कमल किशोर फऱीदाबाद । स्मार्ट सिटी में बृहस्पतिवार सुबह हुई ढाई घंटे की बारिश में शहर का शायद ही कोई हिस्सा हो जहां जलभराव डेढ़ से दो फीट तक नहीं हुआ। जलभराव से जनता त्राहिमाम कर रही थी और प्रशासन सेक्टर 12 में होने वाले सीएम की विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम की तैयारी में जुटा था, मानो इसके लिए आम जनता कुछ हो ही नहीं। प्रशासन का सारा फोकस सेक्टर 12 का हूडा ग्राउंड पर ही रहा, सारा अमला उन रास्तों और जगहों पर जल निकासी के लिए लगा दिया गया जहां से सीएम को गुजरना था और कार्यक्रम को अंजाम देना था। नतीजा यह रहा कि शहर में कहीं भी जलभराव समाप्त करने के लिए मोटरपंप आदि नहीं चलाए गए। बेचारी जनता खुद ही घर-दुकानों में घुसे पानी को निकालने में दिन भर जुटी रही।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, करोड़ों के सीवर सुधार और सफाई के दावों के बावजूद वीरवार को पूरा शहर एक बार फिर तालाब में तब्दील हो गया। सुबह 8 बजे शुरू हुई बारिश ने महज़ 11 बजे तक ही शहर के हर कोने में हाहाकार मचा दिया। सारा एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद, बडख़ल, बल्लभगढ़, सेक्टर-19, 21, 22, 23, 28, सुभाष कॉलोनी, डबुआ, भगत सिंह कॉलोनी, आदर्श नगर, जवाहर कॉलोनी, पाली रोड, बस स्टैंड, बल्लभगढ़ बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन का जलभराव से हाल बुरा था। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए मेवला महराजपुर अंडरपास, ओल्ड अंडरपास को जलभराव के कारण बंद कर दिया गया। जलभराव के कारण दर्जनों जगहों पर कारें और बाइकें खराब होकर खड़ी नजर आईं। जवाहर कॉलोनी इलाके में तो पानी घरों और दुकानों में डेढ़ से दो फीट तक भर गया। एनआईटी तीन के बी ब्लॉक में बिजली के तारों से टकरा रहे पेड़ों से करंट उतरने के कारण खौफ का माहौल छाया रहा। लोगों के शिकायत करने पर बिजली काटी गई अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। पहली बार विधायक बने धनेश अदलखा और सतीश फागना ने तो नगर निगम और एफएमडीए के अधिकारियों के साथ बैठकें कर इस मानसून मेें जलभराव नहीं होने के बड़े-बड़े आदेश अनेक बार दिए। विधायकों के आदेश पर इन दोनों महकमों ने इस बार सबसे ज्यादा धन संभवत: नाला-सीवर सफाई के नाम पर उड़ाया।
नगर निगम और एफएमडीए ने दावा किया था कि सभी प्रमुख नालों की सफाई पूरी हो चुकी है। लेकिन शहर के सभी नाले जरा देर की बारिश में हकीकत लेकर प्रकट हो गए। सेक्टर-22 और 23 के बीच का नाला ओवरफ्लो हो गया, एनआईटी-3 और डबुआ कॉलोनी में सीवर का पानी घरों में घुस गया। जलभराव केवल शहर के अंदर ही नहीं रहा, दिल्ली मथुरा हाईवे, और मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे की स्लिप रोड का हाल भी बुरा रहा। हार्डवेयर चौक, बडख़ल चौक, बाटा चौक और बल्लभगढ़ बस स्टैंड के पास घंटों तक जाम लगा रहा। बारिश में वैसे तो यातायात पुलिस नजर नहीं आती लेकिन क्योंकि सीएम सैनी को आना था इसलिए दिल्ली-मथुरा हाईवे से लेकर सेक्टर 12 हूडा ग्राउंड तक चप्पे चप्पे पर तैनात नजर आई। उसका ध्यान यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने से ज्यादा सीएम साहब के रास्ते को क्लियर कराने में ही लगा रहा।
सुधी पाठकों को याद दिला दें कि शहर की जल निकासी प्रणाली, सीवेज सिस्टम आदि यूरोपी देशों जैसा बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने अक्तूबर 2023 में अपने ‘होनहार एक्सईएन नितिन कादियान को ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर भेजा था। जनता की गाढ़ी कमाई पर ऑस्ट्रेलिया सेे ऐश करके लौटे कादियान ने वहां की जल निकासी आदि व्यवस्थाओं का कितना अध्ययन किया होगा यह शहर की हालत बता रही है। सिर्फ नगर निगम ही लूट कमाई नहीं करता, अब तो उससे भी बड़ा मगरमच्छ एफएमडीए है, जो करोड़ों रुपये खर्च कर ऐसे काम कराता है जो चंद महीनों में ही भ्रष्टाचार की तरह खुल जाते हैं। जानकारों की मानें तो इन दोनों महकमों ने केवल इसी साल नाली-सीवर की सफाई में करीब सौ करोड़ रुपये खर्च दिखाए हैं। हालात सबके सामने हैं।
बिलबिलाई जनता सोशल मीडिया पर निकालती रही भड़ास सुशासन के जुमले उछालने वाली भाजपा सरकार में जलभराव से परेशान जनता ने वीरवार को सोशल मीडिया पर जमकर भड़ास निकाली। लोगों ने अपने इलाके में जलभराव, घर में पानी घुसने के कारण फर्नीचर, मोटर, घरेलू सामान के हुए नुकसान, दोपहिया वाहन, कार की बर्बादी, सड़कों के बुरे हालात की सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो डाल कर प्रशासन को जमकर कोसा। बल्लभगढ़, एनआईटी मार्केट और ओल्ड फरीदाबाद के थोक बाजार में जलभराव के कारण लाखों रुपये कीमत का सामान खराब हुआ। सेक्टर 22 निवासी राकेश कुमार ने जलभराव दिखाते हुए कहा कि हर साल यही हाल होता है, नेता सिर्फ फोटो खिंचवाते हैं, काम कुछ नहीं होता। बल्लभगढ़ की रहने वाली रीना शर्मा ने कहा कि तीन घंटे की बारिश में घर के अंदर कमर तक पानी आ गया, नगर निगम के लोग फोन उठाते तक नहीं। एनआईटी एक बाजार के दुकानदार अजय वर्मा ने दुकान दिखाते हुए कहा कि सामान खराब हो गया, हजारों का नुकसान हुआ, लेकिन कोई मदद करने नहीं आया। इन लोगों का कहना था कि नेताओं को ‘फोटो खिंचवाने’ और ‘रिबन काटने’ की राजनीति छोड़कर असली काम पर ध्यान देना चाहिए।