ग्रीन बेल्ट पर गरीब की दुकान है अतिक्रमण जबकि अमीर का अवैध निर्माण फार्म हाउस

ग्रीन बेल्ट पर गरीब की दुकान है अतिक्रमण  जबकि अमीर का अवैध निर्माण फार्म हाउस
July 10 14:30 2026

 

 

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ग्रीन बेल्ट पर कब्जे के नाम पर हूडा और नगर निगम ने बीते दिनों सेक्टर 16 मार्केट में रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को उजाड़ दिया। निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा का कहना था कि शहर की हरियाली को चौपट करने वाले अतिक्रमण या अवैध कब्जों के खिलाफ तोडफ़ोड़ की कार्रवाई जारी रहेगी। खडगटा महोदय ने गरीब रेहड़ी वालों को तो उजाड़ दिया लेकिन अरबों रुपये कीमत की सरकारी जमीन की हरियाली पर अवैध कब्जे कर फार्म हाउस बनाने वाले सत्ता के चाटुकार अमीरों के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत कब करेंगे।

इसी सेक्टर 16 मार्केट में नगर निगम ने बीती जनवरी में भी अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाकर 16 झुग्गियां उजाड़ी थीं, यानी हर छठे चौमासे यहां गरीबों की रेहडिय़ां तोड़ दी जाती हैं। गरीबों के अतिक्रमण के खिलाफ मुस्तैद निगमायुक्त महोदय ने शायद यह ध्यान नहीं दिया कि उन्हीं की प्लानिंग ब्रांच ने शहर में बिना सीएलयू, रेगुलाराइजेशन के चल रहे 33 अवैध बड़े बड़े निर्माणों की रिपोर्ट बना रखी है। इनमें बैंकट हॉल से लेकर बड़े शैक्षणिक संस्थान, गोशाला, धार्मिक स्थल आदि शामिल हैं। कई तो नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जे कर बनाए गए हैं। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट भी इन अवैध कब्जों को हटाने के आदेश दे चुकी है।

नगर निगम की प्लानिंग ब्रांच सूत्रों के अनुसार इन अवैध निर्माण को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में वह अवैध कब्जे हैं जिन्हें न तो सीएलयू जारी की गई है न ही रेगुलराइज किए गए हैं। दूसरी श्रेणी में वह अवैध निर्माण हैं जिन्हें 2018 में लेटर ऑफ इंटेंट एलओआई जारी किया गया था लेकिन नियमों का पालन नहीं करने के कारण बाद में वापस ले लिया गया था। तीसरी श्रेणी में वह निर्माण हैं जिन्हें आंशिक रूप से सीएलयू आदि मिला हुआ है लेकिन उन्होंने बड़े इलाके में अवैध कब्जा और निर्माण कर रखे हैं।

बिना सीएलयू और रेगुलराइजेशन वाले अवैध निर्माण में सूरजकुंड इलाके के राधा स्वामी सत्संग ब्यास, वैशाली गार्डन, शहीद फाउंडेशन (आईजी फार्म), सन रॉक फार्म, अर्जुन भड़ाना पुत्र ब्रिज भड़ाना, अरावली फार्म, आनंद फार्म, रवींद्र चपराना, संदीप चपराना, नारायण गौशाला, जेएच रियल टेक प्रा. लि., खजानी एजुकेशनल सोसायटी रजि., शौर्या फार्म, राजविला, श्री गोपाल गौशाला, शेर मोहम्मद, तिलकराज बैंसला, मीडोज फार्म, परमहंस आश्रम, नीरू आर्य, सन विलेज और शिबिया रेस्टोरेंट हैं।

निगम सूत्रों के अनुसार से सारे पूरी तरह से अवैध निर्माण हैं और इनके खिलाफ तोडफ़ोड़ अभियान चलाया जाना चाहिए, क्योंकि इनमें से अधिकतर नगर निगम के क्षेत्राधिकार में आने वाले संरक्षित वन क्षेत्र को उजाड़ कर बनाए गए हैं। तोडफ़ोड़ के साथ ही इनके खिलाफ वन संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत केस भी किया जाना चाहिए। सुधी पाठकों को बता दें कि प्लानिंग ब्रांच की यह रिपोर्ट मई 2024 में जारी की गई थी, तब से आज तक किसी गौशाला, फार्म हाउस, ब्यास को उजाड़ कर सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराने का कोई अभियान नहीं चलाया गया, यदि चलाया भी गया तो सत्ताधारी नेताओं ने बंद करवा दिया।

