शुल्क भरे बिना शहर भर में लगाए गए औद्योगिक प्रदर्शनी के सैकड़ों विज्ञापन

शुल्क भरे बिना शहर भर में लगाए गए औद्योगिक प्रदर्शनी के सैकड़ों विज्ञापन
December 16 08:33 2024

विधायक अदलखा बैठा रहे हैं नगर निगम का भट्टा

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) लूट कमाई में माहिर नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों को अब दो सौ करोड़ के घोटाले में शामिल विधायक धनेश अदलखा का वरद्हस्त प्राप्त हो गया है। विधायक की अनुकंपा से विज्ञापन शाखा का कर्मचारी नेतराम डागर अवैध विज्ञापनों का पैकेज बेच कर खुद और आकाओं के लिए मोटी कमाई का जुगाड़ कर रहा है। जिन विज्ञापनों का अच्छा खासा शुल्क नगर निगम के खाते में जाना चाहिए था वह भ्रष्टाचारियों की जेब में जा रहा है, और विधायक अदलखा इसलिए खुश है कि मुफ्त में उसका भी प्रचार हो रहा है।

सेक्टर 12 में 20 से 23 दिसंबर तक इंडस टैक इंडस्ट्रियल एक्जीबिशन का आयोजन होना है। शहर भर में गैंट्री-यूनीपोल, बैनर, पोस्टर लगाकर इस प्रदर्शनी का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। सबसे ज्यादा विज्ञापन एनआईटी जोन में लगाए जा रहे हैं लेकिन ये पूरी तरह से अवैध हैं क्योंकि इनमें से किसी का भी विज्ञापन शुल्क नगर निगम में नहीं जमा कराया गया है। ऐसा नहीं है कि ये विज्ञापन मुफ़्त में लगाए गए हैं, इन्हें लगाने का पैकेज विज्ञापन शाखा के कर्मचारी नेतराम डागर ने लिया है। आयोजकों से तो अच्छी खासी रकम वसूली गई है लेकिन नगर निगम में जमा करवाने के बजाय सबमें बंट गई। विज्ञापनों पर कोई आपत्ति न उठाए इसलिए आयोजकों ने बैनर पोस्टरों में बडख़ल विधायक धनेश अदलखा और एनआईटी विधायक सतीश फागना की फोटो लगा दी। आयोजकों को यह ज्ञान भी नेतराम डागर ने दिया कि अब यदि कोई शिकायत भी करेगा तो विधायकों की फोटो होने के कारण निगमायुक्त भी इन्हें हटवाने की हिम्मत नहीं कर पाएंगी। अगर कोई शिकायत करेगा तो निगमायुक्त को बता दिया जाएगा कि यह बैनर पोस्टर आदि प्रदर्शनी के नहीं बल्कि विधायक जी के हैं। जाहिर है ये सारा खेल विधायक की सहमित और जानकारी में ही खेला गया।

विज्ञापन विभाग के जेई अंकित गोयल ने बताया कि एनआईटी जोन में एक भी विज्ञापन की अनुमति नहीं दी गई है, न ही नगर निगम में किसी ने शुल्क जमा कराया है। यदि कोई बैनर पोस्टर लगा है तो वह अवैध है। इन अवैध विज्ञापनों के हटाए जाने के सवाल पर उनका कहना था कि यदि कोई शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाती है, फिलहाल किसी ने शिकायत नहीं दी है।

उन्होंने यह भी बताया कि अवैध विज्ञापनों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन विधायकों के चित्र वाले प्रदर्शनी के विज्ञापनों को हटाने की बात पर चुप्पी साध गए। उनका चुप्पी साधना लाजमी है क्योंकि ये सारे विज्ञापन उनके ही मातहत नेतराम डागर की देखरेख में लगाए गए हैं और इनसे मिलने वाली मलाई का हिस्सा तो उन तक भी पहुंचा होगा।

विज्ञापन शाखा का काम अवैध विज्ञापनों को तलाश कर हटाना और जुर्माना वसूलने के लिए नोटिस जारी करना है। अभियान में एनआईटी जोन में लगे एक्जीबिशन के विज्ञापन क्यों नहीं फाड़े गए। जब इन्हें फाडऩे की कार्रवाई नहीं हुई तो नोटिस भेजने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। एक्जीबिशन के विज्ञापनों को छोड़ भी दिया जाए तो अन्य अवैध विज्ञापनों को फाड़ तो दिया जाता है लेकिन जुर्माने की नोटिस नहीं भेजी जाती, समझा जा सकता है कि इन विज्ञापनों के लिए पहले ही मेज के नीचे से रकम वसूली जा चुकी है इसीलिए बेईमानी का धंधा ईमानदारी से करने वाले निगम के भ्रष्ट अधिकारी नोटिस नहीं भेजते।

नगर निगम के जानकारों के अनुसार एनआईटी जोन में लगाए गए एक्जीबिशन विज्ञापनों की यदि फीस वसूली जाती तो नगर निगम को अस्सी लाख रुपयों से अधिक की आय होती। इसका करीब पच्चीस फीसदी मेज के नीचे से पहुंचाने पर कहीं भी विज्ञापन लगाने की खुली छूट मिल गई। जोन में यूनीपोल- गैंट्री का एक महीने का शुल्क 1 लाख 60 हजार से लेकर 2 लाख 30 हजार रुपये निर्धारित है। इसके अलावा बैनर-पोस्टर का शुल्क 160 रुपये वर्ग फुट की दर से वसूला जाता है। ये सारे विज्ञापन केवल नगर निगम द्वारा निर्धारित जगहों पर ही लगाए जा सकते हैं। हाईकोर्ट ने बिजली के खंभे पर किसी भी तरह का विज्ञापन, बैनर-पोस्टर लगाने पर प्रतिबंध लगा रखा है।
अवैध रूप से विज्ञापन लगाने पर एक हजार रुपये जुर्माने के साथ 160 रुपये वर्गफुट के हिसाब से शुल्क वसूलने का प्रावधान है। जानकार बताते हैं कि विज्ञापन से अवैध कमाई करने के लिए ही एनआईटी जोन के विज्ञापन का ठेका जानबूझ कर नहीं उठाया गया है। यहां विज्ञापन का काम पूरी तरह से अधिकारियों के हाथ में है यानी विज्ञापन कहां, कितना बड़ा, कितने समय तक लगना है, इसके आधार पर निर्धारित शुल्क निगम के खाते में जमा करवाना, खेल यहीं होता है। निगम के खाते में नाम का शुल्क जमा करवा कर प्राइम साइट पर बड़ा विज्ञापन लगवाया जाता है, इसके एवज में अच्छी रकम वसूली जाती है जो ऊपर तक बांटी जाती है।

फिलहाल समाचार लिखे जाने तक तो निगम ने एनआईटी जोन से इंडस टैक इंडस्ट्रियल एक्जीबिशन के अवैध विज्ञापन नहीं हटाए हैं। अब देखना है कि निगम आयोजकों को अवैध विज्ञापन के लिए नोटिस जारी करता है या नहीं। यदि जारी करता है तो क्या वह विज्ञापनों की गिनती कर उनकी लोकेशन, लगाए जाने की अवधि और साइज की गणना कर जुर्माना और शुल्क भरने का नोटिस होगा, यदि ऐसा है तो यह शुल्क अस्सी लाख से अधिक का होगा या सिर्फ औपचारिकताएं ही की जाएंगी? नेतराम डागर के रहते हुए इसकी संभावना ज्यादा है। इस सबमें नगर निगम का भ_ा बैठता है तो बैठे विधायक और अधिकारियों की बला से।

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Mazdoor Morcha
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