मज़दूर मोर्चा ब्यूरो फऱीदाबाद। भले ही अयोध्या वासियों ने नरेंद्र मोदी की मंदिर राजनीति को ठुकरा दिया उसके बावजूद वहां के राम मंदिर का एक साल पूरा होने के उपलक्ष्य में चंद अंधभक्तों ने 22 जनवरी को शहर में कई जगह रैली निकाल कर मोदी की इस उपलब्धि की वर्षगांठ मनाई। रैली में काले रंग के मुख-शरीर और काले परिधान में सजे कलाकार राम मंदिर में स्थापित राम की काली मूर्ति की जीवित प्रतिकृति बन कर लोगों को आशीर्वाद दे रहे थे।
रैली में काले रंग के राम को देख कर सामान्य हिंदू चौंकते नजर आए। इनमें से अधिकतर लोगों का कहना था कि भगवान राम के अनन्य भक्त तुलसीदास ने तो अपनी रचनाओं में उनके रूप का अलग ही वर्णन किया है। तुलसीदास राम स्तुति श्री रामचंद्र कृपालु भजुमनज्.. में पुरुषोत्तम राम के शारीरिक सौंदर्य का उल्लेख नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं यानी उनके नेत्र, मुख, हाथ और चरण कमल के समान सुंदर और लालिमा लिए हुए हैं। आम हिंदुओं ने अभी तक भगवान राम के जो भी चित्र देखे उसमें वह नील वर्ण के और गौरवर्ण माता सीता के साथ ही दिखाई देते है। तुलसीदास के एक अन्य दोहे काम कोटि छबि स्याम सरीरा में भी उन्हें पानी से भरे गहरे नीले रंग के बादल के रूप में बताया गया है, यानी राम के काले मुख और काले शरीर का उल्लेख तो तुलसीदास की रामायण में भी नहीं है।
रैली में शामिल लोगों के बीच चर्चा रही कि यह राम भाजपा और मोदी ब्रांड के राजनीतिक राम हैं, इसीलिए इन्हें आम हिंदू के हृदय में बसने वाले राम से अलग काला दिखाया गया है। जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे गाने वाली भाजपा अपने नेता नरेंद्र मोदी की छवि भगवान राम का उद्धार करने वाले एतिहासिक पुरुष की बनाने के पैंतरे कर रही है। राम तो सदियों से हैं धर्मभीरु हिंदुओं के आराध्य हैं लेकिन भाजपा अपने ब्रांड वाले राम को प्रमोट करने में जुट गई है, इसीलिए काले वाले राम को अपना ब्रांड बनाया है। यह राम आम जनता को कोई फायदा पहुंचा पाएं या नहीं इतना निश्चित है कि हर चुनाव में भाजपा के लिए तुरुप का इक्का बन कर नेताओं के इशारे पर नाचेंगे।