अभिनव गोयल 29 जनवरी यानी मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज के कुंभ मेले में जानलेवा भगदड़ की चार घटनाएं हुईं। उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक़ भगदड़ में 37 लोगों की मौत हुई और मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया गया। बीबीसी की गहन पड़ताल में पता चला भगदड़ की घटनाओं में कम-से-कम 82 लोगों की मौत हुई। ऐसे 26 परिवार मिले जिन्हें पाँच-पाँच लाख रुपये कैश के बंडल दिए गए, लेकिन मृतकों की गिनती में उनको शामिल नहीं किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि कुंभ मेले में 66 करोड़ लोग पहुंचे। 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चला यह मेला करीब 4 हजार हेक्टेयर के इलाक़े में फैला हुआ था। 45 दिन के इस आयोजन पर सरकार ने 7 हजार करोड़ रुपए खर्च किए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी विधानसभा में कहा, ‘कुंभ के सफल आयोजन की गूंज दुनिया में लंबे समय तक सुनाई देगी।’लेकिन ‘सफलता की इस गूंज’ में ऐसे बहुत सारे लोगों की आवाज़ें गुम हो गईं जिनकी मौत कुंभ में हुई भगदड़ में हुई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 फरवरी को विधानसभा में बताया, ”29 की रात्रि में संगम नोज़ के पास 1:10 मिनट से लेकर 1:30 बजे के बीच में यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित होती है।” ”66 श्रद्धालु उसकी चपेट में आए थे जिन्हें तत्काल हॉस्पिटल पहुंचाया गया। जिनमें से 30 श्रद्धालुओं की मौत हुई है 30 में से 29 की पहचान हुइ।” उन्होंने कहा, ‘एक की पहचान नहीं हो पाई। उनका डीएनए सुरक्षित किया गया। उनका अंतिम संस्कार लोकल स्तर पर प्रशासन ने किया। प्रयागराज में अलग-अलग स्थानों पर और भी प्रेशर प्वाइंट बने थे।’ 19 फऱवरी को विधानसभा में दिए गए अपने बयान में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा, ‘कुछ लोग घायल हो रहे थे, जिसमें से लगभग 30-35 लोग अन्य स्थानों पर भी घायल हुए। उन्हें भी हॉस्पिटल पहुंचाया गया। उनमें भी 7 लोगों की मौत हुई, हॉस्पिटल ले जाते समय या हॉस्पिटल में।’ बीबीसी ने पड़ताल में पाया कि कुंभ मेला क्षेत्र में भगदड़ की चार जानलेवा घटनाएं हुई थीं- संगम नोज, समुद्रकूप चौराहे के पास हल्दीराम, एरावत मार्ग और सेक्टर 18 में कल्पवृक्ष द्वार के पास मुक्ति मार्ग चौराहा।
भगदड़ की इन घटनाओं की पूरी सच्चाई जानने के लिए बीबीसी के रिपोर्टरों ने 11 राज्यों के 50 से अधिक जिलों में पहुंच कर 100 से अधिक ऐसे परिवारों से मुलाक़ात की जिनका कहना था कि कुंभ भगदड़ में उनके अपनों की मौत हुई है। बीबीसी के पास इस बात के पुख़्ता सबूत हैं कि कम से कम 82 लोग कुंभ भगदड़ में मारे गए, जो परिवार अपनी बात साबित करने के लिए पुख़्ता सबूत नहीं दे सके, उन्हें बीबीसी ने 82 मृतकों की सूची में शामिल नहीं किया ह। महाकुंभ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने बताया, ‘मौनी अमावस्या पर संगम तट पर हुई घटना के दौरान 30 लोगों और अन्य स्थानों पर सात लोगों, जिनके शरीर पर ज़ाहिरा चोटें पाई गईं थीं, की दुखद मृत्यु हुई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के अनुरूप 37 में 35 मृतकों के आश्रितों के बैंक खातों में 25-25 लाख की मुआवज़ा राशि हस्तांतरित की जा चुकी है। एक मृतक की पहचान नहीं होने और एक मृतक के लावारिस होने के कारण मुआवज़ा राशि नहीं दी जा सकी है।’
