फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एनआईटी दो टू व्हीलर मार्केट में दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण को खत्म करने के लिए नगर निगम द्वारा सड़क चौड़ीकरण का नाटक शुरू किया गया है। अधिकारियों के अनुसार जाम खत्म करने के उद्देश्य से सड़क की चौड़ाई 22 फीट से बढ़ाकर 45 फीट की जाएगी। वोट बैंक का नुकसान न हो इसलिए अदलखा के इशारे पर निगम अधिकारियों ने टू व्हीलर मार्केट वालों को दुकान के आगे सात फीट यानी नई सड़क के मुहाने तक बाइकें खड़ी करने का आश्वासन भी दिया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार एनआईटी एक दो चौक से लेकर एनआईटी दो ई ब्लॉक के मोड़ तक 22 फीट चौड़ी सड़क बनी हुई है। एक दशक पहले तक सड़क के एक ओर नाला और दूसरी ओर नाली बनी हुई थी। वर्ष 2019 में तत्कालीन विधायक सीमा त्रिखा ने बडख़ल विधानसभा क्षेत्र की सभी सड़कों के दोनों ओर इंटरलॉकिंग बिछाने का आदेश दिया था। करीब छह करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में एनएच दो की टू व्हीलर मार्केट की मुख्य सड़क के दोनों ओर इंटरलॉकिंग ईंटें बिछाई गईं थीं, इस दौरान नाला और नाली अतिक्रमण का शिकार होकर बंद हो गए। इंटरलॉकिंग फुटपाथ पर दो पहिया मार्केट वालों ने अतिक्रमण कर लिया और पंद्रह से बीस फीट तक घेर कर बाइक बाजार सजाया जाने लगा। नतीजा यह हुआ कि पैदल आने जाने वालों को भी सड़क पर ही चलना पड़ता। अतिक्रमण के कारण जाम की गंभीर समस्या होने लगी। हालात यह हो गए कि स्कूल बस जैसे बड़े वाहनों को निकलने के लिए जगह नहीं मिलती और दिन में कई घंटे जाम रहता था।
निगम अधिकारियों के अनुसार सड़क चौड़ीकरण का प्लान काफी पहले से चल रहा था, मौसम साफ होने के कारण काम शुरू किया गया है। उनके अनुसार 22 फीट चौड़ी सड़क के दोनों ओर 19-19 फीट जगह बाकी है। सड़क की चौड़ाई 45 फीट की जाएगी ताकि वाहन आराम से गुजर सकें। सड़क के दोनों ओर इंटरलॉकिंग ईंटों का साढ़े तीन फीट चौड़ा फुटपाथ बनाया जाएगा। एक दो चौक से लेकर दो ई पार्क तक सड़क चौड़ीकरण पर करीब 77 लाख रुपये खर्च होंगे। जानकार कहते हैं कि नगर निगम सिर्फ लूट कमाई के लिए सड़क चौड़ी करने का नाटक कर रहा है, बावजूद इसके समस्याएं ज्यों की त्यों बनी रहेंगी। सब जानते हैं कि बरसात में इस सड़क पर घंटों जलभराव रहता है यानी जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। सड़क तो बनाई जा रही है लेकिन जलनिकासी के लिए नाले नाली नहीं बनाए जा रहे हैं, यानी बरसाती पानी के निकलने की कोई व्यवस्था नहीं। निगम अधिकारियों के मुताबिक एनएच दो में सीवर लाइन पड़ी हुई है बरसात का पानी उसके जरिए ही निकल जाता है। मूर्खता की हद है, स्टॉर्म वाटर और सीवरेज का पानी एक ही नाली से बहाया जा रहा है, जबकि सरकार रेन वाटर हार्वेस्टिंग के ढिंढोरे पीटती रहती है।
