नगर निगम चुनाव : मॉक पोल से लेकर स्ट्रांग रूम तक सत्ता की चाटुकारी करते दिखे अधिकारी

नगर निगम चुनाव : मॉक पोल से लेकर स्ट्रांग रूम तक सत्ता की चाटुकारी करते दिखे अधिकारी
March 16 06:21 2025

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) स्थानीय निकाय चुनाव सत्ता के ही होते हैं, यह बात फरीदाबाद में सच होती नजर आ रही है। वीवीपैट नहीं होने से गैर भाजपा प्रत्याशियों में पहले से ही गड़बड़ी की आशंका थी। पुरानी- टूटी-फूटी ईवीएम का मॉक पोल भी केवल सत्तापक्ष के प्रत्याशियों के सामने किए जाने और दूसरे प्रत्याशियों को नहीं चेक कराने से उनकी यह आशंका और भी प्रबल हो गई। स्ट्रांग रूम की सुरक्षा में गड़बड़ी और प्रत्याशियों को स्ट्रांग रूम की निगरानी नहीं करने देने के कारण वार्ड 14 से बसपा के उम्मीदवार दीन दयाल गौतम सहित कई प्रत्याशियों ने चुनाव आयोग पर उन्हें हराने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।

दीन दयाल गौतम के अनुसार उन्हें चुनाव कार्यालय से सेक्टर 16 ए स्थित महिला कॉलेज के कमरा नंबर 10 में इलेक्ट्रिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की मॉक पोल देखने का निमंत्रण मिला था। वहां मौजूद अधिकारियों ने न तो मॉक पोल करके दिखाया न ईवीएम चेक करने दी। उन्होंने इसकी शिकायत एसडीएम फरीदाबाद से करनी चाही लेकिन उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला चुनाव आयोग जानबूझ कर ईवीएम में हेराफेरी कर उन्हें हराने की रूपरेखा बना रहा है। दीनदयाल गौतम का मानना है कि दो मार्च को हुए मतदान में मतदाताओं का समर्थन देख उन्हें जीत पक्की लग रही है। चुनाव के बाद ईवीएम में कोई गड़बड़ी न हो इसलिए उन्होंने स्ट्रांग रूम की निगरानी करने का निर्णय लिया। उन्हें बताया गया कि मतदान समाप्त होने के बाद स्ट्रांग रूम की सुरक्षा दो लेयर की होगी। पहली लेयर में इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) के सुरक्षाकर्मी होंगे तथा दूसरी लेयर में लोकल पुलिस के कर्मचारी रहेंगे। यह भी स्पष्ट बताया गया था कि प्रत्याशी को पूरा अधिकार है स्ट्रांग रूम की सुरक्षा में व अपने साथियों के साथ यहां ठहर सकते हैं।

मतदान के बाद वार्ड 14 के प्रत्येक बूथ की ईवीएम सील कर महिला कॉलेज सेक्टर 16ए के स्ट्रांग रूम में रख कर मुख्य दरवाजा सील कर दिया गया। मौके पर मौजूद रिटर्निंग अफसर शिखा (एसडीएम) ने भी स्ट्रांग रूम की सुरक्षा में प्रत्याशी के अपने साथियों के साथ यहां ठहरने का प्रावधान होना बताया था। दीनदयाल का आरोप है कि प्रावधान के मुताबिक वह 2 मार्च की रात अपने साथियों के साथ अपनी कार में स्ट्रांग रूम के मेन गेट से करीब सौ फुट की दूरी से निगरानी करने पहुंचे। उनका आरोप है कि इमारत के मेन गेट से लेकर स्ट्रांग रूम के दरवाजे तक घुप्प अंधेरा था। वहां आईआरबी के जवान और पुलिसकर्मी भी नजर नहीं आए। उन्होंने इसकी सूचना आरओ शिखा को दी तो व्यवस्था कराने के बजाय वह दीनदयाल पर ही वहां से हटने का दबाव बनाने लगीं। आरओ पर राजनीतिक दबाव मेंं काम करने का आरोप लगा रहे दीनदयाल ने बताया कि उन्होंने फोन पर कहा कि आप लोग वहां नहीं रुक सकते अपनी गाड़ी लेकर जाओ। वह कहते रहे कि हम इमारत से सुरक्षित दूरी पर खड़े है जब तक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी हटेंगे नहीं।