बीबीसी की इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक उत्तर प्रदेश सरकार ने भगदड़ में मारे गए लोगों की आधिकारिक सूची प्रकाशित नहीं की थी। न ही ये जानकारी सार्वजनिक की कि किन परिवारों को मुआवज़ा दिया गया और वे कहां रहते हैं। विधानसभा में मुख्यमंत्री ने 19 फऱवरी को जो दावा किया, उसकी पड़ताल करने पर बीबीसी को पता चला कि 35 की जगह 36 ऐसे परिवार हैं जिन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से 25-25 लाख रुपए का मुआवज़ा मिला है। ऐसे 26 और परिवार मिले जिन्होंने बताया कि यूपी सरकार की तरफ से उन्हें पांच-पांच लाख रुपये कैश मिला है। योगी सरकार ने 36 परिवारों को तो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) या चेक के जरिए 25-25 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया लेकिन इन 26 परिवारों को रुपये कैश में दिए गए। बीबीसी को इन परिवारों से ऐसे कई वीडियो और फोटो मिले हैं, जिनमें पुलिस टीमें 500 रुपये के नोटों का बंडल देते हुए दिख रही हैं। कई परिवारों ने बताया कि उनकी मर्जी के खि़लाफ़ उनसे ऐसे कागज़ों पर हस्ताक्षर करवाए गए जिनमें ‘अचानक तबीयत बिगड़ जाने’ के बाद मौत होने की बात पहले से लिखी हुई थी। पड़ताल में कहीं भी इस बात के कोई संकेत नहीं मिले कि पाँच-पाँच लाख के नोटों के बंडल सरकारी खज़़ाने से विधिक तरीक़े से दिए गए थे। यह भी पता नहीं लग सका कि 26 परिवारों को दिए गए कुल एक करोड़ 30 लाख रुपये कहां से आए, लेकिन सभी 26 मामलों में उत्तर प्रदेश पुलिस के शामिल होने की बात परिजनों ने कही है। ज़्यादातर मामलों में फोटो और वीडियो परिजनों के पास हैं।
जैसे-जैसे पड़ताल आगे बढ़ी, बीबीसी को 19 और परिवार मिले जो 25 लाख का मुआवज़ा पाने वाले 36 परिवारों से अलग हैं। इन परिवारों को रहस्यमय तरीक़े से पांच लाख रुपये भी नहीं मिले हैं। इन 19 परिवारों का भी कहना है कि इनके अपनों की मौत 29 जनवरी को कुंभ में अलग-अलग जगह हुई भगदड़ में हुई। अपनी बात को साबित करने के लिए कई लोग पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट, कुछ लोग अस्पताल के मुर्दाघर की पर्ची और कुछ लोग मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे सबूत दिखाते हैं। इन 19 में कई परिवार ऐसे हैं, जो 29 जनवरी को मेला क्षेत्र में ली गई वह फोटो और वीडियो भी दिखाते हैं, जिसमें उनके परिजन की लाश दिखाई दे रही है। इस पड़ताल के दौरान कई झकझोर देने वाली कहानियां भी सामने आईं हैं। कुंभ भगदड़ में हुई 82 मौतों को बीबीसी ने मौटे तौर पर तीन श्रेणियों में बांटा है। पहली कैटेगरी उन मृतकों की है, जिनके परिजनों को 25-25 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया गया। दूसरी कैटेगरी उन मृतकों की है जिनके परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये कैश दिए गए। वहीं तीसरी कैटेगरी में ऐसे मृतकों को रखा गया है जिनके परिजनों को कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है। जिन 36 मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवज़ा यूपी सरकार की तरफ से मिला, उनमें से एक परिवार उत्तर प्रदेश के गोंडा जि़ले का है। 47 साल के ननकन 27 जनवरी को परिवार के साथ कुंभ के लिए निकले थे। पत्नी रामा देवी, बड़े भाई मसरू, भतीजा जोखू और परिवार के अन्य लोग ननकन के साथ थे। शाम करीब छह बजे सभी लोग मेला क्षेत्र में पहुंच गए और एक आश्रम को अपना ठिकाना बनाया। 28 जनवरी की सुबह परिवार ने पास के एक घाट पर स्नान किया। अब इंतजार मौनी अमावस्या के अवसर पर गंगा में डुबकी लगाने का था।
