सरकार के पालतू दंगाई बिटुआ पर एक केस और दर्ज, गिरफ्तारी कब होगी

सरकार के पालतू दंगाई बिटुआ पर एक केस और दर्ज, गिरफ्तारी कब होगी
April 06 12:49 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पूर्व सीएम खट्टर के खास पालतू दंगाई बिट्टू बजरंगी ने सत्ता का संरक्षण होने के कारण सपा सांसद रामजी लाल सुमन का गला काट कर लाने वाले को उचित ईनाम देेने का उन्मादी बयान सोशल मीडिया पर वायरल किया तो पुलिस ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का पाखंड किया। पाखंड इसलिए कि बिट्टू ने जो विवादित बयान दिया है पुलिस ने समाचार लिखे जाने तक सोशल मीडिया से नहीं हटवाया है और न ही बिटुआ की गिरफ़्तारी की है। बिटुआ अब वही बयान सोशल मीडिया के न्यूज चैनलों पर भी शान से दोहराता घूम रहा है। पाखंड इसलिए भी है कि बिट्टू पर पहले भी धार्मिक भावनाएं भावनाएं भड़काने के तीन मामलों सहित दंगा भड़काने, आदि गंभीर धाराओं के कुल 12 केस दर्ज हैं। नूंह दंगों के अलावा किसी भी अन्य केस में आज तक उसकी गिरफ़्तारी नहीं हुई। नूंह केस में भी उसे बेल मिल गई जबकि पीडि़त मुसलिम पक्ष पर यूएपीए लगा कर उन्हें जेल से निकलने तक नहीं दिया गया।

संघ की शाखाओं में मुसलमानों के खिलाफ नफरत का पाठ पढऩे वाला बिटुआ दो साल पहले तक अनपढ़ों की श्रेणी में आता था। बीते साल ही उसने बोर्ड ऑफ ओपन स्कूलिंग एंड स्किल एजुकेशन, सिक्किम से दसवीं पास की मार्कशीट हासिल की है। ऐसे में उसको इतिहास, नागरिक शास्त्र, विज्ञान जैसे विषयों की उतनी ही समझ है जितनी उसे संघ की शाखाओं में मिली या फिर वाट्सएप यूनिवर्सिटी पर संघ-भाजपा आईटी सेल द्वारा कुप्रचारित-प्रसारित की गई। यही कारण है कि उसने राज्य सभा के सदन में सांसद रामजी लाल द्वारा दिए गए ऐतिहासिक तथ्य को हिंदुओं का अपमान बताते हुए भगवा तालिबानियों की तरह उनका सिर काट कर लाने का आह्वान कर दिया।
बिटुआ और उसके संघी शिक्षकों ने अगर दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय द्वारा प्रकाशित प्रोफेसर हरिश्चंद्र वर्मा द्वारा संपादित ‘मध्यकालीन इतिहास पुस्तक पढ़ी होती, जिसमें साफ बताया गया है कि राणा सांगा ने इब्राहीम लोधी पर हमला करने के लिए बाबर को बुलाया था, एनसीईआरटी की पुरानी पुस्तकों में भी इसका उल्लेख किया गया है, तो वह कभी सांसद रामजी लाल का विरोध नहीं करता लेकिन उसने तो इतिहास ही संघियों वाला पढ़ा है।

जानकार बताते हैं कि काफी अर्से से शांत रहने के कारण बिटुआ के समर्थकों की संख्या घटती जा रही है और उसे छह अप्रैल को भगवा यात्रा निकालनी है उसके लिए धन और भीड़ का जुगाड़ करना है। जिस तरह आतंकवादी समाज में हाईलाइट होने के लिए धमकियां देते हैं या कोई कांड करते हैं, उसी तर्ज पर बिट्टू ने सपा सांसद के खिलाफ बयान दिया है। इसका फायदा उसे भगवा यात्रा की तैयारियोंं में दिखने लगा है, कट्टरपंथी उसके समर्थन में जुटने लगे हैं और फंड भी तेजी से जुटाया जा रहा है। बिटुआ ने उचित इनाम देने की बात इसलिए कही क्योंकि चुनाव आयोग में उसके द्वारा जमा कराए गए शपथपत्र के आधार पर उसकी औकात 73 हजार रुपये नकद और पचास गज के एक मकान से ज्यादा कुछ भी नहीं है। हां, उसे संघियों, बजरंगियों, गोरक्षक गुंडों का भरपूर समर्थन है जो उसकी एक आवाज पर उसे नूंह में दंगे करवाने के लिए तलवार और हथियारों को जखीरा उपलब्ध करा देते हैं, जाहिर है कि बिटुआ ने उन सबके दम पर ही सांसद का सिर काटने पर ईनाम देने का भगवा तालिबानी फरमान सुनाया।

विधानसभा चुनाव में एनआईटी सीट से प्रत्याशी बने बिटुआ ने अपने शपथपत्र में उसके खिलाफ विभिन्न थानों में 12 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी दी है। इनमें दंगा करने, सरकारी अधिकारी पर हमला करने, सरकारी काम में बाधा डालने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, लूट पाट करने, घोषित अपराधी होने के साथ ही धार्मिक भावनाएं आहत कर समाज में हिंसा फैलाने के केस दर्ज हैं। सीएम खट्टर के कार्यकाल में हुए इन कांडों में पुलिस को बहुत मजबूरी में केस दर्ज तो करने पड़े लेकिन उसे आज तक किसी भी केस मे सजा नहीं दिलवा सकी है। पुलिस मौजूदा एफआईआर के प्रति कितनी गंभीर है इससे ही समझा जा सकता है कि उसकी पोस्ट सोशल मीडिया से हटाई नहीं गई है और न ही गिरफ़्तारी हुई है। गिरफ़्तारी तो दूर पुलिस छह अप्रैल को इस दंगाई को कड़ी सुरक्षा देती और उसकी जी हुजूरी करती नजर आएगी। यही है डबल इंजन सरकारों में दंगाइयों को संरक्षण देने का सच।

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Mazdoor Morcha
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