बल्लबगढ़ (मज़दूर मोर्चा) सोमवार दिनांक 18 अगस्त प्रात: तीन बजे दिल्ली से पलवल की ओर जा रही एक पिकअप में बैठे 20 वर्षीय मुस्तफा की उस वक्त मौत हो गई जब उसके सामने चल रहे सरियों से लदे ट्रैक्टर ने एकदम ब्रेक लगा दिया और सरिया उसकी छाती में घुस गया। वारदात सीकरी पुलिस चौकी के निकट हुई थी। पुलिस के पहुंचने से पहले ड्राइवर ट्रैक्टर छोड़ कर भाग गया था। पुलिस की मौजूदा कार्यशैली के अनुसार ट्रैक्टर चालक को ही दोषी बनाया गया है। लेकिन मजे की बात यह है कि ट्रैक्टर मालिक कौन है, ड्राइवर कौन है, ट्रैक्टर नम्बर क्या है तथा यह कौन से गांव का है अभी तक पुलिस को कोई खबर नहीं है। 21 तारीख को पूछे जाने पर थाना प्रभारी सेक्टर 55 ने बताया कि तलाश जारी है।
सर्वविदित है कि कोई भी अवैध वाहन सड़क पर नहीं चल सकता। यानी कि सड़क पर चलने के लिए प्रत्येक वाहन के लिए यह जरूरी है कि उसका पंजीकरण हो, उसकी नम्बर प्लेट लगी हो उसका बीमा हुआ हो यदि कॉमर्शियल है तो रूट परमिट होना चाहिए तथा ड्राइवर के पास ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए। इन सब बातों के अलावा वाहन हर प्रकार से सड़क पर चलने के लायक होना चाहिए। इसके लिए बाकायदा सरकार द्वारा फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। मौजूदा मामले में उक्त ट्रैक्टर किसी भी नियम का पालन न करते हुए पूर्णतया अवैध रूप से न केवल राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहा था बल्कि भयंकर ढंग से सरियों आदि से लदे ट्राले को खींच रहा था। उसके इस अवैध कुकृत्य से एक युवक की मौत हो गई।
सड़क पर चलने वाले वाहनों के लिए सरकार ने जो नियम बनाए हैं वह जनता की सुरक्षा के लिए हैं। इन्हें लागू करने का सबसे बड़ा दायित्व पुलिस महकमे को दिया गया है। इसे निभाने के लिए पुलिस के पास अधिकारों की कोई कमी नहीं है। परन्तु पुलिस अपने इन अधिकारों का प्रयोग वाहनों को अनुशासित करने की बजाय वसूली के लिए अधिक करती है। इसके परिणास्वरूप न केवल शहर में बल्कि आसपास के क्षेत्रों और राजमार्ग सहित तमाम सड़कों पर अवैध वाहन बेखौफ विचरते रहते हैं। अकेले फरीदाबाद शहर में ही 2000 से अधिक ट्रैक्टर ट्राले विभिन्न प्रकार का लोहा आदि ढो रहे हैं, पानी के टैंकर, ईंटों की ट्राली आदि खींच रहे हैं। इनमें से शायद ही किसी के पास वैध कॉमर्शियल परमिट हो। इन सबका परमिट तो हर चौक पर खड़ा ट्रैफिक पुलिसकर्मी ही होता है।
यदि पुलिस ने अपना दायित्व ईमानदारी से निभाया होता तो उक्त दुर्घटना करने वाला अवैध ट्रैक्टर सड़क पर नहीं आ सकता था। यह पुलिस का भ्रष्टाचार ही है जिसके चलते वह राष्ट्रीय राजमार्ग पर मानो यह कहता हुआ दनदना रहा था कि जिस किसी को बचना हो तो बच लेना, उसकी कोई जिम्मेवारी नहीं है। जैसे कि हालात नजर आ रहे हैं इस ट्रैक्टर का कोई ओर-छोर मिलने वाला नहीं है। यदि मिल भी गया तो उसका कुछ बिगडऩे वाला नहीं है। मरने वाला तो जान से गया और उसे कोई मुआवजा भी मिलने की कोई सम्भावना नहीं है। पुलिस के इस भ्रष्टाचार ने मृतक मुस्तफा के न केवल स्वच्छंद विचरण के बल्कि जीवन के अधिकार का भी हनन किया है।