खुलने लगे ईओ सुशील के चेलों के काले चिट्ठे

खुलने लगे ईओ सुशील के चेलों के काले चिट्ठे
March 30 17:47 2026

मज़दूर मोर्चा ब्यूरो
रेवाड़ी नगर परिषद में भ्रष्टाचार के कीर्तिमान गढऩे वाले पूर्व ईओ सुशील भुक्कल और उसके वसूली वाले चेले खुद को बिल्डिंग इंस्पेक्टर बताने वाले फील्डमैन जगमिंदर राठी के काले कारनामे सामने आने लगे हैं। आला अधिकारियों को अंधेरे में रख कर एनओसी और प्रॉपर्टी आईडी में खेल कर लाखों रुपये वारे न्यारे करने के इन दोनों भ्रष्टों के कारनामे रोजाना सामने आ रहे हैं। नगर परिषद रेवाड़ी सूत्रों के अनुसार ईओ सुशील भुक्कल के मुख्यालय अटैच होने के बाद अवैध काम करने वाले उसके चेले फील्डमैन जगमिंदर राठी और कंप्यूटर ऑपरेटर रॉबिन यादव ने आका को बचाने के लिए सुबूत मिटाने शुरू कर दिए। बताया जा रहा है कि इसकी जानकारी आला अधिकारियों को हुई तो जगमिंदर राठी को बावल नगर परिषद भेज दिया गया। कहने को तो उसे सजा दी गई है लेकिन वास्तव में उसे बावल भेज कर अपने घर के नजदीक पहुंचाया गया है। दरअसल, जगमिंदर राठी के खास रिश्तेदार क्षेत्र के कद्दावर भाजपा नेता के रामपुरा हाउस में चिलम भरने, दरी उठाने का काम करते हैं, उन रिश्तेदारों के कारण ही सुबूत होने के बावजूद जगमिंदर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई।

बताया जा रहा है कि बलवान नामक कर्मचारी की लॉगइन आईडी पर फर्जी प्रॉपर्टी बनाने के खेल मेें कंप्यूटर ऑपरेटर रॉबिन सिंह भी फंस रहा है लेकिन उसके पिता छुटभैया भाजपा नेता ने पार्टी के बड़े नेताओं के पैर पकड़ कर किसी तरह बेटे को बचाया है, हालांकि यदि निष्पक्षता से जांच होगी तो उसे कोई बचा नहीं पाएगा। रेवाड़ी नगर परिषद में ईओ सुशील भुक्कल के भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाली खबर छपने पर मज़दूर मोर्चा को अदालत में घसीटने की धमकी देने वाले जगमिंदर राठी का एक और काला कारनामा सामने आया है। प्रॉपर्टी आईडी बनाने के नाम पर गरीब मज़दूर से करीब 18 हजार रुपये ऐंठ लिए गए, यह लूटमार भी ईओ सुशील भुक्कल की देखरेख में ही की गई। रेवाड़ी के रामसिंहपुरा निवासी नीलम के नाम 110 वर्ग गज का प्लॉट है। उसके पति दिहाड़ी मज़दूर सारेन सिंह ने बताया कि अप्रैल 2025 में उसने प्लॉट की प्रॉपर्टी आईडी बनाने के लिए आवेदन किया था। नगर परिषद हॉल की दुकानों में बैठने वाले प्रवीण नक्शानवीस ने उसकी प्रॉपर्टी का आधा अधूरा नक्शा बना कर नगर परिषद कार्यालय में जमा करवा दिया।

