फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम को कभी जागीर की तरह इस्तेमाल करने वाला फर्जी डिग्रीधारक एक्सईएन पद्मभूषण नासवा और उसका सगा भाई पार्षद मनोज नासवा कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल की गोद में जा बैठे हैं। दोनों भाई अपनों की महफिल में कहते नजर आ रहे हैं कि मंत्री जी को बीस लाख की माला पहनाई है, अब तो हमारे अच्छे दिन आने वाले हैं, (फर्जी डिग्री वाला पद्म एसई बनने वाला है) और निगम में एक बार फिर हमारा दौर आएगा। सुधी पाठकों को याद दिला दें कि पद्मभूषण नासवा ने अपनी पत्नी स्वाति के नाम पर सैनिक कॉलोनी के ठीक बाहर पड़ोस में चार मंजिला इमारत बनाई हुई है। निगम क्षेत्र में केवल ढाई मंजिल इमारत बनाने की ही अनुमति है, वह भी फ्लोर एरिया रेश्यो की शर्त के साथ। निगम को बपौती समझने वाले नासवा बंधुओं ने सारे नियम शर्तों को जूते की नोक पर रख कर चार मंजिला इमारत खड़ी कर दी। दोनों भाई ठसक के साथ कहते हैं कि चाहे जितना जोर लगा ले कोई, सारे शहर में तोडफ़ोड़ होगी लेकिन हमारी इमारत शान से खड़ी रहेगी। पाठकों को याद होगा कि नगर निगम में केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर की जीहुजूरी करने वाले अधिकारियों को कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने दूसरे शहरों में फिकवा दिया था। उनमें गूजर के चेले मनोज नासवा का भाई पद्मभूषण भी था। विपुल ने उसे सोनीपत भिजवा दिया था।
अब पद्मभूषण नासवा और उसका भाई पार्षद मनोज नासवा अपने खास लोगों में ताल ठोंक कर कहते घूम रहे हैं कि एक्सईएन से सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर बनने के लिए कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल को बीस लाख रुपये चढ़ावा चढ़ाया है, जल्द ही फरीदाबाद में यह कुर्सी मिलने वाली है। नासवा बंधुओं के दावे में क्या सच्चाई है इसकी तो पुष्टि नहीं की जा सकती क्योंकि न तो रिश्वत देने वाला कहेगा कि उसने दिया और न ही लेने वाला मानेगा कि उसने लिया। हां, अगर फर्जी डिग्री होने के बावजूद यदि पद्मभूषण का प्रमोशन एसई पद पर होता है तो उसके दावे को सच माना जा सकता है।
बताया जा रहा है कि सिर्फ पद्म भूषण ही नहीं पार्षद मनोज नासवा भी कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल की गोद में जा बैठा है। सुधी पाठकों को याद दिलाते चलें कि पार्षद मनोज नासवा केंंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के दरबार में सलामी ठोंकता था। सीमा त्रिखा का करीबी होने के कारण मनोज नासवा से विधायक भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा की नहीं बनती थी। यही कारण है कि अदलखा ने नगर निगम चुनाव में मनोज को हरवाने के लिए उसके जमे जमाए वार्ड से टिकट कटवा कर अपने प्रभाव वाले एसजीएम नगर वाले वार्ड का टिकट दिलवाया था। तब मनोज ने अपना टिकट बचाने के लिए केंद्रीय मंत्री गूजर की खूब चरण वंदना भी की थी लेकिन गूजर ने चेले अदलखा के आगे नासवा को दरकिनार कर दिया था। चर्चा है कि नासवा पार्षद तो बन गया लेकिन अदलखा के अड़ंगों से वार्ड में कुछ कर नहीं पा रहा था। ऐसे में उसने भी पाला बदला और कथित तौर पर कैबिनेट मंत्री को बीस लाख का चढ़ावा चढ़ाने जा रहे भाई पद्म भूषण के साथ हो लिया था।
बताया जा रहा है कि दोनों भाइयों ने कैबिनेट मंत्री के पाले में आने का कदम अदलखा-गूजर के कारण खत्म होते कॅरियर को बचाने के लिए किया है। विधायक धनेश अदलखा जिस तरह अपने इलाके में तोड़ फोड़ करवा रहा है, उससे नासवा बंधुओं को अपनी चार मंजिला इमारत के भी टूटने का डर सता रहा था, कैबिनेट मंत्री के खेमे में आने के कारण वह सुरक्षित होगा और पद्मभूषण को भी तरक्की मिलेगी।
रसूख और रुपयों का खेल विधायक धनेश अदलखा के हाथों की कठपुतली बने निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा चार-पांच मंजिल वाली अनेकों इमारतों को तुड़वा रहे हैं लेकिन पद्मभूषण की पत्नी स्वाति नासवा की चार मंजिला अवैध इमारत को बचाया जा रहा है। जानकारों के अनुसार मज़दूर मोर्चा में स्वाति नासवा के अवैध निर्माण की खबर छपने के बाद सीधी कार्रवाई करने के बजाय मजबूरी में 2024 में उन्हे नोटिस जारी किया गया। जानकार कहते हैं कि एक्सईएन पद्मभूषण ने रसूख और रुपयों के बल पर यह नोटिस इसलिए जारी करवाया था कि स्वाति नासवा को कोर्ट से स्टे दिलवा दे, हुआ भी यही। हालांकि पद्मभूषण यहां नहीं है लेकिन पार्षद भाई मनोज नासवा की मंशा पर नगर निगम की जिला न्यायवादी शाखा करीब पंद्रह पेशियों के बाद आज तक न्यायालय में दस्तावेज नहीं जमा करवा पाई है। जानकार कहते हैं कि सैकड़ों अन्य लोग भी स्वाति नासवा की तरह ही न्यायालय से स्टे लेने के बाद जिला न्यायवादी शाखा नोटों की थैली के नीचे अपनी फाइल दबवाए हुए हैं।