फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पृथला विधानसभा क्षेत्र में बिना अनुमित के घूम रहे दो चुनाव प्रचार वाहनों को पकड़ कर अमरपुर चौकी के सुपुर्द करने पहुंची फ़्लाइंग स्क्वाड की महिला ड्यूटी मजिस्ट्रेट पूनम मलिक के साथ चौकी इंचार्ज राकेश कुमार ने अभद्रता की। वाहनों को कब्जे लेने के बजाय चौकी इंचार्ज ने प्रत्याशियों को उनके वाहन पकड़े जाने, और पकडऩे वाली महिला अधिकारी की जानकारी दे दी। रात साढ़े दस बजे तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर महिला ने आला अधिकारियों से कार्रवाई करवाने और खुद को असुरक्षित महसूस होने की गुहार लगाई। आला अधिकारियों के निर्देश पर डीएसपी पलवल नरेश कुमार ने चौकी प्रभारी राकेश कुमार को कब्जे में लेकर रिसीविंग देने को कहा तो चौकी इंचार्ज ने उनकी भी न सुनी। कह दिया कि वह केवल अपने एसएचओ का ऑर्डर सुनेेंगे और किसी का नहीं। इस पर मामला आला अधिकारियों तक गया। विभाग के आला अधिकारियों के कहने पर रात करीब साढ़े ग्यारह बजे चौकी इंचार्ज ने वाहन कब्जे में लेकर रसीद दी।
विभाग से वेतन लेने वाला एएसआई राकेश कुमार आदर्श आचार संहिता का पालन करने के बजाय प्रत्याशियों को लाभ पहुंचाने और उनके वाहन नहीं जमा करने के लिए अंत तक नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाता रहा। पीडि़त ड्यूटी मजिस्ट्रेट पूनम मलिक नगर निगम में जूनियर इंजीनियर हैं। उन्हें प्रत्याशियों की प्रचार सामग्री, वाहनों आदि की निगरानी का जिम्मा दिया गया है। बृहस्पतिवार की शाम वह पृथला विधानसभा क्षेत्र में प्रचार वाहनों पर नजर रख रही थीं। उनकी टीम में एसआई कंवरपाल और कॉन्सटेबल योगेश शामिल थे। रात करीब पौने आठ बजे उन्हें कटेसरा मार्ग पर बसपा प्रत्याशी सुरेंद्र वशिष्ठ और निर्दलीय प्रत्याशी दीपक डागर का प्रचार करते हुए दो वाहन दिखे। उन्होंने दोनों वाहनों को रुकवाया और जांच की, दोनों ही वाहनों के पास चुनाव आयोग का अनुमति पत्र नहीं मिला। उन्होंने इसकी सूचना सी विजिल एप पर अपलोड की। इस मौके पर एसआई कंवरपाल कोई जरूरी फोन आने का बहाना बना टीम को छोड़ कर कहीं निकल गया। मजबूर होकर पूनम मलिक ने 112 हेल्पलाइन पर कॉल कर अपना परिचय दिया और वाहनों को चौकी पहुंचाने की मदद मांगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार 112 हेल्पलाइन वाले करीब बीस मिनट तक उन्हें टालते रहे। उन्होंने आला अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही तब जाकर लभगग आधा घंटे बाद 112 बाइक पर सवार दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। उनकी और टीम के सिपाही योगेश की मदद से उन्होंने दोनों वाहन अमरपुर चौकी पहुंचाए।
यहां मौजूद चौकी इंचार्ज एएसआई राकेश कुमार को अपना परिचय देते हुए दोनों वाहन जब्त करने और उनकी रसीद देने को कहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार राकेश कुमार ने आनाकानी की और वाहन जमा करने वाला फार्म अधूरा होने की बात कह पल्ला झाड़ा। पूनम मलिक फार्म की सभी प्रविष्टियां पूरी कर रहीं थीं, इस दौरान प्रत्याशियों को चौकी से सूचना मिलते ही उनके एक दर्जन से अधिक समर्थकों ने आकर पूनम को घेर लिया, और उन पर दबाव बनाने के लिए गाली गलौज करने लगे, धमकियां दीं और पूछते रहे कि मैडम किस रूट से मुख्यालय लौटेंगी। इस दौरान पुलिस तमाशबीन बनी रही। एएसआई राकेश इन लोगों से घुलमिल कर बातें करता और पकड़े गए वाहनों के बारे में जानकारियां देता नजर आया।
