विजय सिंह ठकुराय यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, नहीं होना चाहिए। इसी के साथ लदाख वासियों का देशद्रोहीकरण भी आरंभ हो गया है। इसलिए आज इस विवाद की तह में जाना भी उतना ही जरूरी हो गया है। लदाख की मुख्यत: दो मांग है। लदाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले और छठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
पूर्ण राज्य का अर्थ है – स्वतंत्र विधायिका और मुख्यमंत्री होना, ताकि सदन में चुन कर आये लोकल की जानकारी रखने वाले लोग शासन कर सकें। फिलहाल केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते उप-राज्यपाल के माध्यम से लदाख पर नयी दिल्ली का नियंत्रण है। पूर्ण राज्य न बनाने के पीछे चीन के करीब होने का तर्क दिया जा रहा है। तो क्या हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल चीन के निकट नहीं हैं? क्या राजस्थान, गुजरात और पंजाब पाकिस्तान के निकट नहीं हैं? पंजाब जैसा संवेदनशील क्षेत्र पूर्ण राज्य हो सकता है तो लदाख क्यों नहीं? खासकर जब 370 संशोधन के बाद केंद्र सरकार ने बार-बार दोहराया है कि जल्द ही नए गठित दोनों केंद्र शासित प्रदेशों को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा। पर आखिर कब? 5 साल हो गए। कोई टाइम लिमिट तो बताओ?
चलिए, पूर्ण राज्य छोडिय़े। छठी अनुसूची में शामिल होने की मांग का अर्थ है – भूमि, जल, वन, प्राकृतिक संसाधनों और अपने रीति-रिवाज से जुड़े मामलों पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र जिला परिषद होना। ताकि अपने स्थानीय मामलों में बाहरी पूंजीपतियों का हस्तक्षेप कम किया जा सके। इस व्यवस्था में तो राज्यपाल की मंजूरी से ही काम होता है। तो छठी अनुसूची का दर्जा देने से कौन सा चीन हावी हो जाएगा? ये दर्जा पहले से 4 पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय समाज की रक्षा के लिए दिया जा चुका है तो लदाख क्यों नहीं, जहां आदिवासी पापुलेशन 97 प्रतिशत है?
मैं आपको बताता चलूं कि 2019 के मैनिफेस्टो और 2020 में लदाख पहाड़ी परिषद के चुनावों के समय लदाख को छठी अनुसूची में शामिल करना भाजपा का सबसे बड़ा चुनावी वादा था। अर्थात लॉलीपॉप दिखा कर चुनाव जीतते गए। उसके बाद अपने ही वादे से मुकर कर ढीठ बन गए। जनता ने पदयात्रा की, आंदोलन किये, प्राणों को संकट में डालकर महीनों तक अनशन किये, तब भी सरकार के कान में जूं तक न रेंगी। अब इतने ढीठ बन जाओगे तो अंत में जनता क्या करेगी? वही करेगी, जो आज हो रहा है। लदाख को वर्षों से मूर्ख बनाया जा रहा है। वादाखिलाफी की जा रही है। आज उनका सब्र टूट गया है तो वे गद्दार? हर कोई जो अपने लिए आवाज उठाये, उसे गद्दार घोषित करने की टेक्निक कब तक आजमाओगे? अपने ही देश के लोग हैं। झूठ बोलना छोड़ कर सुनना सीखो, उन्हें समझना सीखो। गद्दार वो है, जो दूसरों को देशद्रोही का सर्टिफिकेट बांटते हैं, वे गद्दार नहीं – जो अपने हक की आवाज उठाते हैं।