ननकन के बड़े भाई मसरू बताते हैं, ’28 जनवरी की रात करीब दस बजे हम संगम की ओर चले। हमें वहां पहुंचने में दो घंटे लग गए।”तभी वहां माइक पर एलान हुआ- ‘अमृत बरस रहा है, सभी लोग स्नान कर लें’, बस फिर क्या था, लोग पागल हो गए। मसरू कहते हैं, ‘भीड़ इतनी हो गई कि हमने पीछे लौटने की सोची, तभी ननकन गिर गए और भीड़ उन्हें रौंदते हुए चली गई। वे बताते हैं, ‘वहीं करीब 30 शव पड़े थे। कुछ औरतों के शरीर पर कपड़े तक नहीं थे।’ननकन की पत्नी रामा देवी भी उनके साथ मौजूद थीं। वे कहती हैं, ‘भीड़ इतनी थी कि हमारे कपड़े तक खुल गए। वहां आदमी ने आदमी को मार दिया।’ परिवार गंगा में स्नान कर पाता उससे पहले ही संगम नोज़ पर भगदड़ हो गई। कुछ ही देर में भगदड़ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। इन्हीं तस्वीरों में एक तस्वीर ननकन की भी थी। कई लाशों के बीच मृत पड़े ननकन का हाथ उनके भांजे जोखू ने पकड़ा हुआ था। उस तस्वीर को देखकर जोखू कहते हैं, ‘उस समय कुछ समझ नहीं आ रहा था। हर तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी। परिवार का कहना है कि शव को घर लाने के लिए अस्पताल से एक एंबुलेंस की व्यवस्था करवाई गई साथ ही, अंतिम संस्कार करने के लिए वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने 15 हजार रुपये का एक लिफाफा भी दिया।
अन्य मृतकों के परिजनों ने बताया कि इसी तरह अंतिम संस्कार के लिए उन्हें भी 15 हजार रुपये कैश दिए गए थे। ननकन के परिवार को उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से 25 लाख रुपये का मुआवज़ा मिला है। रामा देवी बताती हैं कि ननकन के सभी सगे परिजनों को बराबर-बराबर रक़म मिली है, वे कहती हैं, ”मेरे और चार बच्चों के खाते में पांच-पांच लाख रुपये सरकार की तरफ आए हैं।’ संगम नोज़ पर हुई इस भगदड़ में मरने वाले चार लोग कर्नाटक से आए थे। बेलगाम की रहने वाली कंचन अपने पति अरुण नारायण कोपर्डे (उम्र 60 साल) के साथ कुंभ आई थीं। परिवार के साथ बेलगाम के कई और लोग भी थे। सभी एक ट्रैवल एजेंसी के जरिए कुंभ स्नान करने आए थे। कंचन बताती हैं, ‘हमारे ऊपर लोग गिरने लगे। मेरे पति की पीठ के ऊपर से लोग पैर रखकर जा रहे थे। वे मदद के लिए चिल्ला रहे थे लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था।’ कोई उनकी गर्दन को जूते से दबाकर चला गया और उन्होंने मेरी छाती पर ही अपना सर छोड़ दिया।’ भगदड़ वाली जगह से अरुण के शव को रेस्क्यू टीमें अस्पताल ले गई, लेकिन उन्हें किस अस्पताल में ले जाया गया, इसकी जानकारी कंचन को नहीं दी गई। कंचन कहती हैं, ‘एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में अपने पति को ढूंढने के लिए मैं करीब 35 किलोमीटर पैदल चली। बाद में एक शव गृह में मुझे वो मिले।
