फरीदाबाद (म.मो.) ‘मज़दूर समाचार’ के नाम से सोशल मीडिया पर मज़दूरों के मसले उठाने वाले नरेश कुमार को मुजेसर पुलिस ने 10 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया। नरेश व्हर्लपूल फैक्ट्री गेट पर प्रदर्शन कर रहे मज़दूरों को कवर कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मज़दूरों को सम्बोधित करते हुए कहा, ‘इस तरह बिखर कर काम करने की बजाय इकठ्टे होकर बैठें और सही ढंग से इस मामले की रणनीति बनायें और आगे बढ़ायें।’ नरेश का इतना कहना भर ही एसएचओ मुजेसर को खटक गया और उन्हें तुरन्त हिरासत में ले लिया गया। एसएचओ का कहना था कि नरेश मज़दूरों को भडक़ा कर हमला करने के लिये उकसा रहा है। इसके अलावा एसएचओ ने यह भी बताया कि नरेश नेगेटिव प्रवृत्ति का आदमी है। यह पहले भी एक बार किसी स्कूल के मामले में झगड़ा करके आया था और नेगेटिव खबर दिखा रहा था।
मामला बड़ा स्पष्ट है कि एसएचओ साहब चाहते हैं कि केवल वही कुछ प्रचारित-प्रसारित किया जाय जिसे वे पॉजिटिव समझें। यानी कि एसएचओ न होकर खबरों के सेंसर बोर्ड हो गये। एसएचओ से पूछने पर उन्होंने बताया कि नरेश को प्रिवेन्टिव उपाय के तौर पर धारा 107, 151 में गिरफ्तार किया गया है। नियमानुसार ऐसे गिरफ़्तार व्यक्ति को इलाके के डीसीपी के सामने पेश किया जाता है जो उसे जमानत पर रिहा करके भविष्य में सद्व्यवहार के लिये पाबंद करके छोड़ देते हैं।
इस मामले में पेशी के दौरान यदि डीसीपी महोदय मौके की असल वीडियो, जिसे खुद पुलिस वालों ने ही बनाया है, को देख लेंगे तो उन्हें समझ में आ जायेगा कि उनके एसएचओ ने किस प्रकार अपने अधिकार का दुरुपयोग किया है।गेट पर मौजूद श्रमिकों ने बताया कि एसएचओ पहले कम्पनी के भीतर गया, कुछ देर बाद बाहर लौटने के बाद उसने भडक़े हुए अंदाज में नरेश को हिरासत में ले लिया। समझा जाता है कि कम्पनी के भीतर एसएचओ का कोई सौदा कम्पनी वालों से हुआ होगा।
बेशर्मी की इन्तहा तो तब हुई जब कम्पनी में रखे हुए बढिया कीमती 20-25 पौधों के गमले कुछ ही देर बाद थाने में नज़र आये। अगर एसएचओ को ये गमले ही चाहिये थे तो दो-चार दिन बाद ही मंगा लेता, सार्वजनिक तौर पर तो महकमे को शर्मशार न करता।