लूट कमाई होगी निगम व गुंडा गिरोह की, भिड़ंत करेगी पुलिस फरीदाबाद (म.मो.) नगर निगम ने अपनी लूट कमाई बढ़ाने के लिये ‘नो पार्किंग जोन’ से वाहन उठाने की एक नई योजना तैयार कर ली है। इस पर वह शीघ्रातिशीघ्र अमल करके नोट छापने को लालायित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दुपहिया उठाने पर 200 रुपये, कार के लिये 500 रुपये तथा ट्रक आदि के लिये 1000 रुपये वसूले जायेंगे। प्रस्तावित योजना के अनुसार पूरे शहर भर से वाहन उठाने का ठेका नगर निगम किसी एक या अनेक एजेंसियों को देने वाली है। इससे होने वाली लूट कमाई का आधा भाग नगर निगम को और आधा भाग ठेकेदार को मिलेगा।
सर्वविदित है कि जनता से की जाने वाली यह लूट-मार पुलिस के बगैर हो पानी सम्भव नहीं। इसके लिये योजना में, सम्बन्धित वाहनों को उठाने से पहले पुलिस द्वारा चालान करवाया जायेगा। उसके बाद वाहन को क्रेन द्वारा उठाने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी। लेकिन योजना पर अमल करते वक्त पहले क्रेन का हुक वाहन में डाल दिया जायेगा और साथ-साथ चालान भी किया जायेगा।
जाहिर है कि उस स्थिति में पुलिस के साथ कहा-सुनी आदि होना आवश्यक है क्योंकि वाहन चालक कहेगा कि वह चालान को कोर्ट में भुगतने अथवा पुलिस को जुर्माना देने को तैयार है। दूसरी ओर ठेकेदार अपनी वसूली के लिये झगड़ेगा। बस यहीं से क्लेश शुरू हो जायेगा।
नगर निगम व ठेकेदार के बीच होने बाले बटवारे का समझौता भी कहने मात्र को ही है। लूट कमाई का असल हिसाब-किताब तो ठेकेदार ही रखेगा, वह जो चाहेगा जितना चाहेगा निगम को बतायेगा। इसमें भी निगम अधिकारी जो डंडी मारेंगे वह अलग से। कितने भी वाहन, उठाने के बाद थाने अथवा गंतव्य तक ले जाने के बीच में रास्ते ही ले-दे कर छोड़ दिये जायेंगे, उनका हिसाब नगर निगम कैसे रखेगा?
लूट कमाई जल्दी शुरू करने के चक्कर में निगम ने अभी तक न तो कोई नो पार्किंग जोन मार्क किये हैं और न ही कहीं सीसीटीवी कैमरे लगाये हैं। जाहिर है कि इन सब बातों को लेकर भी झगड़ों की स्थिति उत्पन्न होना तय है। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार पूरी योजना पुलिस आयुक्त व पुलिस उपायुक्त ट्रैफिक द्वारा अनुमोदित होकर ट्रैफिक थाने तक पहुंच गई है। सिर पडऩे वाली मुसीबत को भांपते हुए थाना स्तर पर सम्बन्धित फाइल को रोक कर उच्चाधिकारियों से विचार विमर्श करने का प्रयास भी किया है। जाहिर है कि जब वाहन उठाने पर जनता से पुलिस को लट्ठम-पट्ठम होना पड़ेगा तो वहां मौके पर न तो सीपी होगा न ही डीसीपी, भुगतना तो छोटे कर्मचारियों को ही होगा।
यद्यपि इस शातिर योजना की बाबत कोई अधिकृत जानकारी तो उपलब्ध नहीं है लेकिन समझा जा रहा है कि इसके पीछे स्थानीय सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का दिमाग काम कर रहा है। उन्हीं के कहने पर निगमायुक्त यशपाल यादव तथा पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा इस योजना को अमलीजामा पहनाने जा रहे हैं।
निसंदेह सडक़ों किनारे जहां-तहां पार्किंग करके मार्ग अवरुद्ध कर देने से यातायात में भारी समस्या आती है जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है। लेकिन इस समस्या से निपटने का उक्त उपाय गलत एवं गैरकानूनी है।
इसके लिये दिल्ली की तर्ज पर सीधे-सीधे ट्रैफिक पुलिस को ही वाहन उठाने का काम सौंपा जाना चाहिये। विदित है कि दिल्ली में यह सारा काम खुद टैफिक पुलिस करती है वह खुद ही क्रेन भाड़े पर लेती है और कानून के अनुसार गाडिय़ों के चालान करके उन्हें उठाती है। वहां किसी नगर निगम अथवा किसी गुंडा गिरोह की कोई हिस्सेदारी बीच में नहीं रखी जाती। जो भी लेना-देन करना होता है वह खुद ही पुलिस कर लेती है। इसके लिये नगर निगम व उसके द्वारा नियुक्त होने वाले गुंडा गिरोहों की कोई आवश्यकता नहीं है। जानकारों के मुताबिक मंत्री कृष्णपाल गूजर के चहेतों को इस काम की ठेकेदारी के लिये चयनित भी कर लिया गया है।