कर्नाटक के बाकी तीन शवों के साथ अरुण के शव को पहले एंबुलेंस से दिल्ली एयरपोर्ट भेजा गया। यहां से सभी शवों को प्लेन से कर्नाटक पहुंचाया गया। कर्नाटक से कुंभ मेले में आए सभी मृतकों को 25-25 लाख का मुआवज़ा मिल गया है। मृत्यु प्रमाण पत्र के मुताबिक चारों की मौत 29 जनवरी को केंद्रीय अस्पताल, प्रयागराज, महाकुंभ-2025 में हुई। उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक़, कुंभ भगदड़ में एक मृतक का कोई वारिस नहीं था इसलिए उनके किसी परिजन को 25 लाख रुपये का मुआवज़ा नहीं दिया जा सका। पड़ताल में पाया गया कि वे व्यक्ति, बीजेपी के पूर्व महासचिव और राष्ट्रीय स्वयं स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे केएन गोविंदाचार्य के छोटे भाई केएन वासुदेवाचार्य थे। संगम नोज़ पर भगदड़ में मारे गए अन्य लोगों की तरह ही केएन वासुदेवाचार्य के मृत्यु प्रमाण पत्र में भी मृत्यु का स्थान-वार्ड नंबर-7, फोर्ट कैंट, प्रयागराज है। फोन पर बातचीत में केएन गोविंदाचार्य ने बताया, ‘हाँ, मेरे छोटे भाई थे। मैं उनकी तेरहवीं पर गया था।’हम जब केएन वासुदेवाचार्य के घर पहुंचे तो हमारी मुलाकात किरण मिश्रा से हुई।
वासुदेवाचार्य के साथ पिछले करीब दो दशकों से सहायिका के तौर पर रह रहीं किरण कहती हैं, वे सन 1990 से वाराणसी के इस घर में मैं रह रहे थे। मैं करीब बीस सालों से उनका ध्यान रख रही थी। उन्होंने शादी नहीं की थी। वे एक स्कूल के प्रिंसिपल पद से रिटायर हुए थे।’वे बताती हैं, ‘प्रयागराज में पहले उनकी लाश को लावारिस में डाल दिया था। बाद में बीजेपी से जुड़े एक परिचित व्यक्ति ने उनका शव रिसीव किया और एंबुलेंस से शव को बनारस लाए। उनका अंतिम संस्कार हरिश्चंद्र घाट पर हुआ।’वाराणसी में केसरीपुर सर्किल के लेखपाल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ‘सरकारी तफ़्तीश आई थी, मैंने जांच करके रिपोर्ट दे दी थी कि उनका कोई वारिस नहीं ह।’इन मृतकों के परिवार को 5-5 लाख रुपये कैश दिए गए अब बात दूसरी कैटेगरी की। बीबीसी को 26 ऐसे परिवार भी मिले जिन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें 5-5 लाख रुपये कैश में दिए हैं। इसमें उत्तर प्रदेश के 18, बिहार के 5, पश्चिम बंगाल के 2 और झारखंड का एक परिवार शामिल है। इन परिवारों का कहना है कि इनके अपनों की मौत कुंभ में अलग-अलग जगह हुई भगदड़ में हुई। ये परिवार उन 36 परिवारों से अलग हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश सरकार से 25 लाख रुपये का मुआवज़ा मिला है। इन परिवारों का कहना है कि यूपी पुलिस ने घर आकर कुछ कागजों पर अंगूठे लगवाए और हस्ताक्षर करवाए हैं। इन पर मृतक की मौत भगदड़ में न होकर अचानक तबीयत बिगडऩे की वजह से होने की बात लिखी गई है।
बीबीसी ने परिजनों के इन आरोपों के बारे में सरकार का पक्ष जानने के लिए प्रदेश पुलिस और प्रशासन के अनेक अधिकारियों से कई बार बात करने की कोशिश की, लेकिन कहीं से कोई जवाब नहीं मिला। उत्तर प्रदेश के सूचना निदेशक विशाल सिंह और प्रयागराज के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ से भी कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। हालांकि लखनऊ में बुधवार 11 जून को एक संवाददाता सम्मेलन में जब उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से एक पत्रकार ने बीबीसी की पड़ताल के बारे में सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा ‘मुझे लगता है कि…आप कोई समाचार चला दें और मैं इसका जवाब दूं, वो नहीं है। लेकिन अगर कुंभ की दुखद दुर्घटना में किसी परिवार ने अपने सदस्य को खोया है, उसका हमने पहले भी दुख ज़ाहिर किया था, आज भी दुख ज़ाहिर करते हैं। इन परिवारों से हमारी संवेदना है, सरकार साथ है।’42 साल के विनोद रुइदास, पश्चिम बंगाल में पश्चिमी बर्धमान के रहने वाले थे।
