फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एक दशक से वेतन, भत्तों में कोई खास बढ़ोत्तरीं नहीं किए जाने से नाराज सरकारी कर्मचारी इस विधानसभा चुनाव में सरकार को वोट की चोट देने की तैयारी कर रहे हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रशासन, स्थानीय निकाय के कर्मचारी तो विरोध प्रदर्शन कर अपनी मांगें रख भी रहे हैं लेकिन ऐसी ही समस्याओं से जूझ रहे कड़े अनुशासन से बंधे पुलिसकर्मी अपनी आवाज भी नहीं निकाल सकते। ऐसे में वे चुपचाप रहकर न केवल वोट की चोट मारेंगे बल्कि भीतर ही भीतर भाजपा की नाव में बड़ा छेद करने की तैयारी में हैं।
प्रदेश पुलिस में एक गजेटेड अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकार एक दशक से पुलिस कर्मियों के साथ भेदभाव कर रही है। पड़ोसी राज्य दिल्ली के पुलिस विभाग में 2016 से तीन बार महंगाई भत्ते के आधार पर सुविधाएं बढ़ाई जा चुकी हैं। जबकि हरियाणा सरकार ने 2016 से लागू वेतन आयोग का 2018 तक का एरियर भी नहीं दिया है। दिल्ली पुलिस की तर्ज पर महंगाई भत्ते के आधार पर मकान किराया भत्ता नही बढ़ाया गया।
सरकार ने 2016 में जो घोषणा की थी उसके आधार पर मकान किराया भत्ता बीस प्रतिशत हो जाना चाहिए लेकिन आज तक केवल 16 प्रतिशत ही मिल रहा है। दिल्ली पुलिस को राशन मनी 4200 रुपये दिए जाते हैं जो हाल ही में बढ़ा कर 1500 रुपये किया गया है। यात्रा भत्ता भी दिल्ली में 5400 रुपये है। उनके अनुसार काफी समय से हरियाणा पुलिस की यह मांग रही है कि हमें भी दिल्ली पुलिस के बराबर ही वेतन-भत्ते आदि सुविधाएं दी जाएं। दिल्ली में पुलिस बल भी पर्याप्त है, वहां ड्यूटी का समय भी तय है और उन्हें सुविधाएं भी काफी हासिल हैं। जबकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण हरियाणा पुलिस अभावों में भी बेहतर काम कर रही है। यहां पुलिसकर्मी के काम के घंटे तय नहीं है, अभावों के बावजूद पूरी मेहनत से काम करते हैं, ऐसे में दिल्ली पुलिस के बराबर ही सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। दिल्ली, फरीदाबाद, गुडग़ांव में महंगाई दर बराबर है तो फिर उन्हें बढ़ती महंगाई के आधार पर सुविधाएं देने में सरकार आना कानी क्यों कर रही है। अनदेखी और कर्मचारियों को सुविधाओं से वंचित रखने के बावजूद पुलिस कर्मी प्रदेश की कानून व्यवस्था सुधारने मेंं जी जान से जुटे रहते हुए वोट के माध्यम से कर्मचारियों के साथ हो रही नाइंसाफी का सरकार से बदला लेने का मन बना रहे हैं।