प्रफुल्ल कोलख्यान व्यापार और राजनीति दोनों ही ‘लुका-छिपी का खेल है, लेकिन जब राजनीति व्यापार हो जाये और व्यापार राजनीति तब लुका-छिपी के हाल का अनुमान लगाना बड़ी कठिन है।
प्रफुल्ल कोलख्यान पिछले बीस-तीस साल में समय बहुत बदल गया है। न तो ऐसा अंधेरा सभ्यता ने पहले कभी देखा था और न ऐसा उजाला ही पहले कभी देखा था;
प्रफुल्ल कोलख्यान नफस-नफस कदम-कदम आम चुनाव 2024 अपनी पूर्णता की तरफ बढ़ रहा है। भारत के संसदीय इतिहास में यह चुनाव कई कारणों से याद किया जायेगा। जिन कारणों से