परिवार का कहना है, ‘यूपी पुलिस के कुछ लोग घर आकर पांच लाख रुपये देकर गए हैं।’विनोद के साले उनके साथ कुंभ गए थे। उन्होंने बताया, ‘हम 27 जनवरी को घर से निकले थे। पहले बनारस गए फिर वहां से प्रयागराज। रात को संगम पर हुई भगदड़ में मेरे जीजा गिर गए थे और लोग उन्हें दबाते हुए आगे बढ़ गए। वे बताते हैं, ”अगले दिन मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी के बाहर पोस्टर में जीजा जी की भी तस्वीर थी। उनके कंधे पर चोट के निशान थे। उन्होंने फ्री में एक एंबुलेंस करके दी थी जिससे शव को हम घर लाए। भगदड़ में मारे गए एक व्यक्ति के परिवार ने बीबीसी को एक वीडियो भेजी है। वीडियो में उत्तर प्रदेश से आए कुछ अफ़सर परिवार से यह कहलवा रहे हैं कि उन्होंने पांच लाख रुपये रिसीव किए हैं। इसी तरह कुछ लोग पांच लाख रुपये लेकर बिहार के गोपालगंज में तारा देवी के घर भी पहुंचे, ये सभी लोग सादे कपड़ों में थे। परिवार को पांच लाख रुपये देने के बाद बकायदा इन लोगों ने एक वीडियो बनाया। इस वीडियो में मृतक तारा देवी के बेटे धनंजय कुमार बोलते हुए सुने जा सकते हैं- ”मैं धनंजय कुमार, मेरी माता तारा देवी, हम कुंभ मेले में गए थे नहाने के लिए। मेरी मां की मृत्यु हो गई। यहां पर साहब आए थे, यूपी के साहब हैं, पांच लाख रुपये हमें दिए, हमने प्राप्त किए हैं।’इसी तरह मृतक तारा देवी के पति भी वीडियो पर अपना बयान दर्ज करवाते हुए दिखाई देते हैं।
62 साल की तारा देवी अपने परिवार के साथ कुंभ गई थीं। उनके साथ इस यात्रा में पड़ोस की सुरसत्ती देवी भी साथ थीं। धनजंय गोंड बताते हैं, ”भगदड़ वाली जगह 15-16 लाशें पड़ी थी। मैंने लाशों को हटाना शुरू किया। उसमें नीचे मेरी मम्मी और पड़ोस की दादी सुरसत्ती देवी की लाश पड़ी थी।”परिवार के मुताबिक़, तारा देवी के शव पर 35 नंबर और सुरसत्ती देवी के शव पर 46 नंबर लिखा था। प्रयागराज के कई बार चक्कर काटने के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र बना। इसके मुताबिक दोनों की मौत 29 जनवरी को ‘सेक्टर-20, कुंभ मेला क्षेत्र, झूंसी, फूलपुर, प्रयागराज’ में हुई। इसी तरह उत्तर प्रदेश के जौनपुर में धर्मराज राजभर के परिवार को पांच-पांच लाख रुपये कैश दिए गए। उनकी पत्नी रमपत्ति देवी और बहू रीता देवी की कुंभ भगदड़ में मौत हो गई थी। पड़ताल में बीबीसी को ऐरावत मार्ग पर हुई भगदड़ का एक वीडियो मिला है। इस वीडियो में राजभर परिवार, दोनों के शवों को लेकर घटनास्थल पर बैठा हुआ है। जौनपुर के अपने घर में कवर में लिपटे पांच-पांच लाख रुपये के दो बंडल की तस्वीर दिखाते हुए राजभर कहते हैं, ”सरकार ने 25 लाख मुआवज़ा देने की बात कही थी, लेकिन ये पैसा (पांच लाख) देकर पुलिस वाले गए हैं।’भगदड़ वाली रात को याद कर वे बताते हैं, ‘मेरी औरत ने मुझे आवाज दी कि सूरज के पिता जी मुझे बचाओ, लेकिन मैं क्या करता, मैं खुद दबता चला गया। मेरी पत्नी राधे-राधे बोल रही थी लेकिन धीरे-धीरे वो शांत हो गई।”
