भिवानी (म.मो.) सत्ता के शीर्ष स्थानों पर काबिज बड़े से बड़ा घोटाला करने में कोई मौका चूकने नहीं देते। इसी प्रयास में भिवानी शहर के बीचों-बीच चर्च की 12 हजार वर्ग गज़ जमीन को दलजीत और राजेश द्वारा हथियाने का मामला सामने आया है। इस जमीन की किमत 200 करोड़ रुपये से कहीं अधिक आंकी जा रही है जबकि इसकी रजिस्ट्री मात्र दो करोड़ रुपये में कराने का प्रयास किया गया था। इसके लिये करीब 12 लाख का स्टैम्प पेपर भी खरीदा गया। रजिस्ट्री के लिये आवश्यक दस्तावेजों की जगह फर्जी दस्तावेज भी तैयार कराये गये थे।
अधिकारियों के इशारे पर 5 सितम्बर 2022 को रजिस्ट्री क्लर्क विकास ने नव नियुक्त नायब तहसीलदार आलमगीर के हफ्ते में इस रजिस्ट्री को रिकॉर्ड में चढ़ा दिया। शाम को जब नायब तहसीलदार फील्ड ड्यूटी से लौटे तो क्लर्क विकास ने उनके हस्ताक्षर हेतु कागजात प्रस्तुत किये। नायब तहसीलदार ने जब कागजों को उलट-पुलट कर देखा तो वे तुरन्त घोटाले को समझ गये। मामला उपायुक्त नरेश नरवाल के सामने लाया गया तो उन्होंने लिख दिया कि नायब तहसीलदार अपने विवेक से काम करे।
कुछ हफ्तों तक मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। दूसरी ओर शहर के जागरूक नागरिकों की ओर से इसे लेकर का$फी चर्चायें होने लगी। एक सेवा निवृत आईएएस अधिकारी सुरेश कुमार गोयल ने पत्र लिखकर इस घोटाले को न केवल जिला स्तर के बल्कि राज्य स्तर के उच्चाधिकारियों तक पहुंचा दिया। मामला इस कदर उछल जाने के चलते रजिस्ट्री क्लर्क को निलम्बित कर दिया गया। तहसीलदार, रजिस्ट्री क्लर्क, वसीका नवीस तथा खरीदने व बेचने वालों के विरुद्ध पुलिस द्वारा फजीवाड़े का मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
गौरतलब है कि इतना बड़ा स्कैंडल कर पाना उन लोगों के वश का नहीं जिनके विरुद्ध पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। ये तो मात्र छोटी मछलियां है, बड़े मगमच्छ तो पर्दें के पीछे से खेल खेलते हैं। यद्यपि किसी बड़े मगरमच्छ का नाम तो सामने नहीं आ रहा है लेकिन चर्चा में स्थानीय विधायक तथा एक मंत्री का नाम चल रहा है।