दरअसल, सत्ताधारी नेता ही नहीं नगर निगम में बैठे हरामखोर भ्रष्ट अधिकारी मोटी लूट कमाई की लालच में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे करवाते हैं। दूसरी श्रेणी के अवैध कब्जे रिश्वतखोर पूर्व चीफ टाउन प्लानर सतीश पाराशर ने करवाए। अवैध फार्म हाउस के मालिकों को सीएलयू तो जारी नहीं की जा सकती थी इसलिए पाराशर ने 2018 में इन्हें लेटर ऑफ इंटेंट जारी कर चोर रास्ते से अवैध निर्माण को वैध कराने का खेल किया था। इसके तहत अवैध कब्जाधारकों को फर्जी नियमों का पालन करने के एवज में निर्माण करने की अनुमति दी गई थी।

निगम अधिकारी जांच में न फंसें इसलिए नियम का पालन न करने पर अनुमति वापस लेने की शर्त रखने का पाखंड किया गया। जब सारे निर्माण ही अवैध और नियमविरुदध थे तो कौन से नियम माने जाने थे। सतीश पाराशर की यह काली करतूत किसी तरह अखबारों में पहुंच गई, शोर शराबा हुआ तो तत्कालीन निगमायुक्त एमशाईन को एलओआई रद्द करनी पड़ी थी। एलओआई तो रद्द कर दी गई लेकिन अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं की गई, उल्टे इतना समय दिया गया कि अवैध निर्माण बचाने के लिए वो लोग कोर्ट चले जाएं। जाहिर है कि एलओआई से लेकर कोर्ट जाने तक की अनुकंपा पाराशर आदि ने मुफ़्त में नहीं की थी, सत्ता के नेताओं के संरक्षण में लाखों रुपयों की लेनदेन हुई होगी।

पाराशर की हरामखोरी के कारण कन्हैयालाल केके उज्जवला फार्म, नरेंद्र सिंह खालसा गार्डन, ईडेन गार्डन, जन्नत वैली फार्म और योगी फार्म आज भी चल रहे हैं। इन सबकी एलओआई मार्च 2020 में ही रद्द की जा चुकी है लेकिन तोडफ़ोड़ की कार्रवाई आज तक नहीं हुई। चर्चा है कि प्रत्येक सीजन एक एक फार्म हाउस चार से पांच करोड़ रुपये कमाता है, इतनी मोटी कमाई पर बुलडोजर न चले इसके लिए नेता से लेकर निगम अधिकारियों को मोटा चढ़ावा चढ़ा कर मनाया जाता है।

सतीश पाराशर की हरामखोरी का एक उदाहरण भांखरी गांव में नगर निगम की जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया योगी फार्म है। निगम रिकॉर्ड के अनुसार गांव की पंचायत देह जमीन पर नगर निगम का मालिकाना हक है, बावजूद इसके पाराशर ने योगी फार्म को एलओआई जारी की, जो आज भी चल रहा है।

अवैध कब्जा और निर्माण तो धर्म का पाठ पढ़ाने वाले सिद्धदाता आश्रम ने भी किया हुआ है। प्लानिंग ब्रांच सूत्रों के अनुसार मंदिर के लिए नगर निगम ने केवल खसरा संख्या 84/20, 21, 83/16, 25, 97/1 और 98/5 की 19 कनाल 16 मरला पर किए गए निर्माण को सीएलयू दिया है। इसके अलावा आश्रम ने काफी बड़े इलाके में अवैध निर्माण कर रखा है, इसे निगम ने न तो रेगुलराइज किया है और न ही सीएलयू जारी की है।

धार्मिक संस्थाएं अधर्म करें तो नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षण संस्थान कहां पीछे रहने वाले थे। प्लानिंग ब्रांच के अनुसार बिना सीएलयू, अवैध निर्माण-कब्जे करने वाले शिक्षण संस्थान मदर्स सेक्रेड हार्ट एकेडमी, अरावली इंटरनेशनल स्कूल, मानव रचना और मॉडर्न विद्या निकेतन हैं, इन सबको भी नोटिस जारी करने के बाद निगम के ‘होनहार’ अधिकारी आराम से सो गए। ये सारी शिक्षण संस्थान भी धड़ल्ले से चल रहे हैं, किसी के अवैध निर्माण के खिलाफ आज तक कोई तोडफ़ोड़ अभियान नहीं चलाया गया है।