बीबीसी को संगम नोज़ पर हुई भगदड़ के कुछ घंटे बाद मेला अस्पताल में बनाया गया एक वीडियो मिला। इस वीडियो में ज़मीन पर रखे 18 शव दिख रहे हैं। पांच परिवारों ने इस वीडियो को देखकर अपने परिजन के शव की पहचान की। इनमें एक शव झारखंड के शिवराज गुप्ता का भी था। शिवराज के बगल में हरियाणा की रामपति देवी, प्रयागराज की रीना यादव, असम के नीतिरंजन पॉल और जौनपुर की मनित्रा देवी का शव रखा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने शिवराज गुप्ता के परिवार को छोड़कर बाकी चारों परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया। शिवराज के बेटे शिवम गुप्ता ने बताया, ”21 मार्च को यूपी पुलिस के एक अधिकारी पांच लाख रुपये कैश लेकर घर आए थे।” पांच लाख रुपये पाने वाले कुछ परिवारों ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर यह आरोप भी लगाया है कि वे पैसों के बदले ऐसे कागजों पर हस्ताक्षर करवा रहे हैं, जिनमें मौत की वजह तबीयत बिगडऩा बताई गई है। इसमें बिहार के गोपालगंज की शिवकली देवी और उत्तर प्रदेश के बलरामपुर की वैजंती देवी जैसे लोगों के परिवार शामिल हैं। इन मृतकों के परिवार को कोई मुआवज़ा नहीं मिला।
तीसरी कैटेगरी उन मृतकों की है जिन्हें सरकार से कुछ नहीं मिला। 19 और ऐसे परिवार मिले जिन्होंने बताया कि उनके अपनों की मौत कुंभ भगदड़ में हुइ। ये परिवार उन 62 परिवारों से अलग हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से 25 लाख रुपये का मुआवज़ा या 5 लाख कैश मिले हैं। इन 19 परिवारों में एक परिवार देवरिया के रहने वाले श्यामलाल गोंड का ह। प्रयागराज के स्वरूप रानी अस्पताल से मिली पर्ची पर लिखा है कि उन्हें मृत हालत में 29 जनवरी की सुबह 10 बजकर 2 मिनट पर लाया गया था। श्यामलाल गोंड के बेटे भागीरथी गोंड बताते हैं, ”मेरे पिता जी अज्ञात में थे। उन लोगों ने रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए एक फाइल रखी थी। जिस हाल में शव मिला था उसी अवस्था में फोटो लेकर रजिस्टर में डाल दी थी।”वे बताते हैं, ”तस्वीर देखकर उन्हें पहचानना मुश्किल हो रहा था। गिरने के बाद उनका सिर नीचे चला गया था, छाती ऊपर आ गई थी, सिर भी उनका थोड़ा घूम गया था। ‘ भागीरथी बताते हैं, ”उन्होंने मुझे कुछ नहीं लिखकर दिया। वे बोल रहे थे कि शव को लेकर जाओ, मैंने कहा कि लेकर जाऊंगा लेकिन आप कार्रवाई कुछ नहीं कर रहे हैं। लिखकर भी नहीं दे रहे हैं।” इसी तरह हरियाणा के फरीदाबाद में मृतक अमित कुमार के परिवार की भी कोई सुध लेने वाला नहीं है। 34 साल के अमित कुमार भारतीय सेना में काम करते थे। चार बच्चों, पत्नी और मां के साथ वे 25 जनवरी को घर से निकले थे। चार बच्चों में सबसे बड़ी बेटी सात साल की और सबसे छोटा बेटा एक साल का है। परिवार ने 27 जनवरी को बेटे का जन्मदिन कुंभ में ही मनाया था। अमित कुमार की मां सरिता देवी बताती हैं, ”28 जनवरी की दोपहर को ही हम संगम की तरफ निकल गए थे। पैदल चलने की वजह से अमित के पैर सूज गए थे। जब मेरा बेटा भीड़ की चपेट में आया तो वो उठ नहीं पाया।”मां का कहना है कि भगदड़ में घायल होने के बाद वे इलाज के लिए भटकते रहे और जब तक वे अस्पताल पहुंचे उनके बेटे की मौत हो गई।
