फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नशा तस्करी के खिलाफ बीती 18 जुलाई को फरीदाबाद पुलिस ने महा अभियान चलाया। नेहरू कॉलोनी में डेढ़ सौ हथियारबंद सीआई कर्मियों की तीन घंटे की गहन छानबीन के बावजूद पुलिस के हाथ एक भी नशा तस्कर नहीं लगा। अभियान फ्लॉप होने की किरकरी से बचने के लिए आखिर में पुलिस ने साढ़े चार ग्राम कथित कोकीन बरामदगी दिखाई। सवाल यह है कि यह महा अभियान फ्लॉप क्यों हुआ जिस नेहरू कॉलोनी में नशा तस्करी को लेकर विधायक धनेश अदलखा बार बार चिंता जताता नजर आ रहा था। एसीपी क्राइम अमन यादव इस कॉलोनी को नशा तस्करों का गढ़ बता रहे थे। बताया जा रहा है कि पुलिस ने तो बाकायदा डेढ़ दर्जन से अधिक नशा तस्करोंं की खुफिया तौर पर पहचान भी कर ली थी बावजूद इसके इतने बड़े लाव लश्कर को सिर्फ साढ़े चार ग्राम नशीला पदार्थ मिला यह बताता है कि यह महा अभियान केवल नाटक था।
यदि नाटक नहीं होता तो इसके फ्लॉप होने के कारणों का पता क्यों नहीं लगाया गया। अगर अभियान के तरीके पर गौर करें तो काफी कुछ साफ हो जाएगा। किसी भी अभियान की सफलता कार्रवाई होने तक उसके गुप्त रहने पर निर्भर है। नेहरू कॉलोनी का कथित महाअभियान कितना गुप्त था इससे समझा जा सकता है कि सीआईए टीमों के साथ ही सोशल मीडिया के न्यूज चैनल वाले भी पहुंचे हुए थे मानो वे भी अभियान में पुलिस के साथ हों।
जानकार कहते हैं कि कुछ मिलना नहीं था क्योंकि तस्करों को कुछ देर पहले नहीं बल्कि करीब 20 घंटे पहले ही बता दिया गया था कि कल छापा पड़ेगा। सफलता सुनिश्चित करने के लिए अमूमन पुलिस तड़के या देर रात छापा मारती है लेकिन तस्कर अपना माल हटा सकें और खुद भी दायें-बांये हो लें इसलिए अभियान रात में नहीं बल्कि भरी दोपहर मेंं चलाया गया। तीन घंटे गहन छानबीन की नौटंकी हुई, सबने ड्यूटी निभाई और खाली हाथ लौट गए। मैच फिक्सिंग की तर्ज पर पुलिस के रजिस्टर में अभियान दर्ज कर लिया गया और डेढ़-पौने दो सौ पुलिस कर्मियों की दिहाड़ी बर्बाद कर दी गई। अभियान फ्लॉप होने का कारण खुद पुलिस महकमे में बैठे हिस्सापत्ती के भूखे पुलिस अधिकारी हैं। यह सच किसी से छिपा नहीं है कि कोई भी अवैध कारोबार पुलिस की मिलीभगत से ही चल सकता है अन्यथा नहीं।
नशे का धंधा भी इसी तरह चलता है, भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो सीआईडी और मुखबिरों के जरिए पुलिस को हर नशा तस्कर, बेचने वाले स्थान, रेट आदि सबकी जानकारी होती है। किस थाना क्षेत्र में कितने नशा तस्कर हैं उनका धंधा कितना बड़ा है, कमाई कितनी है या सारी जानकारी बाकायदा रहती है। धंधा चलता रहे इसके लिए तस्कर भी ईमानदारी से साहब तक हिस्सापत्ती पहुंचाते हैं। माना जा रहा है कि तस्करों को बचाने के लिए विभाग में बैठे विभीषणों ने ही जानकारी लीक की। लीक होने की बात पुलिस पर न आए इसलिए सोशल मीडिया न्यूज चैनलों को भी दी गई। खैर बात तस्करों तक पहुंच गई और सब सुरक्षित हो गया।
विभागीय सूत्रों के अनुसार पुलिस तो ऐसा कोई अभियान चलाना ही नहीं चाहती, नशा तस्करों से इतनी अच्छी सेटिंग होती है कि जब ऊपर से दबाव आता है तो ये लोग अपने किसी आदमी को पकड़वा कर गुडवर्क भी करवा देते हैं। विधायक धनेश अदलखा नेहरू कॉलोनी में नशा तस्करों के विरुद्ध अभियान चलाने का दबाव डाल रहे हैं इसलिए सब करना पड़ रहा है। सूत्र बताते हैं कि दरअसल धनेश की नजर नेहरू कॉलोनी की पुनर्वास की जमीनों पर है, इसलिए उन्हें डराने के लिए पुलिस-प्रशासन का इस्तेमाल कर रहे हैं। मज़दूर मोर्चा इन बातों की पुष्टि नहीं करता लेकिन अभियान का फ्लॉप होना और विधायक धनेश अदलखा का बार बार नेहरू कॉलोनी के बारे में बयान देना, दाल में कुछ काला होने का इशारा है। रही बात अभियान की तो यदि ये गंभीर प्रयास था तो पुलिस आयुक्त महोदय को इसके फ्लॉप होने के कारण तलाशने चाहिए यदि किसी पुलिसकर्मी की मिलीभगत पाई जाए तो उसे ऐसी सजा दें जो दूसरे पुलिसकर्मियों के लिए नसीहत हो।