फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सेक्टर 88 की सैनिक विहार सोसायटी के फ्लैटों की कन्वेयंस डीड करवाने में होने वाली ऊपरी कमाई के लिए पूर्व डायरेक्टर और एकमात्र अधिकृत एडवोकेट राजेंद्र सिंह पालीवाल आमने सामने हैं। दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर सोसायटी मेंबरों को लूटने की साजिशें रचने का आरोप लगा रहे हैं। इस लड़ाई में एक अदद आशियाना लेने के इरादे से जीवन भर की कमाई लगाने वाले सदस्य बुरी तरह पिस रहे हैं।
अब सोसायटी वाले पूर्व डायरेक्टर महाबीर सिंह पर बेटे को लाभ पहुंचाने के लिए दांवपेंच खेलने का आरोप लगा रहे है। सदस्यों के अनुसार सैनिक विहार सोसायटी को पूरा करने के लिए टीडीआई के साथ कोलाब्रेशन करना पड़ा था। इसके तहत टीडीआई मेंबरों को 702 फ्लैट और आधारभूत ढांचा बना कर देगी, इसके बदले सोसायटी टीडीआई को करीब 23 एकड़ जमीन देनी तय हुई थी। उनका दावा है कि कोलाब्रेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने वालों में महाबीर सिंह भी शामिल थे। टीडीआई को स्पेशल पावर ऑफ अटार्नी भी महाबीर सिंह की सहमति और उनके हस्ताक्षर से ही दी गई। आरोप है कि जब एमओयू के तहत बिल्डर ने फ्लैट बना कर दे दिए तो उसे जमीन ट्रांसफर करने में महाबीर सिंह ने टांग अड़ा दी और एसीएस एडिशनल चीफ सेक्रेटरी कोआपॅरेशन चंडीगढ़ में शिकायत कर दी। बताया जा रहा है कि बिल्डर ने मामले को न अटकाने के एवज में महाबीर को मोटे नजराने के नाम पर मनाया, इसके बाद उन्होंने पैरवी ढीली कर दी और एसीएस ने शिकायत खारिज कर बिल्डर को जमीन ट्रांसफर करने का आदेश दिया।
सदस्यों के अनुसार सोसायटी बिल्डर को 18 एकड़ जमीन देना चाहती थी बाकी 5 एकड़ जमीन सोसायटी के बाकी आधारभूत कार्य पूरे करने के बाद दिया जाना था। आरोप है कि पहले से ही टीडीआई से मिलीभगत कर चुके महाबीर सिंह ने उसे पूरी 23 एकड़ जमीन दिला दी। इसके एवज मे महाबीर ने अपने वकील बेटे अजय सिंह को टीडीआई की ओर से रजिस्ट्री करवाने वाले पैनल में शामिल करा दिया, इस तरह उनके बेटे ने रजिस्ट्री करवाने में खूब लाभ लूटा। एक प्लॉट की रजिस्ट्री में अस्सी हजार से एक लाख रुपये तक ऊपरी खर्चा वसूलने की चर्चाएं हैं। सदस्य के अनुसार सोसायटी की एनुअल जनरल मीटिंग में सर्वसम्मति से एडवोकेट राजेंद्र सिंह पालीवाल को फ्लैटों की कन्वयेंस डीड कराने के लिए अधिकृत किया गया था। यहां तक की महाबीर सिंह के फ्लैट के कन्वेयंस डीड रजिस्ट्री भी एडवोकेट पालीवाल ने करवाई। आरोप है कि रजिस्ट्री के काम में लाभ कमाने के लिए महाबीर ने तत्कालीन विधायक एवं आज के मंत्री हरियाणा सरकार राजेश नागर से पैरवी करवा कर अपने बेटे सहित दो अन्य एडवोकेट्स को रजिस्ट्री करवाने वाले पैनल में शामिल कराया। एडवोकेट पालीवाल इसके खिलाफ कोर्ट चले गए तो असिस्टेंट रजिस्ट्रार ने अपना निर्णय वापस ले लिया और तीनों एडवोकेट्स से अधिकार वापस ले लिए गए।
इस संबंध में एडवोकेट राजेंद्र सिंह पालीवाल का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने दावा किया कि पूर्व डायरेक्टर महाबीर सिंह ने प्रस्ताव रखा था कि यदि उनके बेटे केा प्रति रजिस्ट्री पांच हजार रुपये बांध दिए जाएं तो वह बेटे को रजिस्ट्री पैनल में शामिल कराने का दबाव नहीं डालेंगे। उन्होंने प्रस्ताव नहीं स्वीकारा तो मंत्री राजेश नागर से दबाव डलवाने की धमकी दी। सहकारिता विभाग के अधिकारियों पर भी मंंत्री की धौंस दिखा कर काम करने का प्रयास करते हैं। सोसायटी वालों का कहना है कि पूर्व डायरेक्टर और पालीवाल की रजिस्ट्री की जंग में सैनिक विहार सोसायटी के सदस्य प्रभावित हो रहे हैं।
पूछ-पड़ताल करने पर पता चला कि कन्वेयंस डीड की रजिस्ट्री करवाने में सहकारी विभाग, तहसील व कुछ अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों की दखलंदाजी रहती है। इनसे निपटना कोई सरल काम नहीं होता, पालीवाल से बात करने पर उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की कि बेशक उनके सिवा कहीं से भी करा लो लेकिन ये खर्चे तो भुगतने ही पड़ते हैं। व्यक्तिगत रूप से हर व्यक्ति इन अधिकारियों से निपटने में सक्षम नहीं होता उनसे निपटने में होने वाले खर्चों के अलावा स्टैंप ड्यूटी, रेडक्रॉस फीस आदि फीसें सभी इस खर्चे में शामिल होती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वसूली में से कोई पैसा सोसायटी के किसी कर्मचारी या डायरेक्टर आदि को नहीं दिया जाता। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी तरफ से ख़ुली छूट है कि कोई भी अपनी कन्वेयंस डीड चाहे तो खुद अथवा किसी से भी करा सकता है। उन्होंने ये भी जोड़ा कि महाबीर खुद अनेकों सदस्यों की कन्वेयंस डीड बिना कुछ दिए यह कह कर करा ले गए कि तमाम सरकारी खर्चे वे खुद भुगत लेंगे।