तीन मार्च की रात साढ़े नौ बजे सेक्टर 16 पुलिस चौकी का एएसआई सुशील कुमार कई पुलिसकर्मियों के साथ उनके पास आया। आरोप है कि सभी पुलिसकर्मी नशे में थे उनके मुंह से शराब की बदबू आ रही थी। सुशील कुमार उन्हें गंदी गालिया देते हुए भगाने लगा, कहा कि तुम लोगों को स्ट्रांग रूम की निगरानी नहीं करने दूंगा। दीनदयाल ने आरोप लगाया कि सेक्टर 16 चौकी में तैनात एएसआई सुशील और उसकी टीम ने मंत्री विपुल गोयल के इशारे उनसे अभद्रता की। दूसरी रात भी स्ट्रांग रूम के आसपास घना अंधेरा था, अंदर होने वाली कोई कार्रवाई नजर नहीं आ रही थी, दूर से तो कतई नहीं। उन्होंने एएसआई द्वारा की जा रही अभद्रता की सूचना आरओ शिखा और डीसीपी सेंट्रल से शिकायत की। इसके बाद मौके पर एसीपी ओल्ड विनोद कुमार पहुंचे और उन्हें 100 फीट दूरी से निगरानी करने की इजाजत दी, साथ ही स्ट्रांग रूम परिसर में रौशनी कराने का आश्वासन दिया। दीन दयाल गौतम ने उनके साथ हुई अभद्रता की शिकायत मु य चुनाव अधिकारी, डीसी फरीदाबाद विक्रम सिंह से की। इस पर स्ट्रांग रूम में लाइट लगा दी गईं और उन्हें निगरानी करने का इजाजत भी मिल गई।

प्रत्याशी दीन दयाल द्वारा प्रशासन के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप निसंदेह सही हैं लेकिन समझने वाली बात यह है कि दीन दयाल जैसे पुराने और कर्मठ कार्यकर्ता को अभी तक यह बात समझ में नहीं आई कि जो सरकार लोकसभा व विधानसभाओं के चुनावों में खुली धांधली कर सकती है किसी भी स्थानीय निकाय के चुनाव में धांधली करने से उन्हें कौन रोक सकता है। इन चुनावों के शुरू होने से पहले ही भाजपा के तमाम नेतागण खुलेआम यह घोषणा करते घूम रहे थे कि जीतेंगे तो उन्हीं के उम्मीदवार। गजब तो हरियाणाा सरकार के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर ने दौलताबाद में यह कह कर कर दिया कि पब्लिक वोट दे या न दे उम्मीदवार तो उन्हीं का चुना जाएगा। इतना सब स्पष्ट हो जाने के बावजूद भी यदि दीन दयाल गौतम इस शासन प्रशासन से निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद करते हैं तो यह उनकी निहायत नासमझी है। सुरक्षा के नाम पर दो लेयर लगा लो या तीन या चार लेयर लगा लो, आईआरबी, एचएपी लगा लो या जिला पुलिस, हैं तो सभी भाजपा सरकार के नौकर। ये सभी लोग अपने आकाओं के हुक्म पर कुछ भी कर देने के लिए सदैव आतुर रहते हैं। इन्हें कानून व संविधान से कुछ लेना देना नहीं होता।

गौतम भले ही गाली देने वाले उस थानेदार को दोषी समझ रहे हों लेकिन असली दोषी तो वे हैं जिनके हुक्म पर वह थानेदार गालियां दे रहा है, उच्चाधिकारी केवल मीठा बोल कर संभ्रांत तरीके से अच्छी अच्छी बातें करके गौतम जैसों को बहलाने का प्रयास अवश्य करते हैं लेकिन करना तो उन्हें भी वही है जो सरकार चाहेगी। असल बात तो यह है कि गौतम जैसे उम्मीदवारों के पास अब वह जनशक्ति ही नहीं बची जो इस तरह के धांधलीबाज सत्तारूढ़ नेताओं से डटकर लोहा ले सके, यदि गौतम के साथ दो चार सौ लोगों का बल होता तो उस थानेदार क्या किसी भी शासन-प्रशासन की हिम्मत उन्हें वहां से हटाने की नहीं होती। जनता की इसी कमजोरी को समझते हुए सरकार ने ईवीएम में हेराफेरी करने के लिए दस दिनों तक उन्हें अपने कब्जे में रखा है वरना अब से पहले तक तो मतदान संपन्न होने के तुरंत बाद पोलिंग बूथ पर ही मतगणना शुरू कर दी जाती थी और चंद घंटों में वहीं से परिणाम भी घोषित कर दिए जाते थे। लेकिन जब जनता ने सरकार की तमाम धांधलियों को स्वीकार करते हुए उनके विरुद्ध लडऩे की जरूरत नहीं समझी तो धांधलीबाज नेताओं के हौसले तो बढऩे ही थे।

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Mazdoor Morcha
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