ओ ईश्वर! बहुत हुआ अब नष्ट कर दो दुनिया के तमाम पूजास्थल तुम देखना दुनिया बहुत सुखी हो जाएगी और तुम भी। ईश्वर-2 दिन-रात लाखों-लाखों लोगों के द्वारा की जा
मै मंदिर मे बैठा था वो मस्जिद में बैठी थी. मै पंडित जी का बेटा था वो काजी साहब की बेटी थी. मै बुलेट पर चल कर आता था. वो
मुस्तजाब ये टूटी बिखरी मजबूर हो गई, ये चिल्ला चिल्ला कर माज़ूर हो गई, ये नेगेटिविटी से भरपूर हो गई, आसमान जानी थी, मगर खजूर हो गई। इकोनॉमी हमारी चूर
डॉ. रामवीर बीजेपी में सर्वेसर्वा होते थे अडवानी, दिन बदले तो हुए बेचारे पार्टी में बेमानी । आगे की घटनाएं सभी की हैं जानी पहचानी, अपना पाला पोसा चेला करने
किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है? कौन यहां सुखी है, कौन यहां मस्त है? सेठ है, शोषक है, नामी गला-काटू है गालियाँ भी सुनता है, भारी थूक-चाटू है चोर है,
डॉ० रणबीर सिंह छब्बीस जनवरी का दिन लाखां क़ुरबानी देकै आया रै।। आज हटकै म्हारे देश पै गुलामी का बादल छाया रै।। आजाद देश के सपने म्हारे सबनै मिलै पढाई
डॉ. रामवीर देख रहा हूं धीरे धीरे बदल रहा परिवेश, देश दिया करता था ठेका अब ठेके पर देश। सब कुछ ठेके पर देने का जब से चला रिवाज, ठेके
घर-बार खेत-खलिहान जहां रहती है दुनिया खाती है, पीती है मौज करती है और ये सब जुटाते हैं वे जिनके न घर हैं न बार न खेत-खलिहान वे भूखे हैं
कंवल भारती हम बदलेंगे, जग बदलेगा, बदलेगा जुग सारा। भागो नहीं दुनिया को बदलो, यही क्रान्ति का नारा।।टेक।। 1 इन्सानों ने इन्सानों की बस्ती में आग लगाई। ऊँचनीच की नफऱत
ऐ नए साल बता, तुझमें नयापन क्या है हर तरफ़ ख़ल्क़ ने क्यूँ शोर मचा रक्खा है रौशनी दिन की वही, तारों भरी रात वही आज हम को नजऱ आती