पुलिस का नाम जुबां पर आते ही मानस पटल पर एक नकारात्मक छवि उभर आती है, पर कभी-कभी इस खाकी वर्दी मे छुपा मानवीय चेहरा भी समाज के सामने आ जाता है। उज्जैन के महाकाल थाने के इंस्पेक्टर अजय वर्मा की खाकी वर्दी के नीचे छुपे संवेदनशील हृदय की जितनी तारीफ़ की जाए कम है।
मानवता को शर्मशार करने वाले उज्जैन हैवानियत कांड के विवेचक अजय वर्मा ने एक बड़ा फैसला लिया है। अजय ने हैवानियत की शिकार बच्ची को गोद लेने का फैसला लिया हैं। उन्होंने बच्ची की पढ़ाई-लिखाई समेत उसकी पूरी जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया है। बतौर अजय इलाज के दौरान मासूम की चीखों ने उन्हे झकझोर कर रख दिया और उनकी आंखें भर आईं। अजय आपके निर्णय और आपकी भावनाओं और जज़्बे को सलाम !