नई दिल्ली (मज़दूर मोर्चा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए नारे, ”बेटी बचाओ -बेटी पटाओ को चरितार्थ करते हुए कैसरगंज (गोंडा) के भाजपाई सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भारतीय कुश्ती संघ का अध्यक्ष होने का पूरा लाभ उठाते हुए कई वर्षों तक महिला पहलवानों का जम कर यौन शोषण किया। अपने इस घिनौने लक्ष्य की पूर्ति के लिए वह महिलाओं का कुश्ती प्रशिक्षण कैम्प अपने गोंडा क्षेत्र में ही लगवाता था। इतना ही नहीं जब पहलवान अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए विदेशों में जाती थीं तो वहां भी यह राक्षस उनको नहीं छोड़ता था।
जब पानी सिर से ऊपर जाने लगा तो महिला पहलवानों ने, पहले तो मोदी जी को इस मामले से अवगत करा कर राहत पाने की कोशिश की, जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो महिला पहलवानों ने जंतर-मंतर पर बाकायदा धरना प्रदर्शन किया। वे चाहती थीं कि इस राक्षस से कुश्ती संघ को निजात मिल जाए। लेकिन जब कोई असर नहीं हुआ तब मजबूरन इन महिला पहलवानों को पुलिस में एफआईआर दर्ज करानी पड़ी। बेशर्मी की इन्तहा तो तब हो गई जब ए$फआईआर दर्ज कराने के लिए महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने भी बड़ा भारी अहसान जताते हुए एफआईआर तो दर्ज करा दी लेकिन उसे दर्ज न करने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की और न ही इसे दर्ज करने के बाद कोई कार्रवाई करने के आदेश दिए।
इन हालात में मोदी की पुलिस तथा न्यायपालिका ने न तो कुछ करना था और न ही कुछ किया। सबसे बड़ा गजब तो पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किए गए उस मामले में हुआ जो कि एक नाबालिग पहलवान लड़की द्वारा दर्ज कराया गया था। इस एक्ट के तहत पहली सूचना मिलने पर ही पुलिस अधिकारी को तुरन्त केस दर्ज करना चाहिए। इसके बावजूद दिल्ली पुलिस के तमाम अधिकारियों ने एक्ट की अवहेलना करते हुए केस दर्ज नहीं किया। यह तभी दर्ज हो सका जब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। एक्ट के मुताबिक सूचना मिलते ही दोषी को तुरन्त गिरफ्तार कर लिया जाना चाहिए ताकि वह पीडि़ता एवं उसके परिवार पर किसी प्रकार का दबाव न डाल सके।
अब मामला चूकि भाजपाई सांसद एवं मोदी के खास चहेते चेले के विरुद्ध था इसलिए दोषी को गिरफ्तार नहीं किया गया। इसके चलते उसे खुला मौका मिला पीडि़त पक्ष को डराने-धमकाने का। अपराधी सांसद के पालतू लगुए-भगुए लगातार पीडि़त पक्ष के घर पहुंचने लगे। इन लोगों ने पीडि़ता के परिवार को खूब अच्छी तरह समझने के लिए मजबूर कर दिया कि जिस सांसद को महीनों तक गिरफ्तार नहीं किया गया और न ही गिरफ्तार होने की कोई सम्भावना है, ऐसे अपराधी से टक्कर लेने का कोई $फायदा नहीं। इसके अलावा हरियाणा की खट्टर सरकार की ओर से भी हर तरह का दबाव पीडि़त पक्ष पर डलवाया गया।
जाहिर है इतना दबाव सह पाना किसी साधारण किसान परिवार के लिए सम्भव नहीं हो सकता। ऐसे में पीडि़त पक्ष को वे सब बयान पुलिस को देने पड़े जो बृजभूषण सिंह को अदालत से राहत पाने के लिए चाहिए थे। जाहिर है कि इस तरह के निर्णय से उसके हौसले और भी बुलंद होंगे और वह मोदी के दिए हुए उक्त नारे ‘बेटी बचाओ-बेटी पटाओ पर खुल कर अमल करता रहेगा।