फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पांच लाख का लहंगा पहनने और सोने के बिस्कुटों की शौकीन निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास निगम सदन का गठन होने के बाद अब अपने अधिकार मातहतों को डेलिगेट कर आराम करने के मूड में दिख रही हैं। क्योंकि वह टॉपर आईएएस अधिकारी हैं और लंबे कार्यकाल में उन्होंने लूट कमाई वाले और बेकार की कवायद वाले कलमघिस्सू प्रकार के कार्यों की बेहतर जानकारी हासिल कर ली है। इसी अनुभव का फायदा उठाते हुए उन्होंने एस्टेब्लिशमेंट ब्रांच के कलमघिस्सू काम अतिरिक्त निगमायुक्त-2 यानी स्वप्निल आर पाटिल को सौंप दिए और मोटी कमाई वाले अधिकार अपने पास ही रख लिए।
निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास ने 11 अप्रैल को कार्यालय पत्र जारी किया। इसके अनुसार हरियाणा म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट 1994 के तहत निगमायुक्त को दिए गए एस्टेब्लिशमेंट ब्रांच संबंधी अधिकारों में से किसी कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, सेवानिवृत्त कर्मचारी से संबंधी कार्य, क्लास प्रथम व द्वितीय स्तर के अधिकारियों की छुट्टियां और विभिन्न काडर के पदों पर अधिकारियों के स्थानांतरण का अधिकार उन्होंने एसीएमसी द्वितीय को डेलिगेट कर दिया।
मैडम ने इनमें से सफाई स्टाफ के स्थानांतरण और छुट्टी संबंधी अधिकार डेलिगेट नहीं किए जो चर्चा का विषय हैं। निगम के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार सफाई स्टाफ की तैनाती और स्थानांतरण नगर निगम की सबसे मोटी ऊपरी कमाई वाली मद मानी जाती है क्योंकि इस स्टाफ के जरिए औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से बहुत ही तगड़ी वसूली होती है, जिसका बहुत बड़ा हिस्सा सोने के बिस्कुट और ज्वैलरी की शौकीन मैडम तक पहुंचता है।
निगम के रिकॉर्ड के अनुसार शहर में बीस हजार जबकि अनाधिकारिक रूप से पच्चीस हजार से अधिक औद्योगिक संस्थान हैं। इन उद्योगों से रोजाना करीब चार सौ टन कचरा निकलता है, जिसमें औद्योगिक और जैविक दोनों कचरा शामिल है। नियमानुसार औद्योगिक कचरे के प्रबंधन और निस्तारण का जिम्मा उद्योगों का ही है। इसके विपरीत चंद उद्योगों को छोड़ कर शायद ही किसी कारखाने में कचरा प्रबंधन किया जाता हो। यानी इन कारखानों से निकलने वाला कचरा भी नगर निगम का सफाई अमला ही उठाता और ठिकाने लगाता यानी प्रबंधन करता है। जाहिर सी बात है कि बिना सॉलिड वेस्ट प्रबंधन प्लांट वाले कारखानों से प्रतिमाह मोटी वसूली की जाती है। सूत्र बताते हैं कि प्रति कारखाना औसतन पांच हजार रुपये महीना की वसूली होती है, तो बीस हजार उद्योगों से प्रतिमाह दस करोड़ रुपयों की वसूली होती है। समझा जा सकता है कि इतनी बड़ी रकम बिना निगमायुक्त और आला अधिकारियों की सहमति के सफाई स्टाफ न तो कमा सकता है और न ही हजम कर सकता है। कमाई वाली पोस्ट और ड्यूटी पर लगे रहने के लिए भी मैडम को हिस्सापत्ती पहुंचा कर खुश रखना पड़ता है। ये हिस्सापत्ती निगमायुक्त मैडम सीधे नहीं लेतीं, उनके लिए उनकी पीए रवि सारी वसूली करती हैं और उसका लेखा जोखा भी रखती हँै। जाहिर है हड्डी के कुछ टुकड़े मैडम उन्हें भी डालती होंगीं।
सिर्फ कारखानों से ही नहीं शहर में चल रहे सैकड़ों तीन सितारा होटल, रेस्टोरेंट आदि से भी काफी मोटी कमाई होती है। निेयमानुसार इन होटलों को भी अपने यहां से निकलने वाले जैविक कचरा निस्तारण के लिए प्लांट लगाना अनिवार्य है। निगम सूत्रों के अनुसार होटल रेडिसन ब्लू और नीलम बाटा रोड स्थित एक होटल को छोड़ कर किसी में भी प्लांट नहीं लगा है। यानी बाकी सभी से निकलने वाला जैविक कचरा भी निगम के सफाईकर्मियों द्वारा साफ किया जाता है। इन होटलों से भी प्रतिमाह करीब तीस लाख रुपये वसूले जाते हैं। यहां समझने वाली बात यह है कि होटलों और कारखानों से निकलने वाला कूड़ा नगर निगम के खत्तों में जाता है यानी जनता के खर्च पर इन संस्थानों के कचरे का प्रबंधन किया जाता है और संस्थानों से होने वाली कमाई मैडम व उनके कमाऊ पूतों के बीच बंट जाती है। यानी बैठे-बिठाए मैडम को कचरे से लाखों रुपये मिल जाते हैं। समझा जा सकता है कि इतनी मोटी कमाई वाली मद को मैडम कैसे छोड़ सकती थीं।
चर्चा यह भी है कि मैडम को भी अपनी विदाई नजदीक आने का अहसास हो चुका है इसलिए अब आराम करने और सिर्फ कमाई करने के मूड में नजर आ रही हैं। इसीलिए उन्होंने एस्टेब्लिशमेंट ब्रांच के सिरदर्दी वाले काम जैसे सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के काम, छुट्टी आदि देने के पावर एसीएमसी दो को डेलिगेट कर दिए। एसीएमसी दो स्वप्निल आर पाटिल भी निगमायुक्त की कुर्सी के लिए लालायित हैं और पंचकूला मुख्यालय में सेटिंग बैठाने में लगातार जुटे हैं तो उन्होंने भी आधे अधूरे ही सही निगमायुक्त के अधिकार सहर्ष कुबूल कर लिए। माना जा रहा है कि उनके मन में लड्डू फूटने लगे हैं कि मैडम के जाने के बाद इस निगमायुक्त पद को मिलने वाले कीमती नजराने और मोटी हिस्सापत्ती पर एक दिन उनका हक होगा।