फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम में चर्चा जोरों पर है कि नजराने में सोने के बिस्कुट लेने और पांच लाख का रिश्वती लहंगा पहनने वाली निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास की भूख बढ़ती जा रही है। बताया जा रहा है कि भुगतान की फाइल पर चिडिय़ा बैठाने के मैडम के रेट फिक्स हैं जो फाइनेंस कंट्रोलर एफसी के जरिए उन तक पहुंचा दिए जाते हैं, लेकिन आजकल मैडम चि़डिय़ा बैठाने के मनमाने रेट वसूल रही हैं। ताजा मामला मिर्जापुर एसटीपी का बताया जा रहा है।
पूर्व सीएम खट्टर के आदेश पर शहर के मिर्जापुर और प्रतापगढ़ एसटीपी के उच्चीकरण का काम साल 2020 में शुरू हुआ था। मिर्जापुर एसटीपी की निर्माण लागत करीब 110 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। यह दोनों प्रोजेक्ट तैयार हो कर काम करना भी शुरू हो चुके हैं।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार मिर्जापुर एसटीपी का करीब सात करोड़ रुपये भुगतान रुका हुआ है। ठेकेदार कंपनी जीएनबी ने भुगतान की फाइल पास कराने के लिए एफसी दिनेश से संपर्क किया। बताया जा रहा है कि एफसी ने कंपनी के अधिकारियों को स्पष्ट बता दिया है कि निर्धारित कमीशन के अलावा मैडम को ढाई गुणा अतिरिक्त हिस्सा और चाहिए, तभी मैडम फाइल पर चिडिय़ा बैठाएंगी। कंपनी अधिकारियों ने इसका विरोध किया और बताया कि पहले बार बार भुगतान रुकने के कारण प्रोजेक्ट लंबा खिंच चुका है जिस कारण कंपनी को कुछ खास नहीं बच रहा है, लेकिन स्पष्ट फरमान सुना दिया गया ढाई गुणा अतिरिक्त दो अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहो, पदाधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। बात न बनती देख मैडम बीते सप्ताह बृहस्पतिवार को मिर्जापुर एसटीपी पहुंच गईं ताकि कोई खामी तलाश कर कंपनी पर दबाव बनाया जा सके। वह अपने साथ एसीएमसी गौरव आंतिल, फर्जी डिग्री वाले एक्सईएन पद्मभूषण और निजी सलाहकार अनिल मेहता को लेकर गई थीं। इनमें से कोई भी अधिकारी एसटीपी संचालन के लिए जिम्मेदार नहीं है, यानी किसी को भी एसटीपी की खूबी-खामी या समस्या की जानकारी नहीं थी।
बताते चलें कि एसटीपी का चार्ज चीफ इंजीनियर विवेक गिल के पास है, एक्सईएन नितिन कादियान की देखरेख में एसडीओ सुरेंद्र खट्टर और जेई पूनम एसटीपी संचालन की जिम्मेदारी निभाती हैं। यदि मैडम को एसटीपी के बारे में पता करना होता तो इन अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया जाता, उन्हें तो केवल ठेकेदार पर दबाव डालना था इसलिए अपने चेले चपाटे टाइप अधिकारियों को लेकर गईं थीं। निगम सूत्रों के मुताबिक मैडम अतिरिक्त ढाई गुणा नजराना लेने पर अड़ी हुई हैं और भुगतान की फाइल रोक कर कंपनी पर पूरा दबाव बना रही हैं। एक सप्ताह बीतने को हैं लेकिन कंपनी की ओर से कोई इशारा नहीं मिला है, जानकार बताते हैं कि अब एसटीपी में कोई न कोई खामी निकाल कर कंपनी को नोटिस भेज कर दबाव बनाया जाएगा।
नगर निगम में खुलेआम कमीशनखोरी का खेल चल रहा है और ईमानदारी का ढोल पीटने वाली भाजपा सरकार के मंत्री-विधायक नेता चुपचाप बैठे हैं, बिना खर्ची पर्ची काम का दावा करने वाले सीएम सैनी भी आए दिन शहर में आते हैं लेकिन कभी भ्रष्टाचारी अधिकारियों की नकेल कसने की जुर्रत नहीं जुटा सके। राजनीतिक जानकारों के अनुसार सरकार यदि भ्रष्टाचार पर सख्त होती तो पांच करोड़ का गबन करने वाले धनेश अदलखा जैसों को टिकट ही न देती, लगता है कि सरकार ने जनता को गुमराह करने के लिए ईमानदारी का चोला पहन रखा है लेकिन पर्दे के पीछे नेताओ-अधिकारियों को लूट-बांट करने की खुली छूट दे रखी है, यही कारण है कि भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।