फ्लैट गरीबों के, कमाई कर रहे प्रॉपर्टी डीलर

फ्लैट गरीबों के, कमाई कर रहे प्रॉपर्टी डीलर
April 30 15:34 2025

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों के लिए वर्ष 2013 में सेक्टर 84 में आवंटित हुए 907 फ़्लैटों का कब्जा आज तक लाभार्थियों को नहीं मिल पाया है। हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों के निकम्मेपन से परेशान गरीबों ने तो फ्लैट मिलने की आस ही छोड़ दी है। इसका फायदा भूमाफिया और प्रॉपर्टी डीलर उठा रहे हैं। एक एक फ्लैट की फाइल साढ़े चार लाख से छह लाख रुपये प्रीमियम पर प्रॉपर्टी डीलर श्योरशॉट कब्जा दिलाने की बात कह बेच रहे हैं।

भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार हाउसिंग बोर्ड द्वारा वर्ष 2013 में सेक्टर 84 और 2014 में सेक्टर 70 में हाउसिंग बोर्ड के तहत बीपीएल परिवारों के लिए फ्लैट निकाले गए थे। सेक्टर 84 में 907 और सेक्टर 70 में करीब एक हजार फ्लैट दिए जाने थे। तब लॉटरी सिस्टम से 907 फ्लैटों का आवंटन हो गया था और लाभार्थियों से प्रथम किस्त के 80 हजार रुपये भी जमा करवा लिए गए थे। सूत्रों के अनुसार उस समय ही प्रॉपर्टी डीलर, भूमाफिया और हाउसिंग बोर्ड अधिकारियों ने मिलीभगत कर आवंटन में खेल कर दिया था। अधिकतर आवेदन ऐसे बीपीएल परिवार वालों से करवाया गया जिनमें अधिकतर हरियाणा के डोमिसाइल ही नहीं थे, कई ऐसे भी थे जो रहने वाले तो हरियाणा के थे लेकिन फरीदाबाद के स्थायी बाशिंदे नहीं थे, पहली किस्त भी इन गरीबों के नाम पर भूमाफिया, प्रॉपर्टी डीलरों ने ही जमा करवाई थी। इसके बाद फ्लैटों का कब्जा जानबूझ कर टाला जाता रहा ताकि बाकी गरीब लाभार्थी भी निराश होकर प्रॉपर्टी डीलरों से दस बीस हजार रुपये अधिक लेकर आवंटन की फाइल उन्हें थमा दें।

तब से सेक्टर 84 और उसके आसपास सक्रिय प्रॉपर्टी डीलर इन फाइलों को मोटे प्रीमियम पर बेच कर लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं। ऐसे ही प्रॉपर्टी डीलर के चुंगल में फंस कर साढ़े चार लाख रुपये प्रति फ्लैट की दर से प्रीमियम देकर बल्लबगढ़ निवासी मनोज कुमार ने दो फाइलें ले लीं। पैसा गंवाने के बाद उन्हें पता चला कि हाल फिलहाल तो फ्लैटों का कब्जा दिए जाने का हाउसिंग बोर्ड में कोई कार्यक्रम नहीं है। हाउसिंग बोर्ड में उन्हें यह भी बताया गया कि फाइल भले ही उनके पास है लेकिन चाबी और कब्जा उसी लाभार्थी को दिए जाएंगे जिसके नाम लॉटरी खुली थी।

यह फ्लैट पांच साल तक लाभार्थी के नाम ही रहेगा, उसके बाद ही इसका ट्रांसफर किसी दूसरे के नाम किया जा सकता है। उन्होंने आवंटन की फाइलें होने का हवाला दिया तो बताया गया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि वह मालिक हो गए। यह भी बताया गया कि फिलहाल तो कब्जा दिए जाने की कोई योजना नहीं है क्योंकि बीते दस साल में कई लाभार्थी गरीबी रेखा से ऊपर आ चुके हैं, कई लाभार्थियों की मृत्यु हो चुकी है और बहुत से शहर छोड़ कर जा चुके हैं। ऐसे में बहुत संभव है कि पहले आवंटियों का दोबारा सत्यापन किया जाए।

उन्हें यह भी बताया गया कि फ्लैटों का कब्जा लॉटरी पद्धति से निकाला जाएगा, भविष्य में कभी लॉटरी निकाली गई तो वो भी पूरे 907 की नहीं बल्कि 570 की ही निकाली जाएगी। जरूरी नहीं कि उनकी फाइल इस लॉटरी में आ जाए और अगर आ भी गई तो उन्हें न तो चाबी दी जाएगी न ही कब्जा। उन्होंने प्रॉपर्टी डीलर से बात की तो उसने फाइल वापस करने को कहा। शर्त यह लगाई कि प्रीमियम राशि में से कमीशन काट कर लौटाएगा, कारण बताया कि फाइल पास कराने के लिए हाउसिंग बोर्ड में पैसा देना पड़ता है।

मनोज कुमार ने छानबीन की तो पता चला कि ये प्रॉपर्टी डीलर नकली फाइलें बनाकर लोगों से प्रीमियम लूटने का भी धंधा कर रहे हैं। मनोज कुमार के अनुसार इलाके में सक्रिय एक दर्जन से अधिक प्रॉपर्टी डीलर इसी तरह लोगों का फंसा कर लूट कमाई करने में लगे हुए हैं, इस खेल में हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों की भी मिलीभगत है। फाइल खरीदने वाले यदि हाउसिंग बोर्ड से जानकारी हासिल करना चाहें तो प्रॉपर्टी डीलरों के दलाल ये अधिकारी सौदे में होने वाली तकनीकी दिक्कतें नहीं बताते और ग्राहक फंसकर अपना धन गंवा बैठता है। मनोज कुमार हाउसिंग बोर्ड अधिकारियों और प्रॉपर्टी डीलर की मिलीभगत से हो रही इस लूटमार की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे। दरअसल सरकार का उद्देश्य गरीब लोगों को घर देना नहीं है केवल उनके नाम पर ड्रामेबाजी करना है यह बात मौजूदा इस ड्रामे से साबित हो रही है जब बारह साल में भी कब्जा नहीं दिया गया तो सरकार का उद्देश्य स्पष्ट हो जाता है।

दूसरी बात यह है कि जब छोटे घरों की इतनी ज्यादा मांग है, तो मांग के अनुसार ज्यादा से ज्यादा घर बनाए ताकि फ्लैटों की कालाबाजारी ही न हो। लेकिन शासक वर्ग ऐसा कर दे तो ये लूट कमाई कैसे कर पाएंगे हाउसिंग बोर्ड द्वारा अथवा अन्य निर्माण एजेंसियों द्वारा जिस तरह का घटिया निर्माण होता है यह किसी से छिपा नहीं है लेकिन यह लोगों की मजबूरी है कि वे घटिया जानकर भी इन्हें पा लेना गनीमत समझते हैं।

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Mazdoor Morcha
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