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के शवगृह से अमित कुमार के शव को सरकारी एंबुलेंस की मदद से फरीदाबाद भेज दिया गया। उनके शव पर 59 नंबर लिखा था। मां का कहना है, ”हम मर जाएं तो अर्थी को कोई कंधा देने वाला नहीं बचा है। एक सहारा था वो भी भगवान ने ले लिया। बच्चे फोन लेकर मेरे पास आते हैं कि पापा को फोन करो, मैं कहती हूं कि पापा बिना फोन के नौकरी पर गए हैं।” वे कहती हैं, ”सबसे छोटी बेटी गेट पर बैठ जाती ह। वो कहती है कि सबके पापा आते हैं लेकिन मेरे पापा नहीं आते। भगवान ने हमारे ऊपर पहाड़ तोड़ दिया है। ऐसा सैलाब आया मेरा सब कुछ बहाकर ले गया।” इसी तरह बिहार में कैमूर जिले की रहने वाली सुनैना देवी की मौत भी कुंभ में हुई। परिवार का कहना है कि उनकी मौत कुंभ में झंूसी की तरफ समुद्रकूप चौराहे के पास हुई भगदड़ में हुई। परिवार के पास घटनास्थल की एक तस्वीर भी है, जिसमें सुनैना देवी का शव भगदड़ वाली जगह पर पड़ा हुआ है। परिजनों का कहना है, ”पुलिस वाले घर पर कई बार पांच लाख रुपये देने के लिए आए लेकिन हमने लेने से मना कर दिया।”
मुक्ति मार्ग चौराहे की भगदड़ मृतकों के परिजनों से मिलने के बाद बीबीसी को पता चला कि कुंभ क्षेत्र में संगम नोज, झूसी की तरफ समुद्रकूप चौराहा और ऐरावत मार्ग के अलावा एक और बड़ी भगदड़ कल्पवृक्ष द्वार के पास मुक्ति मार्ग चौराहे पर सुबह करीब आठ बजे हुई। पड़ताल में बीबीसी ने यहां मारे गए पांच लोगों की पहचान की। इनमें उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के पन्ने लाल साहनी और नगीना देवी, सुल्तानपुर जिले की मीना पांडे, हरियाणा के जींद जिले की कृष्णा देवी और बिहार में औरंगाबाद की सोनम कुमारी शामिल हैं। इनमें से किसी भी मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवज़ा नहीं मिला है। पांच परिवारों में से सुल्तानपुर की मीना पांडे और हरियाणा की कृष्णा देवी के परिवार को उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से किसी भी तरह की आर्थिक मदद नहीं मिली है। वहीं मुक्ति मार्ग चौराहे पर हुई भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये कैश दिए गए हैं।
सरकार की कुंभ मेले की आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी दी गई है कि कुंभ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से लैस 2750 सीसीटीवी कैमरे और उनकी निगरानी के लिए 300 से ज्यादा एक्सपट्र्स लगाए गए थे। इसके अलावा सुरक्षा में 50 हजार से ज्यादा जवान, हवा में ड्रोन और आपात स्थिति से निपटने के लिए एयर एंबुलेंस समेत 133 एंबुलेंस तैनात की गई थी। बावजूद इसके पीडि़त परिवारों तक मदद नहीं पहुंची। उनका कहना है कि वे अपने परिजनों के शवों को लेकर भगदड़ वाली जगह पर शाम चार बजे तक बैठे रहे। घटनास्थल पर मीना पांडे की लाश लिए बैठी रहीं अर्चना सिंह कहती हैं, ”वहां आठ लाशें पड़ी हुई थी, एक आदमी वहां पर था उसने कहा कि ये मर गई हैं अब आप अपनी जान बचाओ।”अर्चना और मीना सुल्तानपुर में एक-दूसरे की पड़ोसी थीं और एक साथ मेले में आई थीं। अर्चना कहती हैं, ”वो सीन देखने लायक नहीं था। अगर वहां कैमरा लगा होगा तो आप देखिए वहां सीन कैसा था। लगा तो जरूर होगा, दबा दिए होंगे।”