खास यह कि जितने भी अवैध फार्म हाउस, बैंकट हॉल हैं इनमें से अधिकतर सरकारी जमीन पर कब्जा या अतिक्रमण हैं। बाकी संरक्षित वन क्षेत्र में बनाए गए हैं जहां कोई भी गैर वानिकी गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित है। यही हाल गोशालाओं का है, ये गोशालाएं मुख्य मार्ग से एक से डेढ़ किलोमीटर अंदर वन क्षेत्र में पेड़ पौधे साफ कर बनाई गई हैं, इन तक पहुंचने के लिए सडक़ भी जंगल काट कर ही बनाई गई है।

जब इन अवैध गोशालाओं का निर्माण चल रहा था, मज़दूर मोर्चा सहित कई अखबारों ने समाचार प्रकाशित कर निगम और जिला प्रशासन को सचेत भी किया लेकिन धार्मिक सत्ता से अभिभूत अधिकारी गोरक्षकों की तरह काम करते नजर आए। निगम सूत्रों के अनुसार गोशाला की आड़ में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों की भरमार है, गोशाला का अर्थ सत्ता के किसी चहेते का प्रोजेक्ट, कार्रवाई की तो गूजर से लेकर गोयल, शर्मा, अदलखा ही नहीं विहिप-संघ आदि संगठनों के पदाधिकारी भी दबाव बनाने लगते हैं। अनखीर इलाके में स्थित एक अवैध गोशाला में काम करने वाले ने बताया कि यहां से शहर के लगभग सभी आला अधिकारियों के यहां दूध जाता है, सब जानते हैं लेकिन दूध पी रहे हैं तो कार्रवाई क्या करेंगे।

बड़े बड़े अवैध निर्माणकर्ताओं के खिलाफ नोटिस नोटिस का पाखंड जबकि गरीब बेचारों की रेहडिय़ां बिना नोटिस के ही तोड़ दी जाती हैं। सेक्टर 16 में ग्रीन बेल्ट साफ करने के नाम पर जो कार्रवाई हुई उसमें सिर्फ गरीबों की रेहडिय़ां उजाड़ी गईं, जैसे ही ग्रीन बेल्ट पर रखे जेनरेटर हटाने की बात आई सारे दुकानदार एक हो गए, पार्षद भी आ गए और कार्रवाई रुकवा दी गई। ग्रीन बेल्ट का अतिक्रमण तो दिख गया लेकिन पूरी मार्केट में शाप कम ऑफिस (एससीओ) का जो हुलिया बिगाड़ कर अवैध निर्माण किए गए हैं वह निगम अधिकारियों को नजर नहीं आए। अधिकतर दुकानदारों ने पब्लिक कॉरिडोर पर कब्जा कर स्थायी निर्माण कर रखा है, आम जनता के चलने का रास्ता तक नहीं बचा है, यह अतिक्रमण भी नजर नहीं आया। कार्रवाई के दौरान ही दीपक नाम के युवक ने मार्केट में अवैध रूप से बनाई गई चौथी मंजिल वाली कई इमारतें दिखा दीं, ओम स्वीट्स के पास भी ऐसी ही एक बिल्डिंग में अवैध निर्माण की बात की लेकिन पार्षद महोदय से लेकर निगम अधिकारी उसकी बातों को टालते नजर आए, यही नहीं दबाव बनाने के लिए उसकी बिल्डिंग का नक्शा, एनओसी, आक्यूपेशन सर्टिफिकेट आदि चाक चौबंद होने की जानकारी लेने लगे, बेचारा युवक सब कुछ ओके होने की बात कह वहां से चलता बना।

दरअसल, गरीब, दिहाड़ी मजदूर, रेहड़ी वाले नेताओं की नजर में केवल वोट हैं, जिन्हें धोती, बोतल, नकदी आदि और झूठे वादे कर वरगलाया जा सकता है। लेकिन पूंजीपति वोटर होने के साथ वोट खरीदने के लिए चंदा भी देते हैं। चुनावों में सत्तापक्ष के नेताओं का डंडा-झंडा उठाते हैं, चुनावी सभाएं कराते हैं इसलिए इनका अतिक्रमण देशहित में होता है जबकि गरीबों का अतिक्रमण शहर विन्यास खराब करने वाला। निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा में भारतीय प्रशासनिक सेवा की ट्रेनिंग के जरा से भी मूल्य बचे हों तो उन्हें निष्पक्षता और नैतिकता अपनाते हुए गरीबों के साथ ही इन बड़े पूंजीपतियों के अवैध फार्महाउस, पशुशालाओं, शैक्षणिक संस्थाओं के अवैध निर्माण को तुड़वा कर रीढ़ वाले आईएएस अधिकारी के रूप में अपना अस्तित्व होने का प्रमाण देना चाहिए।

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Mazdoor Morcha
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