फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जन कल्याण कार्य की जगह झूठे रिकॉर्ड बनाने वाले कैबिनेट मंत्री का शहर में 17 करोड़ फूलदार पौधे लगाने वाले प्रोजेक्ट के तहत आपको कोई पौधा मिला या नहीं? अगर नहीं तो समझ लीजिए कि भाजपा सरकार में एक बार फिर जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपयों की दिनहाड़े बंदरबांट कर ली गई। चालाकी यह कि प्रोजेक्ट का बजट भी नहीं बताया गया। झूठ और प्रोपगंडा करने वाली भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार की नौकरी कर रहे आईएएस अधिकारी निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा ने अक्तूबर 2025 को बाकायदा पत्रकार वार्ता कर बताया था कि प़ूरे शहर को 17 करोड़ फूलदार पौधों से गुलजार किया जाएगा। बताया था कि ये पौधे नगर निगम की पांच एकड़ की नर्सरियों में उगाए जाएंगे। यह जानते हुए कि वह झूठ बोल रहे हैं बावजूद इसके खडगटा को यह दावा करना पड़ा क्योंकि उन्हें इवेंटबाज मंत्री विपुल गोयल ने मजबूर किया था। तब पत्तलपाड़ों के बीच बैठे कुछ पत्रकारों ने उनके दावे पर सवाल उठाए थे जैसे कि पांच एकड़ नर्सरी में सत्रह करोड़ पौधे कैसे लगाएंगे, क्योंकि इस आधार पर एक वर्ग मीटर में करीब 845 पौधे आते जो असंभव है। खडगटा के पास इसका कोई जवाब नहीं था। न ही वह यह बता सके थे कि ये 17 करोड़ पौधे कहां और कैसे लगाए जाएंगे, ये सारी जिम्मेदारी उन्होंने एनजीओ, आरडब्ल्यूए, सरकारी विभागों पर छोड़ दी थी।
दरअसल, ये प्रोजेक्ट अपना नाम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की सनक पाले मंत्री विपुल गोयल का है, सत्रह करोड़ पौधे तो क्या तैयार होने थे और क्या बांटे जाने थे। 23 नवंबर 2025 को विपुल गोयल ने सेक्टर 14 के सेंट्रल पार्क में पौधा वितरण कार्यक्रम शुरू किया। निगमायुक्त खडगटा ने दावा किया कि एक ही दिन में साढ़े तीन लाख फूलदार पौधे बांटने का रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज हो गया। ये सारे पौधे संघी, भाजपाई, अंधभक्तों को धनिया-पुदीने की गड्डियों की तरह बांट कर फोटो खिंचवाई गई सुर्खियां बटोरी गईं, किसी ने यह नहीं देखा कि ये पौधे लगाए भी गए या नहीं। मंत्री विपुल गोयल, मेयर प्रवीण बत्रा जोशी और निगमायुक्त ने दावा किया था कि ये पौधे घर घर बांटे जाएंगे। नगर निगम आंकड़ों के अनुसार फरीदाबाद नगर निगम क्षेत्र में लगभग साढ़े चार लाख घर, संस्थान गृहकर के दायरे में आते हैं। यानी 17 करोड़ पौधों के लिए प्रत्येक घर या संस्थान में 38 पौधे बांटे जाने थे। पौधे बांटने की इवेंट जिसमें संघी-भाजपाइयों, सत्ता के दलाल, भ्रष्टाचारियों (इनमें कोरोना महामारी के दौरान प्लाज्मा की कालाबाजारी करने का आरोपी विमल खंडेलवाल भी शामिल है) के अलावा कहीं भी आम जनता को पौधे नहीं दिए गए।
बताते चलें कि शहर में भाजपा के 45 पार्षद हैं लेकिन किसी भी वार्ड में किसी भी घर में पौधे नहीं बांटे गए। जो बांटे गए वो भी कहां लगाए गए किसी को पता नहीं। बस इवेंट हो गई नाम हो गया, जनता का करोड़ों रुपया स्वाहा हो गया। आम घर तो छोड़ दीजिए निगमायुक्त कम से कम नगर निगम परिसर में ही ये पौधे लगवा देते तो यह तो कहने लायक हो जाता कि देखो यहां गुलजार किया गया। ये सब तो तब किया जाता जब शहर को चमकाने और बेहतर करने की नीयत होती, नीयत तो बस नेताओं को खुश करने, जनता को बेवकूफ बना कर उसका धन हड़पने की हो तो यही सब होता है। विपुल गोयल के पौधे तो शहर में कहीं नजर नहीं आए और वह दीपक भी बुझ गया जो उन्होंने दीवाली के मौके पर सेक्टर 14, 15, 16 व 17 चौक जिसे लेबर चौक भी कहते हैं में जला कर दुनिया का सबसे बड़ा दीपक होने का रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज कराने का दावा किया था। