फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ईएसआई कॉर्पोरेशन के क्षेत्रीय निदेशक (आरडी) एजे एम मुरलीधर राव ने 13 अगस्त को हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से मुलाकात करके कॉर्पोरेशन को राज्य सरकार से सस्ती दरों पर भू-खंड दिलाने की मांग की है। सेक्टर 16 स्थित क्षेत्रीय निदेशालय में बतौर आरडी तैनात राव मूल रूप से तेलंगाना के रहने वाले हैं तथा कोयला खनन विभाग में अधिकारी होने के साथ वे वहां के क्रिकेट एसोसिएशन और हैंडबॉल एसोसिएशन में भी पदाधिकारी रहे हैं। कॉर्पोरेशन में वे प्रतिनियुक्ति पर आये हुए हैं। कॉर्पोरेशन के लिये ज़मीन की कमी के मुद्दे को उठाने के लिये वे बधाई के पात्र हैं।
नि:संदेह स्थानीय ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के विस्तार हेतु अतिरिक्त ज़मीन की आवश्यकता है जो कि उसके बगल में ही खाली भी पड़ी है। लेकिन इससे पहले सवाल यह उठता है कि इसी परिसर में खाली पड़ी छ: एकड़ ज़मीन पर कॉर्पोरेशन काम शुरू क्यों नहीं कर रहा? विदित है कि बीते तीन-चार साल से इस ज़मीन पर अस्पताल की एक और इमारत बनने की चर्चा चल रही है। एनएच पांच स्थित ईएसआई डिस्पेंसरी में दो एकड़ खाली पड़ी ज़मीन पर कोई काम शुरू क्यों नहीं हो रहा? इसी तरह एनएच एक नम्बर में खाली पड़े 600 वर्ग गज़ के प्लॉट का सदुपयोग क्यों नहीं किया जा रहा? इसी तरह सेक्टर सात स्थित खंडहर हो चुकी डिस्पेंसरी के तीन एकड़ भू-खंड को किसलिये खाली रखा हुआ है? इन से भी बड़ी बात यह है कि मानेसर में करीब तीन वर्ष पूर्व सात एकड़ का जो भूखंड 120 करोड़ में कॉर्पोरेशन ने हरियाणा सरकार से खरीदा था उस पर क्या हो रहा है?
कॉर्पोरेशन मुख्यालय में बैठे निकम्मे कमिश्नरों की पलटन में यदि आरडी मुरलीधर राव जैसी समझदारी का लेशमात्र अंश भी होता तो वे बंडारू दत्तात्रेय के गर्वनर होने का काफी लाभ उठा सकते थे। विदित है कि दत्तात्रेय बतौर केन्द्रीय श्रममंत्री कॉर्पोरेशन की मेडिकल सेवाओं में काफी सुधार कर गये थे। अपने गृह क्षेत्र हैदराबाद स्थित ईएसआई मेडिकल कॉलेज की तो उन्होंने काया ही पलट दी थी।
इसका काफी लाभ स्थानीय मेडिकल कॉलेज को भी मिल पाया था। लेकिन कमिश्नरों की इस पलटन को तो मज़दूर हितों से कोई लेना-देना नहीं। उनकी तो हर सोच मज़दूर विरोधी ही रहती है। वे मज़दूरों से केवल अंश दान लेने में रुचि रखते हैं और बदले में इलाज के नाम पर उन्हें भटकाये रखना चाहते हैं।