घटनास्थल की तस्वीरें दिखाते हुए अर्चना कहती हैं, ”वहां भी हम बोले हैं, आए थे प्रेस वाले। सड़ जाती लाश, दो बजे से तो बदबू मारने लगी थी लाश। पूरा दिन धूप में लाश पड़ी थी।” आप सोचिए आठ बजे (सुबह) की एक्सपायर हुई, तीन बजे (दोपहर) तक पड़ी रही। 29 तारीख को धूप में लाश पड़ी थी। हेलीकॉप्टर भी आया ऊपर से देखने के लिए। लोग हाथ उठाकर मदद मांग रहे थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ।”अर्चना ने बताया कि परिवार जिस बोलेरो कार से कुंभ गया था, उसी की मदद से मीना पांडे के शव को घर ले आया। मीना पांडे के ही बगल में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के रहने वाले पन्ने लाल साहनी और नगीना देवी का शव पड़ा था। पन्ने लाल साहनी की पत्नी कुसुम देवी कहती हैं, ”29 की सुबह करीब पांच बजे हम लोगों ने स्नान किया। करीब आठ बजे भगदड़ में मेरे पति और नगीना देवी की मौत हो गई।” वे कहती हैं, ”बाएं तरफ मेरा आदमी गिरा और दाएं तरफ नगीना। लोग उनके ऊपर से चढ़कर जा रहे थे। हम उनकी लाश लेकर शाम चार बजे तक धूप में बैठे रहे। वहां पानी पिलाने वाला भी कोई नहीं था।” कुसुम बताती हैं, ”आस-पास में 8-9 लाशें और लोगों को सामान गिरा पड़ा था। जूते चप्पल, बैग इधर-उधर पड़े थे। पूरी देह पर चोट के निशान थे।”
वहीं नगीना देवी के बेटे सिकंदर निषाद घटनास्थल की तस्वीर दिखाते हुए कहते हैं, ”देखिए कैसे लोग मरे पड़े हैं। वहां प्रशासन की तरफ से मदद के लिए कोई नहीं आया।”वे कहते हैं, ”कल्पवृक्ष द्वार के पास भगदड़ हुई थी। मेरी मां के माथे पर, सीने पर और हाथों पर चोट के निशान थे। अच्छे से मालूम पड़ रहा था कि लोग उनके ऊपर से चढ़कर गए है। उनके शव पर 62 नंबर लिखा था।”जबकि पन्ने लाल साहनी के शव पर 64 नंबर लिखा हुआ था। यहीं पर अपनी बेटी सोनम कुमारी (उम्र 21 साल) की लाश लेकर बिहार के औरंगाबाद की रंजना कुमारी भी बैठी थीं। रंजना कुमारी बताती हैं, ”मेरी तीन बेटियां हैं, एक सोनम हमेशा के लिए चली गई। हम दोनों स्नान करने के लिए जा रहे थे, अचानक पीछे से भीड़ आई और हम दोनों चप (दब) गए।”उन्होंने बताया, ”भीड़ में जब वो आगे बढ़ गई तो उसने आवाज लगाई कि मांजी बचाइये…मैंने कहा कि वहीं खड़े रहो, आगे मत बढऩा। उसके बाद भगदड़ में हम दोनों गिर गए। मुझे एक संत ने हाथ पकड़ कर बाहर निकाला लेकिन मेरी बेटी चिल्लाती रह गई, किसी ने उसे नहीं बचाया।”
वे बताती हैं, ”भगदड़़ सुबह करीब आठ बजे हुई थी। मेरी बेटी की लाश तीन लाशों के नीचे दबी हुई थी। तीन लाशों को किसी तरह से हटाकर हमने उसे बाहर निकाला। हम शाम चार बजे तक बैठे रहे, हम तक कोई मदद नहीं आइ।”इसी भगदड़ में जान गंवाने वालीं हरियाणा के रोहतक की कृष्णा देवी के परिवार को भी कोई मदद नहीं मिली। कृष्णा देवी अपनी बहू सुनीता देवी के साथ कुंभ गई थीं। सुनीता देवी कहती हैं, ”जिस तरफ हम जा रहे थे। उधर से भीड़ आई और धक्का-धक्का होते हुए हम गिर गए। मम्मी सीधी गिरी और मैं मुंह के बल गिरी। मैं बस आवाज़ लगा रही थी, कोई तो हमें बचा लो.” इस बात की काफ़ी संभावना है कि ऐसी मौतों की वास्तविक संख्या हमारी रिपोर्ट से कहीं अधिक हो, लेकिन गहन पड़ताल के बाद तैयार की गई इस रिपोर्ट में मरने वालों की संख्या हम 82 इसलिए बता रहे हैं क्योंकि इतनी ही मौतों के बारे में पुख़्ता सबूत और चश्मदीद गवाह मौजूद हैं.