आलोक श्रीवास्तव आरएसएस बौद्धिक रूप से काफी बदल गया है और बदलने जा रहा है। अब वह सिर्फ हेडगेवार और गोलवलकर की किताबों पर ही निर्भर नहीं है। उसने अपने