॉ. मनिंदर कौशिक ने जूनियर डेंटल छात्रा का अपहरण कर उसे 12 घंटे तक बंधक बनाकर बुरी तरह पीटा। बंधक बनाए रखने के दौरान उसने छात्रा को चाकू की नोक पर गलत काम करने को मजबूर भी किया। बहादुर छात्रा ने मानने से इनकार किया तो बुरी तरह पीटने के बाद दूसरे दिन दोपहर बाद हॉस्टल के गेट पर फेक कर भाग गया। पीडि़त छात्रा और उसके अभिभावकों ने मनिंदर कौशिक की हरकत की शिकायत कॉलेज प्रबंधन से की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। पीडि़ता के पुलिस में शिकायत करने पर आरोपी की गिरफ्तारी हुई, इसके बाद आरोपी छात्र को कॉलेज से निष्कासित किया गया।
कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर की बलात्कार के बाद हत्या के मामले में जो मीडिया और संघी भाजपाई पूरे देश में हो हल्ला मचा रहे हैं उन्हें रोहतक की यह घटना नजऱ नहीं आई। कोलकाता डॉ. हत्याकांड पर अखबारों में आज भी प्रमुखता से रिपोर्टें प्रकाशित की जा रही हैं, उन्हीं अखबारों में रोहतक पीजीआईएमएस की बेटी की घटना छोटी सी और गौण खबरों के बीच छाप कर नायब सैनी की भाजपा सरकार में बेटियों के खिलाफ हो रहे अत्याचार पर पर्दा डालने का भरपूर प्रयास किया। यही हाल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का है। वहां भी रोहतक पीजीआईएमएस केस का कोई जिक्र नहीं जबकि कोलकाता केस पर प्राइम टाइम डिबेट से लेकर स्पेशल रिपोर्ट तक दिखा डाली गईं। गैर भाजपा शासित सरकारों को निशाना बनाने और भाजपा सरकार की बुराइयों को नजरअंदाज करने या छिपाने का दोगलापन लगता है मीडिया ने संघी-भाजपाइयों से सीखा है। क्योंकि कोलकाता हत्याकांड पर जिन संघी भाजपाइयों का खून खौलने लगा था और सब मिलकर ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ आग उगल रहे थे वही संघी-भाजपाई रोहतक की बेटी की घटना को झूठा बताने में जुटे नजर आए। दरअसल, इन संघियों और मीडिया को भाजपा शासित प्रदेशों में रामराज दिखता है, संघियों का मानना है कि रामराज में दुराचार-अत्याचार-हत्या जैसी घटनाएं नहीं हो सकतीं, तो जब भी कोई इस तरह की घटना होती तो संघ-भाजपा और उसकी पोषित गोदी मीडिया उसे झूठा साबित करने में जुट जाती है, जैसा कि रोहतक की बेटी के मामले में हुआ।
हालांकि कुछ लोग कहेंगे कि रोहतक की घटना का कोलकाता की घटना से मिलान नहीं हो सकता, कोलकाता की घटना ज्यादा जघन्य है। वो लोग जान लें कि रोहतक की छात्रा भी ठीक वैसी ही परिस्थितियों से जूझ रही थी जैसी कि कोलकाता की ट्रेनी डॉक्टर। मीडिया से छन कर आ रही खबरों के अनुसार कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में प्रबंधन द्वारा छात्र-छात्राओं को पास कराने, पंजीकरण के लिए जरूरी इंटर्नशिप सर्टिफिकेट जारी करने से लेकर हर कदम पर पैसा मांगा जाता था। कॉलेज में ही सेक्स और ड्रग रैकेट भी चलने का आरोप लगा है, जिसके अनुसार जो छात्र रुपये नहीं देते वो दूसरा रास्ता चुनते थे।
कीमत चुकाने के बाद ही छात्र पास होते, और डिग्री प्राप्त करते थे। रोहतक में डॉ. मनिंदर कौशिक भी छात्रा को इसी तरह परेशान कर रहा था। छात्रा को धमकी देता था कि यदि उसकी ख्वाहिश पूरी नहीं की तो एनाटामी के पेपर में उसे फेल कर देगा। यही नहीं उसने छात्रा का एडमिट कार्ड भी छीन लिया ताकि उसे अपने इशारों पर चलने को मजबूर कर सके। 16 अगस्त की रात करीब 11 बजे एडमिट कार्ड वापस करने के बहाने छात्रा को लाइब्रेरी से बाहर बुलाया और जबरन अपहरण कर अपने साथ अज्ञात स्थान पर ले जाकर बंधक बना कर रखा। इस दौरान वह छात्रा को उसके मन के मुताबिक करने के लिए मारता पीटता रहा, यहां तक की चाकू से भी उसके शरीर पर कई वार किए। छात्रा बहादुरी से उसकी हर बात ठुकराती और वह उसकी पिटाई करता रहता। समझा जा सकता है कि कोलकाता की ट्रेनी डॉक्टर जिन हालात से गुजरी होगी वैसे ही हालात इस बहादुर बेटी के साथ भी थे, डॉ. मनिंदर कौशिक ने उसे शारीरिक क्षति तो पहुंचाई ही।
रही बात पंडित बीडी शर्मा पीजीआईएमएस प्रबंधन की तो उसकी भूमिका भी कोलकाता मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से बहुत ज्यादा अलग नहीं कही जा सकती। छात्रा ने शिकायत की तो कॉलेज प्रबंधन ने न तो कोई पुलिस कार्रवाई की और न ही आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कोई एक्शन लिया, उलटे मामले को दबाने की कोशिशें शुरू हो गईं। यदि कॉलेज प्रबंधन ईमानदार था तो छात्रा की शिकायत मिलते ही तुरंत खुद एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी, लेकिन कार्रवाई ही नहीं की गई, तब छात्रा और उसके अभिभावकों ने केस दर्ज कराया। एफआईआर दर्ज होने और आरोपी के गिरफ्तार किए जाने के बाद भी कॉलेज प्रबंधन नहीं जागा। इस पर छात्रा ने सवाल उठाया कि आरोपी खिलाफ कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की गई है। उसके जैसे किसी व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश कैसे दिया जा सकता है। मैंने जो कुछ भी सहा है उसके लिए न्याय चाहती हूं और मैं यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्प हूं कि किसी और को भी इसी तरह से पीडि़त न होना पड़े। तब कॉलेज प्रबंधन को मजबूरन डॉ. मनिंदर के निष्कासन की कार्रवाई करनी पड़ी।
ममता बनर्जी का इस्तीफा मांगने वाले रोहतक की घटना पर न केवल चुप्पी साधे हैं बल्कि हर तरह से खबर को दबाने का प्रयास किया गया। सच्चाई ये है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का पाखंड करने वाले बेटियों का इस्तेमाल सिर्फ अपने राजनीतिक हित के लिए करते हैं। भाजपा शासित राज्यों में अगर बेटी के साथ अत्याचार होता है तो ये पाखंडी आरोपियों के पक्ष में खड़े नजर आते हैं, यहां तक कि पीडि़त को ही दोषी ठहराने से भी नहीं चूकते। अगर घटना किसी गैर भाजपा शासित राज्य की हो तो फिर इनके घडिय़ाली आंसू और चीत्कार देखने सुनने वाले होते हैं।