गांव में आज भी मुसलमानों की शादियों में हिंदुओं के लिए एक पंडाल अलग से लगता है जिसमें हिंदू हलवाई अलग से खाना बनाता है और हिंदू पड़ोसी उसमें खाते हैं। लेकिन मैंने एक भी शादी ऐसी नहीं देखी जिसमें हिंदुओं ने मुसलमानों के लिए अलग से हलाल खाने की व्यवस्था की हो।
अगर उदार हिंदू मुसलमानों को अपनी शादी में बुलाते भी हैं तो मुसलमान खुद ही खुशी खुशी शाकाहारी खाना खाते हैं, वे कभी इस बात की शिकायत नहीं करते कि हमारे लिए अलग व्यवस्था नहीं की गई।
मैंने अनेकों जगह सांप्रदायिक हिंसा के बाद राहत का काम किया है। पीडि़त मुसलमान यह जानने के बाद कि मैं हिंदू हूं मेरे लिए दुकान से कोल्ड ड्रिंक मंगवाते थे क्योंकि उन्हें स्वाभाविक तौर पर लगता है कि मैं उनके घर की बनी हुई चाय नहीं पीऊंगा। यह देख कर मेरा दिल बहुत टूटता था और मैं अक्सर चाय नापसंद करने वाला होकर भी उनका यह वहम तोडऩे के लिए उनके घर की चाय पीता था।
अपने किसी मुसलमान दोस्त को लेकर हिंदू मंदिर में जाने की मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई। अलबत्ता मैं खुलेआम बिना डरे अपने मुस्लिम दोस्तों के साथ उनकी मस्जिद में गया, मैं आराम से एक तरफ बैठा रहा उन लोगों ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी नमाज पढ़ी, उन्हें एक हिंदू के वहां बैठे रहने से कोई परेशानी नहीं हुई।
शुद्धतावाद हिंदू धर्म का मूल आधार है। यहां शुद्धता के नाम पर दूसरी जातियों वर्णों से नफरत की गई, महिलाओं को पाप योनि कहा गया यहां तक कि अपने ही शरीर के बाएं हिस्से को अशुद्ध कहा गया है।
जो सबको अशुद्ध कहकर दूर करता जाएगा वह अकेला हो जाएगा और कमजोर हो जाएगा, यही हिंदू धर्म का सबसे बड़ा संकट है। हिंदू धर्म के सामने खतरा मुसलमानों ईसाइयों या कम्युनिस्टों की तरफ से नहीं है इसके भीतर से है वह इसकी बनावट में ही मौजूद है। यह दूसरों को स्वीकार ही नहीं कर सकता यह सब को दुत्कारता है।
अपने ही धर्म के दलितों को जानवरों से भी बुरी हालत में रखने की वजह से लोग बराबरी की तलाश में या तो मुसलमान बने या ईसाई बने। खुद में सुधार करने की बजाए अगर आप दूसरों की मस्जिदों पर हमला करते फिरेंगे और उन पर झंडा लगाकर खुद को फैलाने की कोशिश करेंगे तो वह कोशिश बेकार जाएगी। आपके अपने जो लाखों मंदिर है उनमें आप अपने ही धर्म को मानने वाले करोड़ों दलितों के घुसने पर रोक लगा कर बैठे हुए हैं।
प्रेम धर्म है, दंगा करना धर्म नहीं है। आप सोचते हैं दंगा करने से आपका धर्म फैल जाएगा तो आप गलतफहमी में हैं। साथ का प्यारा दृश्य देखिए, सफाई कर्मचारी थककर मस्जिद में सो गया है और नमाजी उसे जगाए बिना अपनी नमाज पढ़ रहे हैं। – हिमांशु कुमार