राजा नाहर सिंह स्टेडियम : 127 करोड़ लुटानेे के बाद इसे बेच खाने की तैयारी फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सरकारों की बेरुखी के चलते अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का दर्जा गंवाने वाले प्रदेश का एकमात्र राजा नाहर सिंह स्टेडियम मोदी-खट्टर-सैनी राज में संघी-भाजपाई नेता ठेकेदारों की लूट का बेहतरीन संसाधन बन कर रह गया है। स्टेडियम बनाने के नाम पर गुजराती रंजीत बिल्डकॉन पर करीब सवा सौ करोड़ लुटाने के बाद अब शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल इसे पीपीपी मोड पर निजी हाथों को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।
आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि यह ठेका भी किसी गुजराती कंपनी को ही मिले। सब जानते हैं कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का होनहार बेटा जय शाह आईसीसी का चेयरमैन है तो राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्रिकेट गतिविधियों की रूपरेखा से लेकर स्वीकृति तक गुजरात से होकर गुजरती है। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने हाल ही में पत्रकारों को बताया कि वह राजा नाहर सिंह स्टेडियम को पीपीपी मोड पर दे देंगे। दावा किया कि स्टेडियम में जल्द ही आईपीएल और इंटरनेशनल मैच खेले जाएंगे, इससे रोजगार पैदा होंगे और आमदनी के स्रोत तो बनेंगे ही सट्टेबाजी का व्यापार कितना बढ़ेगा वो नहीं बताया।
देश को आजाद कराने वाली कांग्रेस के सत्तर साल के भ्रष्टाचार गिनाने वाली भाजपा के मंत्री अपने भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए इस तरह के ऐलान कर रहे हैं। पीपीपी मोड के नाम पर स्टेडियम को निजी हाथों में सौंपने की घोषणा करते वक्त उन्होंने यह बताने की जरूरत नहीं समझी कि जनता का 127 करोड़ रुपयेे लेकर गुजरात भाग गई रणजीत बिल्डकॉन कंपनी से सरकार हिसाब किताब कब करेगी। और देरी के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई वसूली करने का सरकार का क्या प्लान है। क्योंकि स्टेडियम के नाम पर लूटा बांटा गया 127 करोड़ रुपया जनता की गाढ़ी कमाई का था इसिलए मंत्री जी को यह कहना भारी लगा। आसान रास्ता अपनाते हुए उन्होंने पीपीपी मोड का फंडा सुना दिया।
दरअसल विपुल भी मोदी की तरह सार्वजनिक संपत्तियों को मुनाफाखोर निजी हाथों को सौंपने की संघी-भाजपाई आर्थिक रणनीति पर ही चल रहे हैं। जिस तरह मोदी ने इलेक्टोरल बांड के चंद टुकड़ों की लालच में पीपीपी मोड पर देश भर की सड़कें, आधारभूत उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण कमाऊ कंपनियां धनपशुओं को सौंप दी हैं, विपुल गोयल की योजना भी वैसी ही है। गोयल कहते हैं कि स्टेडियम बनने से रोजगार बढ़ेगा, कैसे बढ़ेगा इस पर उन्हें जरूर प्रकाश डालना चाहिए। जो निजी क्षेत्र करोड़ों रुपये खर्च करेगा वह हर जगह अपना मुनाफा देखेगा कि रोजगार पर खर्च करेगा। सब जानते हैं कि जिस स्टेडियम में आईपीएल, या कोई अंतरराष्ट्रीय मैच होता है वहां दर्शकों को अंदर पानी की बोतल तक नहीं ले जाने दिया जाता है। अंदर तो दूर स्टेडियम के मुख्य मार्ग पर कहीं भी किसी तरह की खाने-पीने की दुकान या पार्किंग नहीं हो सकती।
यह सारा इंतजाम वही कंपनी करती है और मुनाफा कमाती है। पूरा मैच और उसकी व्यवस्था इवेंट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा कराया जाता है यानी सारी व्यवस्था उनके पास। ऐसे में स्थानीय युवाओं को रोजगार तो मिलने से रहा। हां, स्टेडियम पीपीपी मोड पर चले जाने से स्थानीय क्रिकेट प्रतिभाओं को जरूर नुकसान होने वाला है। जो क्रिकेट प्रतिभाएं 2018 तक मुफ्त में या नाममात्र की फीस पर स्टेडियम में मैच, टूर्नामेंट आदि का आयोजन कर लेते थे, निजी कंपनी के हाथ में जाने के बाद उनके लिए यह महंगा और पहुंच के बाहर हो जाएगा। मोटे तौर पर कहा जाए कि 1980 के दशक में शहर के उद्योगपतियों, खेल संस्थाओं के सहयोग से सरकार द्वारा बनवाया गया यह सार्वजनिक स्टेडियम पीपीपी मोड पर बनाए जाने के बाद निजी कंपनी का हो जाएगा। यह निजी कंपनी गुजरात में बैठे किसी संघी-भाजपाई पोषक धनाढ्य की होगी जिसे न तो स्टेडियम बनाने का अनुभव होगा न ही खेल प्रतियोगिताएं कराने का। यह सारे काम तो सरकार अपनी मशीनरी से कराएगी और मुनाफा उसकी जेब में जाएगा।