फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सैनिक कॉलोनी के पास खाली पड़ी सरकारी जमीन में स्थानीय लोगों द्वारा तीन चार साल में विकसित किए गए चार सौ से अधिक पेड़ों को बीते शुक्रवार एफएमडीए ने उजाड़ दिया। एफएमडीए अधिकारियों का कहना था कि क्योंकि यह जमीन प्राधिकरण की है इसलिए हम इसमें पौधे लगाकर हरियाली करेंगे। कई वर्ष की मेहनत के बाद पेड़ बन कर फल-फूल और छाया देने वाले वृक्षों को उजाड़े जाने का विरोध देखकर एफएमडीए के निकम्मे अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जितने पेड़ हटाए जा रहे हैं उनके दस गुना लगाए जाएंगे। समझने वाली बात यह है कि अगर एफएमडीए को हरियाली फैलानी ही है तो उसके अधिकारियों को पूरे शहर में सिर्फ यही जमीन मिली जो शहर के अंदर छोटे-मोटे जंगल के रूप में विकसित हो चुकी है। स्थानीय पर्यावरण प्रेमी तरुण चोपड़ा ने बताया कोविड के समय में यह जगह कूड़े करकट का ढेर हुआ करती थी, आसपास के लोग ही नहीं बल्कि कई ट्रैक्टर-ट्रॉली वाले भी यहां कूड़ा डालते थे। बेशक यह सरकारी जमीन है लेकिन जब इस पर कूड़ा डाला जाता था तब सरकार बहादुर को कोई तकलीफ नहीं थी।
कॉलोनी के पचास-साठ लोगों ने मिल कर यहां छोटा सा जंगल बनाने की ठानी। अपनी मेहनत और खर्च पर कूड़ा-करकट हटाया। सबकी प्रयास से यहां चार सौ से अधिक फल देने वाले पौधे लगाए गए, फूलदार पौधों की क्यारियां लगाई गईं। नींबू, अनार, आम, जामुन जैसे फलदार पौधों के अलावा नीम, अशोक, पीपल के पर्यावरण अनुकूलन वाले पौधे भी लगाए। बीते तीन चार साल में अधिकतर दस-बारह फुट के हो चुके हैं। लेकिन ज्यों ही यहां पर नर्सरी बनी, हरियाली हुई, बड़े बड़े पेड़ लग गए, फल फूल देने लगे तब सरकार बहादुर से यह हरियाली बर्दाश्त नहीं हो पाई। एफएमडीए के अधिकारियों को यह खटकने लगी। शुक्रवार को एफएमडीए के अधिकारी बुलडोजर लेकर पहुंचे और चार से पांच फुट तक बड़े हो चुके पौधों को रौंद डाला गया। जानकारी होते ही कॉलोनी के पर्यावरण प्रेमी महिला पुरुष मौके पर पहुंच कर विरोध करने लगे। महिलाओं ने नाराजगी जताते हुए बताया कि एफएमडीए ने डेढ़ सौ से अधिक पेड़ उजाड़ दिए, इनमें से कई पेड़ों में तो फल भी आने शुरू हो गए थे। जब अधिकारी ने कहा कि इस जगह को एफएमडीए हरा भरा करेगा इसलिए जमीन की लेवलिंग की जा रही है तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा, लोगों का सवाल था कि हरियाली और पेड़ पौधे उजाड़कर कौन हरियाली करता है। लोगों ने आसपास की खाली पड़ी जमीन पर पौधे लगाने को कहा लेकिन मंदबुद्धि अधिकारी तो वहीं लेवलिंग करने पर अड़ा रहा, मानो एफएमडीए के लिए पूरे शहर में खाली जगह सिर्फ यही हो।
सुधी पाठकों को बताते चलें कि एफएमडीए शहर को हराभरा करने के लिए जनवरी से अब तक 97 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। जनता की गाढ़ी कमाई की यह धनराशि उसने सेक्टर 16ए, 19, 17,18 के आसपास ग्रीन बेल्ट में पौधे लगाने सहित अन्य काम में खर्च किए। खास बात यह है कि एफएमडीए अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फरीदाबाद-पलवल केएमपी एक्सप्रेसवे के पूर्वी और पश्चिमी भाग में सड़क किनारे और सेंट्रल वर्ज पर पौधे लगाने के लिए बीस करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। एक्सप्रेस वे से टोल वसूलने वाले एनएचएआई का यह काम है कि वह सड़क किनारे और सेंट्रल वर्ज पर पौधे लगाए। इस 97 करोड़ में हरियाली फैलाने के साथ और भी निर्माण कार्य हैं। एक्सप्रेस वे को छोड़ दिया जाए तो एफएमडीए द्वारा सेक्टरों में फैलाई गई हरियाली के हालात हर जगह देखे जा सकते हैं। इन सेक्टरों की हालत देख कर समझा जा सकता है कि पर्यावरण संरक्षण और हरियाली फैलाने के नाम पर एफएमडीए के अधिकारी क्या कर रहे हैं। यानी खुद तो कुछ करना नहीं अगर दूसरे प्रयास कर रहे हैं तो उसे यह कहते हुए उजाड़ रहे हैं कि यहां हम हरा भरा करेंगे, उनकी काम के नाम पर मोटे मोटे बिल फाड़ कर जेबें भरने की मंशा को ही दर्शाता है, भले ही इससे पर्यावरण को नुकसान हो या आम आदमी की मेहनत बर्बाद हो, उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं। उन्हें सरोकार है केवल सरकारी धन खर्च करके अपनी जेबें भरने से।