फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) तिगांव क्षेत्र से दो बार के विधायक एवं मौजूदा खाद्य एवं आपूर्ति राज्यमंत्री राजेश नागर व उनके पिता रूप सिंह नागर बीते कई वर्षों से अवैध प्लॉटिंग का धंधा करते आ रहें हैं। किसानों से औने-पौने दामों पर ज़मीन खरीद कर कॉलोनियां बनाकर प्लॉट बेचने का धंधा तो का$फी लोग करने का प्रयास करते हैं, लेकिन कामयाब वही हो पाते हैं जिन्हें सत्ता का संरक्षण प्राप्त हो। बिना संरक्षण वालों को सरकार के विभिन्न विभाग ..टाउन एन्ड कंट्री प्लॉनिंग, एमसीएफ, ‘हूडा, तहसील व पुलिस आदि इस काम में इतने रोड़े अटकाते हैं कि कोई काम ही नहीं कर सकता।
इसी हकीकत को पहचानते हुए रूप सिंह नागर ने अवैध कॉलोनाइजिंग का धंधा करने के साथ-साथ, समय रहते राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करने की योजना बना डाली थी। इसी के तहत अपने पुत्र राजेश नागर को अथाह धन के बल पर सक्रिय राजनीति में उतार दिया था। विदित है कि तिगांव विधानसभा क्षेत्र से कृष्णपाल गूजर विधायक रह चुके, सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री बनने के बाद वे इस सीट से अपने पुत्र देवेन्द्र गूजर को विधायक बनाना चाहते थे, परन्तु टिकट न मिलने से उनकी इच्छा पूरी न हो सकी। इसी कशमकश में राजेश नागर ने तिगांव सीट पर भाजपा की ओर से अपना दावा ठोंक दिया। सत्तारूढ़ दल का अंग बनने के बाद उनके इस अवैध धंधे को तो मानो पंख ही लग गए। सरकार का कोई भी विभाग अथवा अधिकारी उन्हें रोकने-टोकने की हिमाकत करने की स्थिति में नहीं रहा।
जाहिर है कि ऐसे में पिता पुत्र ने खुला खेल फर्रुखाबादी खेलना शुरू कर दिया। अपने सुविधानुसार पुलिस एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती भी कराने लगे। इनका कोई भी काम किसी भी महकमे में अटकता नहीं बल्कि अपने प्रतिद्वंद्वियों के काम भी अपने प्रभाव से अटकाने लगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन्होंने मेसर्स रियल लैंड डेवलपर्स, पता 502 जवाहर कॉलोनी नाम से एक शेल कम्पनी भी रजिस्टर करा ली। इस कम्पनी का मालिक अथवा डायरेक्टर विरेन्द्र पुत्र सुदामा नाम के उस पहाड़ी लड़के को बनाया जो इनके पास 10,000 रुपये मासिक पर नौकरी करता है। मजे की बात यह है कि कम्पनी का जो पता जवाहर कॉॅलोनी का दिखाया गया है उसका मालिक रूप सिंह नागर है।
आश्चर्यजनक बात तो सामने यह आई कि इस नौकर ने मौजा कबूलपुर पट्टी की जो ज़मीनें खरीदी हैं उनका विवरण इस प्रकार है। 1. मौजा कबूलपुर खादर पट्टी में 11 कनाल 8 मरला, 14 सितंबर 2012 को रजिस्ट्री हुई, कीमत 42 लाख 75 हजार रुपये। 2. मौजा कबूलपुर खादर पट्टी में 7 कनाल 12 मरला 13 जुलाई 2012 को खरीदी गई, कीमत 28 लाख 50 हजार रुपये। 3. मौजा कबूलपुर खादर में 4 कनाल जमीन 19 दिसंबर 2011 को खरीदी गई, कीमत आठ लाख रुपये। 4. 15 कनाल 8 मरला, 5 नवंबर 2012 को खरीदी गई, कीमत 75 लाख 83 हजार 250 रुपये। 5. 7 कनाल 16 मरला, 19 दिसंबर 2011 को खरीदी गई, कीमत 15 लाख 60 हजार रुपये।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार नागर पिता-पुत्र ने इन जमीनों पर बिना कोई लाइसेंस लिए बिना, कोई सीएलयू कराए अंधाधुंध प्लॉटिंग करके आठ हजार से 20 हजार रुपये प्रति गज़ के हिसाब से बेच दिया। गौरतलब है कि जमीनों को खरीदते व बेचते वक्त बहुत कम रेट दिखाकर स्टैंप ड्यूटी की चोरी तो की ही है, बेनामी सौदेबाजी के चलते आयकर का भी बड़ा घोटाला किया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि दिखाई गई उक्त कम्पनी के मालिक दस हजार तनख्वाह पाने वाले विरेंद्र के पास ज़मीनें खरीदने के लिए इतनी बड़ी-बड़ी रकमें कहां से आईं? कम्पनी द्वारा प्लॉटिंग करके बेची गई ज़मीनों से होने वाले अंधाधुंध मुनाफे का कोई हिसाब-किताब आयकर विभाग को दिया गया या नहीं? जानकारों के मुताबिक वीरेन्द्र ने कोई हिसाब अथवा आयकर जमा नहीं कराया क्योंकि उसे तो कोई वास्तविक आमदनी हुई ही नहीं तो वह आयकर कहां से जमा कराता, कमाई तो सारी नागर पिता-पुत्र को ही होती रही।
