फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम के फर्जी डिग्री वाले इंजीनियर सीवर लाइन सफाई के नाम पर जो लूट मचाते थे वह शायद सीएम नायब सैनी के एतबार से काफी कम थी, इसीलिए उन्होंने यह काम अपनी सीधी देखरेख में चलने वाले एफएमडीए को सौंप दिया।
अब चूंकि सीएम का महकमा सीवर लाइनें साफ कराएगा तो लूट कमाई की रकम भी ज्यादा होनी चाहिए, इसलिए यहां सफाई के रेट नगर निगम से तीन गुना ज्यादा वसूले जा रहे हैं। जनता का क्या है जब नगर निगम सफाई करता था तब भी सीवर लाइनें चोक रहती थीं और अब एफएमडीए कर रहा है तब भी वही हाल है। शहर की सीवर लाइनों की सफाई का काम एफएमडीए ने नगर निगम लगभग एक साल पहले लिया था। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार उनके यहां सीवर लाइन साफ करने के लिए सुपर सकर मशीनें प्रतिदिन 15 हजार रुपये किराए पर लगाई जाती थीं। सीवर लाइन साफ करने के लिए बकेट मशीन को तीन सौ रुपये प्रति मीटर की दर से भुगतान किया जाता था।
सीएम नायब सैनी की सीधी देखरेख वाले एफएमडीए ने यह काम अपने हाथ में लिया और सुपर सकर मशीनों का किराया सीधे तीन गुना यानी 45 हजार रुपये प्रतिदिन की दर से तय कर दिया गया। यही नहीं बकेट मशीन का किराया भी 300 रुपये प्रति मीटर से बढ़ा कर 800 रुपये प्रति मीटर कर दिया गया। नगर निगम के कमीशनखोर अधिकारी उस रेट में भी हिस्सापत्ती लेते ही होंगे इससे इनकार नहीं किया जा सकता।
समझने वाली बात है कि एफएमडीए भी उसी काम के लिए तिगुने रेट दे रहा है यानी हिस्सापत्ती की रकम कहीं ज्यादा होनी चाहिए। रही बात सीवर लाइनों की सफाई की तो कहीं भी कोई काम होते नहीं दिखाई दे रहा है। एफएमडीए मामलों के जानकारों के अनुसार मोटी कमाई के लिए सुपर सकर और बकेट मशीनें कागजों पर काम पर लगाई जा रही हैं, ये मशीने मौके पर ले जाकर खड़ी भी कर दी जाती हैं लेकिन एक दिन में कम से कम आठ घंटे काम करने के बजाय एक दो घंटे और कभी तो बिना काम किए ही खड़ी रहती हैं, हां बिल पूरे दिन का फाड़ दिया जाता है। सेक्टर 21 में ऐसी ही सुपर सकर और बकेट मशीनें करीब ढाई महीने से रोजाना खड़ी हो रही हैं लेकिन इतने दिन बीतने के बावजूद सीवर लाइनें साफ नहीं हो सकी हैं।
दरअसल, सीएम सैनी ने एफएमडीए में उन सेवानिवृत्त अधिकारियों को दोबारा काम दिया है जो हूडा, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी आदि में रहकर शहर का भ_ा तो बैठा ही चुके हैं, यह भी जानते हैं कि कहां से मोटी कमाई का जुगाड़ हो सकता है।
सेवानिवृत्त तो पहले ही हो चुके हैं इसलिए इनके विरुद्ध किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई की संभावनाएं न के बराबर रहती हैं जाहिर है ऐसे में इन लोगों को खुली छूट है जितनी डकैती मार सकें मार लें, कोई पूछने वाला नहीं है। क्योंकि सीएम खुद ही इस महकमे को देखते हैं इसलिए अधिकारी भी मोटे मोटे खर्च बनाते हैं क्योंकि उन्हेंं लगता है कि सीएम के महकमे की ऑडिट करने की हिम्मत कोई जल्दी नहीं जुटाएगा।