बताया जा रहा है कि सुशील भुक्कल ईओ के साथ बिल्डिंग इंस्पेक्टर (बीआई) पद भी संभाल रहे थे। बीआई ने सारेन को फाइल में कमियां बता कर लौटा दी और इस संबंध में असिस्टेंट जगमिंदर राठी से मिलने की सलाह दी। समझा जा सकता है कि प्रॉपर्टी आईडी जैसे मोटी कमाई वाले काम के लिए उसे यह सलाह क्यों दी गई थी। मिलने पर जगमिंदर राठी और प्रवीन नक्शानवीस ने प्रॉपर्टी आईडी पर 17 हजार 900 रुपये जमा करवाने को कहा। गरीब सारेन ने उधार-व्यवहार कर किसी तरह पैसे जोड़े और इनके द्वारा दिए गए क्यूआर कोड पर धनराशि जमा करवा दी और ट्रांजेक्शन की कॉपी फाइल में लगा दी। चार महीने बीतने के बावजूद प्रॉपर्टी आईडी नहीं बनी। सारेन का आरोप है कि जगमिंदर राठी और प्रवीन कह रहे हैं कि वह रुपये तो किसी दूसरी प्रॉपर्टी आईडी में खर्च हो गए, अगर अपनी बनवानी है तो दोबारा रुपये जमा कराओ। सारेन तो राठी और प्रवीन के दिए क्यूआर कोड पर पैसा जमा करवाया था, यदि वह गलत प्रॉपर्टी आईडी में चली गई है तो राशि वापस कराई जाए या फिर वह धनराशि सही प्रॉपर्टी आईडी में एडजस्ट की जानी चाहिए।

जानकारों के अनुसार हरामखोरी में माहिर जगमिंदर राठी आदि का खेल यह है कि मजबूर करके दोबारा करीब 18 हजार रुपये जमा करवा लो, इसके बाद पहले वाली प्रॉपर्टी आईडी की धनराशि वापस करने के नाम पर निकाल कर बदंरबांट की जाती। यह केस तो खुल गया इस तरह के अनेक केस हो सकते हैं जिनके लिए गहन जांच करना जरूरी है। प्रवीन और राठी द्वारा खुलेआम की गई लूट की शिकायत पीडि़त ने समाधान केंद्र में दी है। डीएमसी ब्रह्मप्रकाश ने मामले की जानकारी से इनकार करते हुए बताया कि शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी, यदि धन गलत प्रॉपर्टी आईडी में जमा करवाया गया होगा तो गलती को दुरुस्त करा प्रॉपर्टी आईडी बनवाई जाएगी।

सुशील भुक्कल, उसके हरामखोर चेलों जगमिंदर राठी, कंप्यूटर ऑपरेटर रॉबिन यादव के प्रॉपर्टी आईडी द्वारा नाले की जमीन पर कब्जा कर बनाए गए सुपर प्राइम हॉस्पिटल को ही बिना नक्शा और रजिस्ट्री के एनओसी नहीं दी, इनके अलावा सर्कुलर रोड स्थित सावित्री अस्पताल, मॉडल टाउन में एक और अस्पताल को एनओसी जारी की है। इनके अलावा बाईपास रोड स्थित एक मॉल को भी एनओसी जारी की गई। हरामखोरी और भ्रष्टाचार की हद यह कि इन अस्पतालों की फाइलें नक्शा पास न होने, जेई की लिखित आपत्ति और अस्वीकृति लगी होने, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति नहीं होने के कारण लंबे अर्से से लटकी पड़ी थीं, भुक्कल एंड कंपनी ने सारे नियम कानून ताक पर रख कर अधिकारियों को ठेंगा दिखाते हुए एनओसी जारी की। ये तो भुक्कल एंड कंपनी द्वारा हाल ही में की गई हरामखोरी के नमूने हैं यदि उनके पूरे कार्यकाल की जांच की जाए तो करोड़ों के राजस्व की हानि सामने आ सकती है। उनके चेलों जगमिंदर राठी और रॉबिन यादव के सारे कामों की जांच की जाए तो प्रॉपर्टी आईडी से लेकर एनओसी जारी करने के सैकड़ों कारनामे सामने आएंगे। बताया जा रहा है कि इन हरामखोरों ने बलवान नामक कर्मचारी की लॉगइन आईडी से 90 फीसदी से अधिक गलत प्रापर्टी आईडी आदि बनाई हैं। लेकिन जब सरकार ही भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे तो हरामखोर कर्मचारी बेखौफ होकर इसी तरह लूट कमाई करते रहेंगे।

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