स्थानीय नागरिक कहते हैं कि सड़क चौड़ी करने का यह अर्थ कतई नहीं है कि अतिक्रमण या कब्जे रुक जाएंगे। एनएच एक मार्केट की सड़क तो बहुत पहले 45 फीट चौड़ी की जा चुकी है लेकिन वहां से बड़े वाहन तो छोड़ो दो पहिया वाहन भी आराम से नहीं निकल पाते। दुकानदार सड़क पर पंद्रह से बीस फीट तक अतिक्रमण कर सामान लगाते हैं, इसके बाद हैंगर, डिस्प्ले, रेहड़ी आदि लगा कर रास्ता और तंग कर देते हैं। साठ फीट की सड़क चलने फिरने के लिए बमुश्किल दस-बारह फीट ही बचती है। सच्चाई सबको पता है कि यह मार्केट निगम के अधिकारियों की मोटी ऊपरी कमाई का बड़ा स्रोत है। सड़क तक दुकान लगाने के एवज में प्रत्येक दुकानदार प्रतिमाह अच्छी खासी रकम देता है, और निगम अधिकारी सारी समस्याओं से आंखें बंद कर लेते हैं। दिखावे के लिए दो चार महीने में अतिक्रमण विरोधी अभियान या चालान काटने का अभियान चलाया जाता है वह भी दुकानदारों को जानकारी देकर। फिक्स मैच की तरह दस पंद्रह चालान काटे जाते हैं या दो चार रेहडिय़ां तोड़ दी जाती हैं। इधर अभियान खत्म उधर दुकानें फिर से सड़क पर। जानकार कहते हैं कि अभियान केवल वसूली के दाम बढ़ाने के लिए चलाए जाते हैं, दुकानदार बढ़े हुए दाम देने को राजी हुए और अभियान बंद। यही हाल टू व्हीलर मार्केट का है, यहां तो अभियान चलाया ही नहीं जाता। निगम के जानकारों के अनुसार एनएच दो में अंतिम बार अप्रैल 2025 में चालान काटने का दिखावा किया गया था, बाइक मार्केट में एक दो दुकानदारों का चालान काटा गया और विरोध का बहाना बना कर रोक दिया गया। जानकारों के अनुसार विधायक अदलखा को दुकानदारों के विरोध में वोट बैंक खराब होने का डर दिख रहा है, इसलिए फिलहाल काम रुक गया है। देखना है कि नगर निगम जनहित को ध्यान में रख कर सड़क चौड़ी करता है या फिर विधायक का वोटबैंक बचाने के लिए जनता की जरूरत की बलि चढ़ा देता है।
पचास के दशक में बसाए गए इस शहर का नक्शा बहुत ही बढिय़ा वास्तुकारों द्वारा बनाया गया था, हार्डवेयर से बीके, बीके से नीलम, नीलम से बाटा और बाटा से हार्डवेयर की सड़कें दो सौ फीट से अधिक चौड़ी रखी गईं थीं। इसी तरह बीके से केसी सिनेमा, बरास्ता थाना एनआईटी होते हुए नीलम चौक तक वाली सड़क भी दो सौ फीट से अधिक चौड़ी रखी गई थी। बीतते समय के साथ साथ बेईमान नेताओं, भ्रष्ट अधिकारियों के सत्तारूढ़ होने से इन सड़कों पर इस तरह कब्जे करा दिए गए कि चौड़ाइयां घटती घटती आज इस स्थिति में आ गई हैं। भीतरी सड़कों की चौड़ाई भी साठ-साठ फीट से कम नहीं रखी गई थी जिन पर पैदल चलने वालों के लिए बाकायदा फुटपाथ भी बनाया गया था, जिसे अब दुकानदारों ने कब्जा लिया है। जाहिर है जब चलने के लिए बनी सड़कों पर कब्जे हो जाएंगे तो जाम लगेंगे, जाम में फंसे वाहन धुआं उगलेंगे, जिससे प्रदूषण बढ़ेगा, जिसे आज शहरी भुगत रहे हैं, अब देखना है कि निगम प्रशासन की सड़कों की चौड़ाई बहाल करने वाली यह कवायद वास्तविक है या मात्र नौटंकी।