फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) हरियाणा में भाजपा सरकार के आने से पहले राजा नाहर सिंह क्रिकेट स्टेडियम में अनेकों अंतराष्ट्रीय व रणजी ट्राफी मैच खेले जा चुके थे। इसी से समझा जा सकता है कि यह स्टेडियम कितनी बढिय़ा हालत में रहा होगा। इसके निर्माण कार्य में हरियाणा सरकार, क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड तथा स्थानीय उद्योगपतियों ने पर्याप्त धन खर्च किया था। इसके अलावा दिन-प्रति दिन की देख-भाल के लिए खेल विभाग तथा नगर निगम भी सदैव प्रयासरत रहता था। इन सबके प्रयासों के चलते इस स्टेडियम की शोभा सदैव देखने लायक बनी रहती थी।
वर्ष 2014 में भाजपा की खट्टर सरकार आने पर इस स्टेडियम के बुरे दिन शुरू हो गए। वैसे बुरे दिन तो वर्ष 2014 से पहले ही शुरू हो गए थे लेकिन इसका पूरा सत्यानाश करने का काम खट्टर सरकार ने शुरू किया। इसके लिए रणजीत बिल्डकॉम नामक एक गुजराती फर्म को बाकायदा ठेका दिया गया कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट स्टेडियम बनाया जाए। करीब 60 करोड़ के बजट के साथ एक वर्ष में काम पूरा करने का सौदा तय हुआ था। वर्षों बीत जाने तथा बजट 200 करोड़ के पार हो जाने के बावजूद स्टेडियम क्रिकेट तो क्या गुल्ली-डंडा खेलने लायक भी न रहा। इसे चारों ओर से इस तरह घेर कर चौकीदार नियुक्त कर दिए गए की कोई इसके भीतर झांक कर भी न देख सके।
सारा काम बिगाड़ कर व करोड़़ों रुपए डकार कर गुजराती फर्म तो चलती बनी। करीब दो-तीन वर्ष काम बंद रहने के बाद यह प्रोजेक्ट नगर निगम से लेकर वर्ष 2023 में एफएमडीए को सौंप दिया गया। बीते तीन वर्षों में इसने क्या घपले-घोटाले करके कितना बजट डकारा, इसकी जानकारी तो अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन अब यह प्रोजेक्ट नए सिरे से दोबारा शुरू किया जा रहा है। इसके लिए फिलहाल तो 90 करोड़ का बजट तथा एक वर्ष का समय रखा गया है। वास्तव में यह बजट और समय कितनी बार बढेगा, आने वाला समय ही बता पाएगा। समझने वाली बात यह है कि मकसद स्टेडियम बनाना नहीं बल्कि इसके नाम पर जनता के धन को डकारना है और जनता जब तक सचेत नहीं होगी, राजनेता यूं ही कर दाता के खून-पसीने की कमाई को चूसते रहेंगे।