बल्लबगढ़ (मज़दूर मोर्चा) सदाचार और अनुशासन का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा के तीसरे इंजन की सरकार बनते ही बोगियांं यानी पार्षद लूट कमाई में लग गए हैं। दरअसल, लाखों रुपये खर्च करके पार्षद बनने का उद्देश्य ही लूट कमाई करना होता है न कि जनहित में कुछ करना। भाजपा पार्षद गायत्री देवी के बाद अब वार्ड 41 के पार्षद महेश गोयल चर्चा में हैं। फिलहाल उन्होंने विकास कार्यों में कमीशन तो नहीं मांगा है लेकिन उनकी शह पर अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। जाहिर है कि कोई बिना मोटा चढ़ावा लिए तो अवैध निर्माण के लिए अपने रसूख का इस्तेमाल करने देने से रहा। अब पार्षद महोदय की देखरेख में अवैध निर्माण कराया जा रहा है तो फिर नगर निगम के परवेज आलम जैसे कमाऊ पूत भी अपना और आला अधिकारियों का चढ़ावा लेकर काम होने दे रहे हैं।
बल्लभगढ़ सौ फीट रोड स्थित इंडियन बैंक के सामने सजंय बैट्री वाली मार्केट में ऊपर अवैध रूप से दुकानें बनाई जा रही हैं। बिना नक्शा और दस्तावेज के बनाई जा रही इन दुकानों को नगर निगम एक बार पहले भी तोड़ चुका है। चर्चा है कि इन दुकानों के बनने से मालिक को करोड़ों रुपये का फायदा होता, लेकिन उसकी गलती यह थी कि उसने सत्तापक्ष के नेताओं की चरणवंदना नहीं की थी न ही चढ़ावा चढ़ाया। नतीजा यह हुआ कि नगर निगम ने तोड़ फोड़ कर डाली। उसकी समझ में आ गया कि जीरो टॉलरेंस और सदाचार को ढिंढोरा पीटने वालों का साथ लेकर ही अपना विकास किया जा सकता है। उसको कुछ लोगों ने विधायक मूलचंद का दामन थामने की सलाह दी लेकिन शुभचिंतकों ने बताया कि अपनी करतूतों के कारण मूलचंद की साख इतनी खराब हो चुकी है कि उनसे मंत्री पद तक छीन लिया गया है, किसी दूसरे शक्ति केंद्र को तलाशो। इस बीच नगर निगम चुनाव की घोषणा हो गई। यह खुला हुआ सच है कि स्थानीय निकाय चुनाव हमेशा सत्ता पक्ष की पार्टी के ही होते हैं और जब चुनाव आयोग भी सत्ता के चरणों में पड़ा हो तो फिर पार्टी के टिकट पर कोई भी खड़ा हो उसकी जीत पक्की ही होनी है।
वार्ड 41 से महेश गोयल को भाजपा का टिकट मिला तो मौके का फायदा उठाते हुए मालिक उनकी शरण में जा पहुंचा। अपने पुराने संबंधों की दुहाई दी और चुनाव जितवाने के लिए तन-मन-धन से जुटने का संकल्प लिया। चुनाव जीतने पर बदले में मार्केट की दुकानें बनवाने का अभयदान मांगा। महेश गोयल को अपनी जीत का भरोसा तो था ही बेशकीमती मार्केट में हिस्सापत्ती की गुंजाइश भी नजर आई। बस फिर क्या था उन्होंने इस मार्केट में अपना चुनाव कार्यालय खोल दिया। अब सत्ता पक्ष के प्रत्याशी का चुनाव दफ्तर हो तो फिर क्या नगर निगम और क्या प्रशासन, कभी अवैध होने के कारण जो मार्केट तोड़ दी गई थी, अब सभी उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने लगे। जानकारों के अनुसार महेश गोयल ने चुनाव जीतने के बाद जोर शोर से मार्केट का निर्माण कराने का अभयदान दिया था। इसके एवज में मालिक ने चुनाव में तो जमकर खर्च किया ही नजराना भी खूब पेश किया।
वादे के मुताबिक चुनाव जीतने के बाद महेश गोयल ने मालिक को निर्माण कार्य शुरू कराने को कहा। पार्षद का साथ मिला तो नगर निगम के जेई परवेज आलम को भी साधा गया ताकि अवैध निर्माण में कोई आंच न आए। मुजेसर गांव में चार लाख रुपये लेकर लाला जी की अवैध इमारत बनवाने का ठेका लेने वाले जेई परवेज आलम ने ज्वाइंट कमिश्नर और निगमायुक्त मैडम तक को खुश करने के रेट बता दिए। इस अवैध निर्माण के लिए कितना चढ़ावा देना तय हुआ है इसकी जानकारी की जा रही है, सूत्र बता रहे हैं कि पार्षद महोदय का केस होने के कारण रियायती दर पर सौदा तय हुआ है, लेकिन मैडम के हिस्से में कटौती नहीं की जाएगी। परवेज आलम और ज्वाइंट कमिश्नर से हरी झंडी मिलने के बाद अब अवैध निर्माण पूरी गति से जारी है। पार्षद महेश गोयल द्वारा अवैध निर्माण कराए जाने को अचरज से नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि यहां तो पूरे भाजपा रूपी कुएं में भांग घुली हुई है। मंत्री कृष्णपाल गूजर हों या राजेश नागर सत्ता के बल पर कीमती जमीनों को औने पौने दाम पर खरीदने का इनका काला धंधा जारी है।
पूर्व मंत्री सीमा त्रिखा का कथन कि तीन प्लॉटों पर कब्जा करना दो तुम्हारे-एक मेरा, तो भाजपाइयों में ही नहीं पूरे भू माफिया समाज में आज भी याद किया जाता है। हूडा की जमीनों और रिज्यूम प्लॉटों की दलाली करने वाला अदलखा भी विधायक बन कर अपने काम सिद्ध करने में लगा हुआ है। समझा जा सकता है कि जब डबल इंजन की दोनों ही सरकारें भ्रष्टाचार में लिप्त हों तो फिर निचली पावदान पर आने वाले तीसरे इंजन की बोगियों यानी पार्षदों को भ्रष्टाचार करने से कौन रोक सकता है। अंध भक्त जनता भी रोज खुद को लुटते पिटते देख रही है लेकिन वह केवल इस बात से खुश है कि सरकार भले ही नौकरियां नहीं दे रही है लेकिन अब्दुल की चूड़ी तो टाइट कर रही है।