पलवल (मज़दूर मोर्चा) विधानसभा चुनाव हार चुके पूर्व मंत्री करण दलाल ने प्रेसवार्ता बुला कर अपनी हार के लिये प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में बताया कि मतदान के उपरांत जिस कमरे में ईवीएम मशीनें रखी गई थीं वहां के सीसीटीवी कैमरे रात को 2 बजकर 58 मिनट से लेकर 3 बजकर 36 मिनट तक बंद रहे। इसकी शिकायत एसडीएम से की गई तो उन्होंने स्वीकार करते हुए कहा कि तकनीकी खरीबी हो गई थी। यही शिकायत उन्होंने चुनाव आयोग तथा उसके पर्यवेक्षक को भी कर दी थी।
यद्यपि करण दलाल ने यह नहीं बताया कि उन्हें यह सारी सूचना कितने बजे प्राप्त हुई और उन्होंने कितने बजे इसकी शिकायतें सम्बन्धित अधिकारियों को की? उनके मुताबिक इसी धांधली के चलते ईवीएम मशीनों में हेराफेरी करके उन्हें जबरदस्ती अवैध रूप से हराया गया है। इसके लिए उन्होंने एसपी चन्द्रमोहन तथा डीसी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की है।
सवाल उठता है कि क्या करण दलाल को यह मालूम नहीं कि चुनाव आयोग का गठन मोदी ने अपनी पार्टी को जिताने के लिये मनमाने ढंग से किया है। इस आयोग का परम कत्र्तव्य किसी भी तरह से मोदी की भाजपा को जिताना है। उसी के आदेशानुसार राज्य के तमाम अधिकारी कार्य करने को पाबंद हैं। ऐसे में बखूबी समझा जा सकता है कि किसी भी स्तर पर जो कोई भी तकनीकी खराबी होती है वह उन्हीं अफसरों द्वारा कराई जाती है जिनके आगे अब करण दलाल गिड़गिड़ा रहे हैं। बीते कई वर्षो से सारा देश यह देख व समझ रहा है कि मोदी गिरोह सत्ता को आसानी से छोडऩे वाला नहीें है। वह इसके लिए हर तरह के, ओछे से ओछे हथकंडे अपनाने से गुरेज नहीं करेगा। यह सब जानते हुए भी करण दलाल व उनकी कांग्रेस पार्टी ने इनसे निपटने के लिए कोई प्रबन्ध नहीं किए।
इमरजेंसी के बाद 1977 में जब चुनाव हुए थे तो कोई सीसीटीवी कैमरे नहीं हुआ करते थे। मतदान पेटियों को रखने वाले कमरे के बाहर, सत्ता से लड़ रहे जुझारू कार्यकर्ताओं की इतनी जबरदस्त घेराबंदी रहती थी कि परिंदा तक पर नहीं मार सकता था। ऐसी ही चौकसी मतगनणा के समय भी रहती थी। इसके विपरीत न केवल करण दलाल ने बल्कि अधिकांश कांग्रेसी उम्मीदवारों ने किसी प्रकार की कोई चौकसी बरतने की कोई जरूरत नहीं समझी। यहां तक कि मतदाता सूची से लेकर मतदान व मतगनणा होने तक जो सावधानियां बरती जानी चाहिए थीं, उनकी घोर अवहेलना हुई। चुनाव एजेंटों ने भी फार्म ए,बी,सी 17 तक को सही ढंग से भरने की जरूरत को नहीं समझा। दरअसल करण दलाल सहित पूरी कांग्रेस पार्टी सम्भावित जीत के नशे में चूर होकर सत्ता का उपभोग करने के मंसूबों में व्यस्त रहे। कांग्रेस पार्टी को यह भी विश्वास था कि 10 साल से भाजपा सरकार द्वारा प्रताडि़त एवं शोषित जनता इस बार उसे उखाड़ फेंकेगी और इसके स्वाभाविक विकल्प के रूप में जनता कांग्रेस को सत्तारूढ़ कर देगी। ऐसे में कांग्रेस वालों को कोई विशेष प्रयास करने की जरूरत नहीं।