फरीदाबाद (म.मो.) सर्वविदित है कि जब तक अच्छी-खासी फटकार न पड़े, नगर निगम प्रशासन कोई काम करके राज़ी नहीं और जिस काम से लूट कमाई न होती हो वह तो करना ही नहीं।
पिछले दिनों स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता जब अचानक नगर निगम कार्यालय पहुंचे तो उन्हें गाड़ी खड़ी करने तक कि जगह न मिल पाई। मंत्री महोदय से अच्छी-खासी झाड़ खाकर निगमायुक्त यशपाल यादव ने कार्यालय परिसर में निजी गाडिय़ों का प्रवेश बंद कर दिया। उनके लिये साथ लगते दशहरा ग्राऊंड में पार्किंग की व्यवस्था कर दी। क्या यह छोटा सा काम वे बिना झाड़ खाये नहीं कर सकते थे?
इसी तरह पूरे शहर भर में जगह-जगह जाम की स्थिति इसलिये बनी रहती है कि पार्किंग की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। इसे लेकर मीटिंग, चीटिंग व इटिंग की कवायद महीनों से नहीं बल्कि वर्षों से चल रही है, लेकिन कुल नतीजा जीरो। इसी तरह रेहड़ी वालों के लिये बिना कोई जगह निर्धारित किये डंडे मारकर एक बार तो उन्हें बाजारों से भगा दिया गया, लेकिन कुछ समय बाद वे वापस फिर वहीं आ जमे। इसे निगमायुक्त की प्रशासनिक अकुशलता ही माना जायेगा। इसके बरक्स यदि वे रेहड़ी व्यवसाय का महत्व समझे होते तो पहले उनके लिये उचित स्थान की व्यवस्था करते और फिर उनको बाजारों से हटाते।
ट्राफिक पुलिस भी नगर निगम की काहिली की आड़ में अपना वह काम नहीं कर रही जो उसे स्वत: कर देना चाहिये। शहर भर में ऐसी कोई सडक़ नजर नहीं आती जिस पर वाहनों ने पार्किंग करके कब्जा न कर रखा हो। लगभग हर चौक-चौराहों पर खास कर एक-दो नम्बर चौक, बाटा चौक, अजरोंदा मोड़, ओल्ड चौक व बल्लबगढ़ बस अड्डे पर तो ऑटो वाले का भयंकर गदर हर समय बना रहता है। इन स्थानों पर प्राय: एक-दो सिपाहियों को ऑटो वालों के साथ दिन भर मगजमारी करते देखा जा सकता है। यदि पुलिस की नीयत सही हो तो उसका एक इशारा ही काफी होता है, वहां किसी सिपाही को मगजमारी की जरूरत ही न पड़ती।