रूप सिंह नागर ने एक दूसरी कम्पनी मेसर्स आर एस आर डेवलपर्स के नाम से बनाई जिसमें डायरेक्टर एवं मालिक अपने दामाद धर्मेद्र को दिखाया गया है। इसका पता पूर्वी दिल्ली के मकान नंबर एफ-1 शाहदरा नई दिल्ली दिखाया गया है। पहली कम्पनी की तरह इस कम्पनी के पास भी कोई आवश्यक लाइसेंस आदि नहीं था। इसके बावजूद इस कम्पनी ने जो जमीनें खरीदी व अवैध प्लॉटिंग करके बेची उनका विवरण इस प्रकार हैै।
1. 9 कनाल 9 मरला, 31 दिसंबर 2012 को खरीदी गई, कीमत 35 लाख 44 हजार रुपये। 2. 9 कनाल 15 मरला, 5 सितंबर 2012 को खरीदी गई, कीमत 36 लाख 56 हजार 500 रुपये। तहसील कार्यालय से उपलब्ध यह जानकारियां अभी अधूरी हैं। बताया जाता है कि रूप सिंह नागर ने भी कई ज़मीनें सीधे अपने नाम पर खरीदी व बेची हैं। उनका विस्तृत विवरण प्राप्त करने का प्रयास जारी है। सुधी पाठक मीडिया के माध्यम से जानते रहते होंगे कि नहर पार के क्षेत्र में आए दिन टाउन एन्ड कंट्री प्लानिंग, एमसीएफ व ‘हूडा वाले बड़े पैमाने पर लोगों के मकानों को अवैध बता कर तोड़ते रहते हैं। लेकिन नागर पिता-पुत्र द्वारा कराए गए निर्माणों को छुआ तक नहीं जाता। तहसील में रजिस्ट्रियां व इंतकाल भी इन्हीं की मनमर्जी से रोके व कराए जाते हैं। इतना ही नहीं गुंडों द्वारा कब्जे कराने व छीनने का धंधा भी पुलिस के संरक्षण में कराया जाता है। इन गुंडों में नशाफरोशी का धंधा करने वाले भी शामिल बताए जाते हैं। ऐसे असामाजिक तत्वों को मंत्री का संरक्षण मिलने से पुलिस द्वारा पकड़े जाने का भय भी नहीं रहता। जो व्यक्ति इनके मुकाबले में खड़ा होने का प्रयास करता है उसके काम न केवल तहसील में रुकवा दिये जाते हैं बल्कि पुलिस द्वारा उस पर झूठे मुकदमे भी लदवा दिए जाते हैं। ऐसा ही एक मामला संजय चंदीला का सामने आया है। उन्होंने रूप नगर बेथनी नगर सेक्टर 82 भतौला में 50 गज़ का एक मकान सेवानिवृत्त पुलिस इंस्पेक्टर आशा रानी से कुछ महीने पहले खरीदा था। इसमें रिहाइश के अलावा उनका कुछ सामान भी रखा था। दिनांक 25-26 की मध्य रात्रि को जब सारा परिवार एक शादी में गया हुआ था तो नागरों ने सामान सहित किसी बबलू नामक व्यक्ति का पुलिस की मदद से कब्ज़ा करा दिया। अपनी इस आपराधिक हरकत को छिपाने के लिए इन लोगों ने चंदीला के घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ कर अपने कब्जे में कर लिए थे, जिसकी रिपोर्ट पुलिस में दिए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
इतना ही नहीं चंदीला पर दबाव बनाने के लिए नागरों ने उन पर करीब 18 झूठे मुकदमे थाना बीपीटीपी व अन्य थानों में दर्ज करा रखे हैं। मंत्री के दबाव में स्थानीय पुलिस इस तरह कठपुतली बनी हुई है कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद चंदीला परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की बजाय उनके विरुद्ध एक के बाद एक झूठे मुकदमे दर्ज करने में जुटी है। सुधी पाठक इस सारे विवरण से भली-भांति समझ गए होंगे कि चुनाव जीतने के लिए जो लोग करोड़ों रुपए खर्च करते हैं उनका उद्देश्य जनता की सेवा करना नहीं बल्कि लूट-मार एवं अवैध धंधे करके धन कमाना होता है।