फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नियमानुसार शहर भर के किसी भी बाजार में दुकानदारों को अपनी सीमा से बाहर, सड़क घेर कर सामान रखने का अधिकार नहीं होता। नियम का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के व्यापक अधिकार नगर निगम के पास होते हैं। इनके तहत निगम उल्लंघन कर्ताओं के वीडियो आदि बना कर चालान करके भारी जुर्माने वसूल कर सकता है। इसके अलावा सीधे एक्शन के तौर पर सड़कों पर रखे सामान को उठाने तथा छोटे-मोटे निर्माणों को तोडऩे का अधिकार भी निगम के पास होता है। इसके बावजूद शहर का कोई भी बाजार ऐसा नहीं है जिसमें दुकानदारों ने अपने सामने की चार से दस फुट तक सड़क न घेर रखी हो। जाहिर है इसके कारण सड़क की चौड़ाई घट कर आधी से भी कम हो जाती है, जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है। नियमों की उल्लंघना करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने के अपने अधिकार को निगम अधिकारियों ने लगभग बेच रखा है। कार्रवाई न करने के बदले ये अधिकारी बाकायदा उल्लंघन कर्ताओं से नियमित वसूली करते हैं।
दिनांक 24 तारीख को एनआईटी के मार्केट नम्बर वन में की गई निगम कार्रवाई का मतलब केवल इतना था कि वे निगम के अधिकारों एवं सख्तियों को नजर-अंदाज न करें और नियमित ‘हफ्ता/महीना’ देते रहा करें। निगमकर्मी इस कार्रवाई के दौरान दुकानों के बाहर रखे सामान को अपनी ट्राली में भर कर ले गए तथा जहां आवश्यक समझा वहां तोड़-फोड़ भी करी। निगम का यह उत्पाती ड्रामा गाहे-बगाहे चलता रहता है। उक्त कार्रवाई के बावजूद अगले दिन से मार्केट में वही अतिक्रमण फिर से शुरू हो गया। लेकिन इस कार्रवाई का प्रचार होने से मार्केट नम्बर दो, तीन व पांच के दुकानदारों के कान जरूर खड़े हो गए। उन्हें निगम की सख्तियां याद आ गईं और अधिकारियों की सेवा-पानी बदस्तूर चालू रहा।
यदि वास्तव में ही निगम अधिकारी बाजारों से अतिक्रमण हटाना चाहते तो इस तरह की कार्रवाई किसी एक बाजार में यदा-कदा न करके नियमित रूप से हर बाजार में लगातार भी चलाते रह सकते हैं। परन्तु ऐसा करने से उनको नियमित मिलने वाला भत्ता बंद होना तय है। मार्केट नम्बर एक से सटी हुई मार्केट नम्बर दो की मुख्य सड़क पर दोपहिया वाहनों के दर्जनों ऐसे शोरूम हैं जिनके पास दुकान के नाम पर दस बाई 15 की ही जगह है लेकिन उनके बीसियों दोपहिया दुकान के सामने सड़क पर ही खड़े रहते हैं। मानों सड़क ही उनका शो-रूम है। इसके बावजूद नगर निगम अधिकारियों ने आज तक इन पर कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं समझी।