करनाल (मज़दूर मोर्चा)। इस नगर के सेक्टर-36 स्थित डीआरपी एन्क्लेव और स्वर्ण भूमि रियल इस्टेट प्राइवेट कम्पनी से इनके कथित फर्जीवाड़ों के कारण यहां के लोकल रेजिडेंट्स के साथ लंबे समय से चली आ रही शिकायतों, विवादों और आपसी संघर्ष ने पुलिस मुक़दमे की शक्ल अख्तियार कर ली है।
कॉलोनी के रेजिडेंट्स की लिखित शिकायत पर करनाल सिटी पुलिस थाने में एक प्राथमिकी (FIR नंबर 0136) दर्ज की गई है। यह प्रकरण विगत 25 फरवरी की रात 10:43 बजे दर्ज हुआ। शिकायतकर्ता जितेंद्र सिंह, जो स्वयं डीआरपी डीआरपी रेजिडेंट्स एसोसिएशन से जुड़े हैं । इसी एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने जनता यानि प्लॉट धारकों व निवासियों के साथ हुई कथित धांधलियों और दस्तावेजी फर्जीवाड़े की शिकायत विगत जिला कष्ट निवारण कमेटी में उपस्थित होकर मंत्री एवं कमेटी चेयरमैन रणबीर गंगवा से की थी । इसी शिकायत पर जनता की फरियाद का संज्ञान लेते हुए मंत्री रणबीर गंगवा ने मौके पर मौजूद उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक को रियल इस्टेट प्राइवेट कम्पनी स्वर्ण भूमि और डीआरपी एनक्लेव के खिलाफ़ सीधे एफआईआर दर्ज़ करने के आदेश दिए थे । इन्हीं आदेशों की अनुपालना में करनाल पुलिस ने कॉलोनाइजर सतबीर सिंह पूनिया सहित कुल 19 आरोपियों के खिलाफ़ अपराधिक मुकद्दमा दर्ज किया है।
एफआईआर में नामजद आरोपियों में जो जो लोग शामिल हैं, उनके नाम इस प्रकार हैं : सतबीर सिंह पूनिया (पिता : रति राम, सिरसा निवासी ), वीरेंद्र पूनिया (पुत्र सतबीर सिंह) सविता रानी (पत्नी वीरेंद्र पूनिया) कंवलजीत (पुत्र अनिल पूनिया) गुलाब सिंह पूनिया, राजेश पूनिया, कविता, राहुल, रितेश, पूनम, नरेश सिंह, बिमला, नरेंद्र सिंह, अमित, मनबीर सिंह, सुंदर सिंह, तरुण हुड्डा, सुरेश सिंह तथा सागर अरोड़ा । इस मुक़दमे में सतबीर सिंह पूनिया को मुख्य आरोपी ठहराया गया है । बाकि आरोपियों को उनकी टीम बताया गया है, इनमें उनके परिजन, पार्टनर और सहयोगी शामिल हैं । उक्त सभी आरोपी मुख्य रूप से रोहतक, सिरसा तथा करनाल के रहने वाले हैं। इनके ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता ( BNS ) : 2023 की विभिन्न सुसंगत धाराओं – 127(2), 316(2), 318(4), 329(3), 351(2), 61 तथा 62 के अंतर्गत उक्त मुकद्दमा दर्ज़ हुआ है । ये सभी धाराएं आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, गंभीर चोट पहुंचाने की कोशिश, धमकी तथा संगठित अपराध से संबंधित हैं। इस मामले में पुलिस जांच कभी भी तेजी पकड़ सकती है।
रियल इस्टेट कंपनी संचालकों पर आरोप है कि सतबीर सिंह पूनिया (उर्फ सतबीर सिंह) तथा उनके परिवारजन और सहयोगियों ने वर्ष 2010 में लगभग 18 एकड़ भूमि पर अनधिकृत कॉलोनी विकसित की। यह भूमि सरकारी नहर (60 फुट नाला वाली सरकारी जमीन) सहित अन्य सरकारी रिकॉर्ड वाली जमीन पर कब्जा करके बनाई गई है। फर्जी दस्तावेजों से प्लॉट बिक्री का आरोप पुलिस को सौंपी गई शिकायत में लगाया गया है । प्रशासन को सौंपी गई शिकायत में रेजिडेंट्स एसोसिएशन ने खुलासा किया है कि उक्त आरोपियों ने फर्जी खसरा नंबर, फर्जी टाउन प्लानिंग (TP) स्कीम तथा फर्जी रजिस्ट्री के जरिए प्लॉट बेच रखे हैं। मुख्य सड़क को 40 फुट से घटाकर 30 फुट किया गया है तथा आंतरिक गलियों (20 फुट, 30 फुट) पर कब्जा कर रास्ते बंद कर दिए गए हैं । आरोप है कि आरोपियों ने सरकारी विभागों (PWD, नगर निगम, DTCP) में हेराफेरी की तथा भूमि को ०स्वर्ण भूमि’ या ‘DRP अनिल आंगन’ जैसे झूठे नामों से वैध दिखाने की कोशिश की गई। धमकियों, मारपीट और JCB से हमले जैसे गंभीर आरोप भी दर्ज एफआईआर में लगाए गए हैं । बताया गया है कि आरोपियों ने कॉलोनी निवासियों को ज्यादतियों के खिलाफ़ आवाज़ उठाने पर जान से मारने की धमकियां दी गई। इस संदर्भ में नवंबर 2025 में कई घटनाएं भी दर्ज हैं, जिनमें छ्वष्टक्च और अन्य यांत्रिक साधनों से उन पर हमला किया गया तथा रास्तों पर कब्जा बनाए रखने की कोशिश की गई।
उक्त FIR दर्ज होने के बाद जांच का प्रभार SI राजबीर सिंह को सौंपा गया है। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि सभी अवैध कब्जे तुरंत हटाए जाएं, सड़कें खुलवाई जाएं, फर्जी दस्तावेज रद्द किए जाएं तथा आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। निवासियों में आक्रोश : कॉलोनी निवासियों का कहना है कि कई वर्षों से वे धमकियों, अवैध कब्जे तथा रास्तों की समस्या से जूझ रहे हैं। पहले भी DTP, नगर निगम तथा पुलिस को शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब FIR दर्ज होने से न्याय की उम्मीद जगी है। स्थानीय विधायक तथा प्रशासनिक अधिकारियों से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही अब आगे की कार्रवाई की सूरत बन पाएगी । यह मामला हरियाणा में अवैध कॉलोनियों तथा भूमि माफिया के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा बन सकता है। (ज्ञानप्रकाश बागी)