पुलिस का यह असहयोगपूर्ण रवैया देख कर पूनम का विश्वास पुलिस से पूरी तरह उठ गया और वह खुद को असुरक्षित महसूस करने लगीं। यह हालात देख कर पूनम ने मुख्यालय में प्रभारी अधिकारी आदित्य दहिया को फोन कर परिस्थतियों की जानकारी दी। आदित्य दहिया ने तुरंत समाधान करने का आश्वासन देकर डीएसपी पलवल नरेश कुमार को कर वाहन कब्जे में लेने को कहा। बावजूद इसके करीब एक घंटे तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पूनम ने फार्म पूरा भरकर देने के साथ ही रात होने का हवाला देते हुए राकेश कुमार से वाहन जल्द कब्जे में लेने का अनुरोध किया लेकिन उसने फिर टाल मटोल शुरू कर दी। अनहोनी की आशंका और भय से परेशान महिला ड़्यूटी मजिस्ट्रेट ने रात करीब साढ़े दस बजे दोबारा आदित्य दहिया को सूचना दी और कार्रवाई जल्द करवाने का अनुरोध किया। आदित्य दहिया के कहने पर पूनम ने खुद अपने फोन से डीएसपी पलवल नरेश कुमार को फोन किया और बात करने के बाद एएसआई राकेश से उनकी बात कराई। फोन पर राकेश तो यस सर कहता रहा लेकिन कॉल डिस्कनेक्ट होते ही बोला कि वह केवल अपने एसएचओ का आदेश मानेगा और किसी का नहीं। मजबूर होकर पूनम ने एक बार फिर आदित्य दहिया से मदद मांगी। उन्होंने एसपी पलवल चंद्र मोहन को फोन किया। तब तक रात के करीब सवा ग्यारह बजे चुके थे। इसके बाद राकेश ने वाहनों को कब्जे में लिया और महिला ड्यूटी मजिस्ट्रेट को रसीद दी। इस दौरान एसआई कंवरपाल भी लौट आया।
आधी रात के करीब बीसियों उग्र युवकों के बीच घिरी पूनम मलिक लोगों द्वारा यह पूछे जाने से कि मैडम किस रूट से लौटेंगी, काफी डर गई थी। ऐसे मेें उन्होंने टीम को मुख्यालय भेज कर खुद एक परिचित के यहां रात गुजारने का फैसला लिया। वह परिचित के साथ उसके घर चली गईं और टीम को मुख्यालय भेज दिया। हुआ वही जिसकी आशंका थी, सूत्रों के अनुसार उनकी टीम के वाहन का काफी दूर पीछा किया गया और सूनसान जगह पर ओवरटेक कर रुकवा लिया गया। सरकारी वाहन के चालक से उन लोगों ने, मैडम कहां गईं? किसके घर पर रुकी हैं? कहां रहती हैं? आदि सवाल पूछे लेकिन चालक ने कोई जानकारी नहीं होना बता कर पीछा छुड़ाया, वाहन में बैठे पुलिसकर्मियों ने भी कोई प्रतिवाद नहीं किया। लोगों के जाने के बाद चालक ने उन्हें मामले की जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार डर के कारण रात वह भर सो न सकीं कि कहीं वो लोग आ न धमकें।
निष्पक्ष चुनाव कराने का दंभ भरने वाला निर्वाचन आयोग अपनी ही महिला अधिकारी की सुूरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा। सूरज ढलने के बाद किसी अपराध की आरोपी महिला को थाने में नहीं रोका जा सकता, तो ये तो महिला अधिकारी थी। चुनाव आयोग की ड्यूटी करते हुए रात सवा आठ बजे दो वाहनों को लेकर पहुंची थी, नियमानुसार उनका काम इन वाहनों को पुलिस को सौंपना ही था, बाकी लिखापढ़ी और कार्रवाई तो पुलिस को ही करनी थी लेकिन दस मिनट के काम के लिए उस महिला को बीसियों अनजान पुरुषों के बीच करीब तीन घंटे तक थाने में रोके रखा गया। आला अधिकारी भी पीडि़ता द्वारा बार बार सूचना दिए जाने और सुरक्षा के प्रति चिंता जताने के बावजूद तीन घंटे तक उसे आश्वासन ही देते रहे। इस संबंध में एसपी पलवल चंद्रमोहन से बात करनी चाही गई लेकिन उन्होंने हर बार फोन नहीं उठाया और वाट्सएप मैसेज पर भी कोई जवाब नहीं दिया।
समझा जा सकता है कि यदि मतदान के दौरान कोई दबंग प्रत्याशी मनमर्जी करे, और उसकी दोस्त पुलिस तब तक कोई कार्रवाई नहीं करे जब तक उसका एसएचओ आदेश न दे। ऐसे में मतदान टीम के साथ भेजे गए पुलिसकर्मी भी विपरीत समय आने पर कोई जरूरी फोन आने की बात कह पल्ला झाड़ते हुए निकल जाएं तो कैसे निर्भय और निष्पक्ष चुनाव संपन्न हो सकते हैं। जो प्रशासनिक अधिकारी एक महिला ड्यूटी मजिस्ट्रेट से अभद्रता और असहयोग करने वाले चौकी इंचार्ज के खिलाफ कोई अनुशासानात्मक कार्रवाई नहीं कर सके वो निष्पक्ष चुनाव करा पाएंगे यह बड़ा प्रश्न है। क़ुल मिला कर निष्कर्ष यह निकलता है कि प्रशासन व पुलिस का बेड़ा गर्क हो चुका है।