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दीपक केवल उसी दिन और उतने ही समय के लिए जला था जिस दिन विपुल गोयल इसका उद्घाटन करने आए थे। इवेंटबाजी के बाद इसका कोई पूछने वाला नहीं है, जलना तो दूर इसकी सफाई और देखरेख तक नहीं की जा रही। दरअसल, यह दीपक नहीं जलाया गया था बल्कि जनता के लाखों रुपये मंत्री की सनक के लिए स्वाहा कर दिए गए थे।
काम के बिना नाम बनाए रखने की सनक में ही विपुल गोयल ने सेक्टर 14 के पार्क में इसी जनवरी में बिना मैदान की एक क्रिकेट पिच और एक वॉलीबॉल कोर्ट का उद्घाटन किया और इसे नाम दिया मिनी स्टेडियम का। भला पार्क में कोई स्टेडियम बनाता है, यदि ये मिनी स्टेडियम है तो इसका मैदान कहां है, खिलाडिय़ों के बैठने तैयार होने के लिए पैवेलियन और दर्शकों की दीर्घा कहां हैं। विपुल ने अपना नाम करने के लिए स्टेडियम के नाम पर पार्क की सूरत भी बिगाड़ दी। विपुल गोयल की सनक नई नहीं है, पहले कार्यकाल में मंत्री बनने के बाद एक ही दिन में ढाई लाख पौधे लगाने का रिकॉर्ड बनाने का असफल प्रयास वह 2015 में कर चुके हैं। उस समय तत्कालीन सीएम खट्टर ने सेक्टर 12 में रुद्राक्ष का पौधा लगाया था, देखरेख के अभाव में वह पौधा एक महीने में ही मुरझा गया था। बाद में इसी पार्क में विपुल गोयल ने घड़ी का उद्घाटन किया जो शायद ही कभी सही समय बता पाई हो। प्राकृतिक आवास में रहने वाले पक्षियों के लिए उन्होंने लाखों रुपये खर्च कर पक्षी घर बनवाया, जो आज भी उनकी मूर्खता और बचकाना सोच का नमूना बना हुई खड़ा है। पक्षी अंधभक्त तो होते नहीं जो पेड़ों पर सुरक्षित ढंग से खुद के बनाए घोंसले को छोड़कर उनके ताकनुमा सीमेंटेड दड़बों में आकर रहने लगते।
इसी कड़ी में बीते दिनों उन्होंने विंटेज कार रैली करवाई। अच्छी बात है इस तरह के कार्यक्रम कराएं लेकिन इन कार्यक्रमों से शहर की गंदगी, टूटी सड़कें, बजबजाते नाले-नालियां, ओवरफ्लो सीवर, जगह जगह लगे कचरे के ढेर आदि नागरिक समस्याएं नहीं सुलझतीं, जो कि उनके मंंत्रालय और महकमे का काम है। अगर नाम करना ही है तो जनप्रतिनिधि और मंत्री होने के नाते वह जनता की समस्याओं का समाधान कराएं जिससे लोग राहत महसूस करें। दरअसल, काम नहीं काम का ढिंढोरा पीटने के मोदी फार्मूले को कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने हरियाणा में सबसे मुस्तैदी से लपका है। ऐसे काम जिनसे जनता का कोई भला नहीं होने वाला लेकिन उसे विश्वगुरु बनने की सीढ़ी बता कर मीडिया में सुर्खियां बटोरने की कला में विपुल गोयल शहर के नेताओं में सबसे आगे हैं। ये सब करने में इनकी जेब से एक रुपया तो लगता नहीं है, जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये बर्बाद करने की बेशर्मी भी लगता है उन्होंने पीएम मोदी से सीखी है। दीपक, 17 करोड़ पौधे भी उसी योजना के अंग हैं। सच्चाई यह है कि जब तक जनता बेवकूफों की तरह सबकुछ देखती रहेगी और अंधभक्तों की तरह सत्ता से सवाल नहीं पूछेगी जब तक ये नेता उसे इसी तरह लूटते रहेंगे।