पवन कुमार बंसल (ग़ुस्ताखी माफ़) मानेसर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी के तबादले के आदेश के पीछे रहस्य। हमारी जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, इसमें मुंबई की एक घटिया थ्रिलर फिल्म के सभी तत्व हैं जिसमें राजनीतिक पक्षपात, रीढ़विहीन शीर्ष नौकरशाही और सिस्टम की कुख्यात अनसुनी बातें शामिल हैं।
उच्च पदस्थ आधिकारिक सूत्रों ने इस शक्तिशाली ठेकेदार की कहानी का खुलासा किया है, जो करनाल का पत्रकार होने का दावा करता है और सत्ता में बैठे लोगों से नजदीकियों का आनंद उठाता है। दो साल पहले उसे मानेसर शहर में सड़क सफाई, झाड़ उखाडऩे और नाले की सफाई का ठेका उसके राजनीतिक रसूख के कारण 100 करोड़ पांच लाख रुपये में दिया गया था।
ठेका मिलने के बाद उसने सफाई के लिए तैनात कर्मियों के फर्जी बिल लगाने शुरू कर दिए। अपने राजनीतिक रसूख के कारण वह भुगतान करवाता रहा। उसकी परेशानी तब शुरू हुई जब कुछ महीने पहले शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने एक पोर्टल पेश किया, जिसमें तैनात कर्मचारियों का प्रत्येक विवरण दर्ज करना अनिवार्य किया गया। जिसमें उनके स्थान और तैनात वाहनों के ट्रिप/जीपीएस और कचरे की प्रोसेसिंग शामिल है। हरियाणा के सभी यूएलबी के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया गया था कि वे केवल इसी पोर्टल के माध्यम से बिलों का निपटान करें और दिसंबर २०२४ से कोई मैनुअल बिल स्वीकार नहीं किया जाएगा।
20 दिसंबर 24 से 19 फरवरी 25 तक दो महीनों के लिए उनके द्वारा प्रस्तुत बिल पोर्टल के विवरण से मेल नहीं खा रहे थे, जिसका अर्थ है कि वे सहमति के अनुसार पर्याप्त जनशक्ति उपलब्ध नहीं करा रहे थे और अपने बढ़े हुए बिलों को मंजूरी देने के लिए प्राधिकरण पर दबाव बना रहे थे।
यह एमसीएम क्षेत्र में पार्षदों, स्थानीय लोगों और आरडब्ल्यूए की कई सफाई शिकायतों के बावजूद था। अधिकारियों ने एसडब्ल्यूएम (स्वच्छ भारत मिशन) पोर्टल पर दर्ज डेटा की अच्छी तरह से जांच की और उनके भुगतान की जांच की, जिसके परिणामस्वरूप उनके भुगतान में देरी हुई। इसके बाद उसने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए उच्च अधिकारियों को झूठी शिकायतें की। बताया गया है कि यह ठेकेदार अधिकारी/कर्मचारियों को तबादला करवाने के लिए खुलेआम धमकी दे रहा था। उसने आरोप लगाया कि भुगतान करवाने के लिए उससे रिश्वत मांगी जा रही है, जिसकी जांच में पता चला है कि यह दबाव बनाने के लिए किया गया झूठ है।
याद दिला दें कि क्षेत्र की भाजपा विधायक बिमला चौधरी ने भी शिकायत की थी कि आकांक्षा एंटरप्राइजेज टेंडर की शर्तों का उल्लंघन कर रही है। हाल ही में सीएम नायब सैनी ने गुरुग्राम में बैठक की थी, जिसमें सफाई व्यवस्था मुख्य मुद्दा थी और उन्होंने अधिकारियों को शहर को साफ न रखने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। स्थानीय लोग भी कम मैनपावर के कारण क्षेत्र में खराब सफाई व्यवस्था के बारे में आवाज उठा रहे थे। विधायक ने मानेसर नगर निगम को टेंडर की शर्तों के उल्लंघन के लिए एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया था।
गौरतलब है कि इसी ठेकेदार के पास गुडग़ांव नगर निगम (एमसीजी) क्षेत्र में पथ्या नाम से एक और काम है। वहां भी गड़बडिय़ा पाए जाने पर जांच का आदेश देकर उसका भुगतान रोक दिया गया है। यह निश्चित रूप से अधिकारियों पर काम करने और परिणाम देने तथा एसडब्लूएम पोर्टल के माध्यम से एजेंसियों के प्रदर्शन की निगरानी करके शहर को स्वच्छ बनाने के लिए भारी दबाव के अलावा था। हालांकि, ठेकेदार का बिल चुकाने का दबाव था, जो हरियाणा के एक मजबूत संघी और पूर्व मुखिया के करीबी हैं। आयुक्त ने अपना रुख नहीं बदला और दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया हालांकि, इसके लिए उन्हें राजनीतिक और राज्य मशीनरी की संयुक्त शक्तियों के क्रोध का सामना भी करना पड़ा। ठेकेदार अब खुलेआम अपने रसूख का बखान करते और अपने कामों का जश्न मनाते देखे जा सकते हैं। क्या हरियाणा के लिए यही आगे का रास्ता है? क्या सही रुख अपनाने वाले अधिकारियों को दंडित करना आम बात हो गई है? क्या कारण हैं कि मिलेनियम सिटी में अभी भी ठोस कचरे की बदबू आ रही है? क्या जमीनी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों को अधिक छूट देने की आवश्यकता है? उसी काम के लिए नए टेंडर का अनुमान आकांक्षा से 50 प्रतिशत कम दर पर क्यों है? अगर पोर्टल ठेकेदारों के पक्ष में नहीं है तो क्या उसे खत्म कर देना चाहिए? क्या सीएम जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई करने के लिए केवल बातें ही कर रहे हैं? ये सभी ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर दिया जाना तथा उन पर विचार किया जाना अभी बाकी है।