निगम में भ्रष्टाचार : सोडियम लाइटें तो दस साल पहले ही हटा दी गई थीं अब कौन सी बदली जाएंगी

निगम में भ्रष्टाचार : सोडियम लाइटें तो दस साल पहले ही हटा दी गई थीं अब कौन सी बदली जाएंगी
September 30 23:20 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम को भ्रष्टाचार और लूट कमाई का अड्डा समझने वाले हरामखोर अधिकारी अब लूट कमाई के लिए सोडियम लाइटों को हटा कर एलईडी लाइटें लगाने का खेल खेलने जा रहे हैं। इसी नगर निगम ने वर्ष 2016 में पूरे शहर की सोडियम लाइटें हटा कर उनकी जगह एलईडी लाइट लगा दी थीं। सवाल ये है कि दस साल बाद ये सोडियम लाइटें कहां से आ गईं जिन्हें अब फिर से हटाने का दावा किया जा रहा है? या तो दस साल पहले सोडियम लाइटें कागजों में बदली गई थीं या अब कागजों पर बदल कर मोटी रकम का बंदरबांट किया जाएगा।

नगर निगम के कार्यकारी अभियंता सुशील ठाकरान के अनुसार ओल्ड फरीदाबाद जोन में खराब हो चुकी 500 सोडियम लाइटें बदली जानी हैं। एनआईटी और बल्लभगढ़ जोन में भी सोडियम लाइटें बदली जा रही हैं। सुधी पाठकों को बता दें कि सरकार द्वारा 2014 में ही बिजली खपत घटाने के उद्देश्य से सोडियम लाइटों की जगह एलईडी लाइटें लगवाने की योजना तैयार की थी। इसके तहत ही तत्कालीन नगर निगमायुक्त विकास यादव ने शहर की सारी सोडियम लाइटें बदले जाने का प्रोजेक्ट तैयार कर सरकार को भेजा था। प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद सभी वार्डों में सोडियम लाइटें हटा कर 120 वाट की एलईडी लाइटें लगाई गई थीं। उस समय एक एक एलईडी लाइट सात हज़ार रुपये में लगाए जाने को लेकर पर पार्षदों ने निगम सदन में बवाल भी किया था। कई पार्षदों ने तो ब्रांडेड के दाम पर नकली एलईडी लाइटें लगाए जाने का आरोप भी लगाया था। तब पार्षद धनेश अदलखा पर एक ठेकेदार को एलईडी लाइटों ऑर्डर दिलवाने, और उस ठेकेदार द्वारा सरूरपुर स्थित अपनी फैक्ट्री में चाइनीज एलईडी लाइटों पर कंपनी का लेबल लगाकर निगम को सप्लाई करने का आरोप लगा था।

इन एलईडी लाइटों के रखरखाव और मरम्मत का जिम्मा भी ठेकेदार का था लेकिन अदलखा के दबाव में निगम के हरामखोर अधिकारियों ने यह शर्त जोड़ दी कि यदि कोई एलईडी लाइट खराब होती है तो निगम उसे उतार कर ठेकेदार को देगा, मरम्मत के बाद निगम ही लाइट लगाएगा। निगम सूत्रों के अनुसार वर्ष 2016 तक सभी वार्डों से सोडियम लाइटें हटाई जा चुकी थीं, अब ये कागजों पर हटी थीं या सच में यह नहीं बताया जा सकता। पूर्व निगमायुक्त एम शाईन ने भी एलईडी में भ्रष्टाचार बताया था लेकिन भाजपाइयों ने जांच नहीं होने दी थी।

निगम के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में चालीस वार्डों में 40 हजार एलईडी लाइटें लगाई जा चुकी हैं। बीते वर्ष परिसीमन के बाद तिगांव क्षेत्र के जो 24 गांव नगर निगम में शामिल किए गए थे, उनमें भी नवंबर 2023 तक 42 सौ एलईडी लाइटें लगाई जा चुकी थीं। तब तत्कालीन कार्यकारी अभियंता ओमबीर ने दावा किया था कि पूरे शहर को सोडियम लाइट मुक्त कर दिया गया है।

सवाल यह उठता है कि जब नवंबर 2023 में ही सारा शहर एलईडी युक्त हो गया था तो ये 500 सोडियम लाइटें कहां से आ गईं जिन्हें एक्सईएन सुशील ठाकरान बदलवा रहा है। ज़ाहिर है कि या तो सोडियम लाइटें बदलने के नाम पर पहले भ्रष्टाचार हुआ है या अब सुशील ठाकरान करने जा रहा है। यदि एक एलईडी लाइट की कीमत 2016 वाली यानी 7 हजार रुपये भी मान ली जाए तो 500 एलईडी लाइटें बदलवाने में 35 लाख रुपयों की बंदरबांट होगी। यदि तीनों जोन में 500-500 सोडियम लाइटें बदलने जाने का खेल किया गया तो एक करोड़ पांच लाख रुपये की बंदरबांट हुई है।

भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए भेजी गईं आईएएस मोना ए श्रीनिवास भी लगता है कि निगम के भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा फेके गए कमीशन के टुकड़े को स्वीकार कर हरामखोरी के खेल में साझेदारी करने लगी हैं। अन्यथा सोडियम लाइटें बदले जाने के प्रोजेक्ट पर उन्हेंं खुद ही प्रश्नचिह्न लगा देना चाहिए था कि 2014 से आज तक ये सोडियम लाइटें बदली क्यों नहीं गईं थी, इनको न बदलने का कौन जिम्मेदार है, यदि कागजों पर बदली गई थी तो जांच करा दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करतीं। दरअसल ये सारी कवायद वो करता है जो ठीक ढंग से काम करना चाहे, जब बैठे बिठाए लाखों रुपये मुफ्त में झोली में आ रहे हों तो फिर आंख बंद कर किसी भी योजना को मंजूरी देने में ही फायदा होता है, रही जनता की बात तो जब तक वह जागरूक होकर सरकार और प्रशासन से सवाल नहीं करेगी इसी तरह उसकी गाढ़ी कमाई हरामखोर अधिकारी लूट बांट कर खाते रहेंगे।

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Mazdoor Morcha
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